भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ आज एक जाने-माने मैच रेफरी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। अपने खेल के दिनों में शानदार गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले श्रीनाथ ने रेफरी की भूमिका में भी पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से काम किया है। उन्होंने कई बड़े मुकाबलों में नियम और खेल भावना को सर्वोपरि रखा है, फिर चाहे बात भारतीय खिलाड़ियों के मामलों की ही क्यों न आई हो।
टॉस विवाद पर 25 साल बाद बड़ा खुलासा
हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जवागल श्रीनाथ से साल 2001 में खेली गई ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के उस चर्चित ईडन गार्डन्स टेस्ट मैच के बारे में सवाल किया गया, जो सौरव गांगुली और स्टीव वॉ के बीच हुए टॉस विवाद के लिए आज भी याद किया जाता है। उस मुकाबले में तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के लिए काफी देर तक इंतजार कराया था। कार्यक्रम में जब श्रीनाथ से यह पूछा गया कि यदि वह उस समय मैच रेफरी होते, तो क्या कदम उठाते, तो उन्होंने इस पर खुलकर अपनी राय रखी।
मैच रेफरी होते तो क्या करते श्रीनाथ
उसी कार्यक्रम के दौरान पुरानी यादों को ताजा करते हुए जवागल श्रीनाथ ने दो टूक अंदाज में कहा कि अगर वह उस मैच में रेफरी की भूमिका में होते, तो वह सौरव गांगुली पर सख्त कार्रवाई करते। श्रीनाथ के मुताबिक, वह भारतीय कप्तान को इस अनुशासनहीनता के लिए कुछ मैचों का बैन जरूर लगा देते। क्रिकेट गलियारों में सौरव गांगुली द्वारा टॉस में की गई इस देरी को हमेशा से उनके माइंड गेम का हिस्सा माना जाता रहा है, जिसने उस यादगार सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खेमे को मानसिक रूप से परेशान कर दिया था। हालांकि, बाद में सौरव गांगुली ने सफाई देते हुए यह कहा था कि उन्हें अपना ब्लेजर नहीं मिल रहा था, जिसकी वजह से वह टॉस के समय पर नहीं पहुंच पाए थे।
भारतीय क्रिकेट के पुनर्निर्माण में सौरव गांगुली का योगदान
सिर्फ उस विवाद की बात ही नहीं, बल्कि जवागल श्रीनाथ ने भारतीय कप्तान के नेतृत्व कौशल की जमकर सराहना भी की। उन्होंने उस दौर को याद किया जब टीम मैच फिक्सिंग के काले साये से उबर रही थी। श्रीनाथ ने बताया कि युवराज सिंह, हरभजन सिंह और वीरेंद्र सहवाग जैसे युवा खिलाड़ियों को तराशने और उन्हें मैच विनर बनाने में सौरव गांगुली की कप्तानी की बहुत बड़ी भूमिका रही थी। उनके अनुसार, उस कठिन समय के बाद भारतीय टीम के प्रत्येक खिलाड़ी के मन में देश की छवि को फिर से सुधारने और दुनिया को यह दिखाने का एक दृढ़ संकल्प था कि भारतीय क्रिकेट पूरी तरह साफ-सुथरा है, और इस महान बदलाव में सौरव गांगुली का योगदान अतुलनीय था।



















