शुभमन गिल की कप्तानी में युवा भारतीय क्रिकेट टीम जब श्रीलंका के दौरे के लिए रवाना हुई, तो हवाई अड्डे पर मौजूद प्रशंसकों और विशेषज्ञों के जेहन में इतिहास की पुरानी यादें ताजा हो गईं। इस नए दल में कई युवा चेहरे शामिल हैं, लेकिन इस दौरे की आहट मात्र से साल 2015 का वह ऐतिहासिक दौर याद आ जाता है जब भारतीय टीम ने श्रीलंकाई सरजमीं पर एक अभूतपूर्व वापसी की कहानी लिखी थी। अक्सर जब फैंस उस दौरे की बात करते हैं, तो केएल राहुल और अजिंक्य रहाणे के शानदार शतकों या रविचंद्रन अश्विन की जादुई स्पिन गेंदबाजी की चर्चा होती है। हालांकि, उस सीरीज का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट एक ऐसा मोड़ था जिसे बहुत से लोग नजरअंदाज कर देते हैं। वह मोड़ था कप्तान विराट कोहली का एक लीक से हटकर लिया गया फैसला और ऑलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी का वह एक यादगार ओवर, जिसने पूरे मैच और सीरीज का रुख पलट दिया था।
विराट कोहली का साहसिक दांव और आलोचकों का शोर
साल 2015 के उस दौर में विराट कोहली भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी की नई कमान संभाल रहे थे। सीरीज का पहला टेस्ट मैच गंवाने के बाद भारतीय टीम पर जबरदस्त दबाव था। ऐसे नाजुक वक्त में कोलंबो में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच के लिए कप्तान कोहली ने प्लेइंग इलेवन में ऑलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी को शामिल करने का बड़ा फैसला लिया। उस समय क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों और खेल समीक्षकों ने इस फैसले पर कड़े सवाल खड़े किए थे। आलोचकों का मानना था कि बिन्नी की गेंदबाजी की शैली और गति विदेशी या एशियाई पिचों पर उतनी असरदार साबित नहीं होगी। इसके बावजूद, पी सारा ओवल मैदान की पिच पर मौजूद सीम और उछाल को देखते हुए कोहली ने आलोचकों की परवाह किए बिना बिन्नी पर भरोसा जताया और उन्हें मैदान में उतार दिया।
एंजेलो मैथ्यूज की दीवार और भारतीय खेमे की छटपटाहट
कोलंबो के पी सारा ओवल मैदान पर चल रहे इस दूसरे टेस्ट मैच में भारत ने पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा किया था। जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम अपनी पारी को संभालने की जी-तोड़ कोशिश कर रही थी। श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज क्रीज पर अंगद की तरह पैर जमाकर खड़े हो चुके थे। मैथ्यूज 102 रनों की मैराथन पारी खेलकर भारतीय गेंदबाजों के हर हमले को नाकाम कर रहे थे। वह भारतीय टीम की जीत के रास्ते में एक अभेद्य दीवार बन चुके थे। अगर मैथ्यूज कुछ समय और क्रीज पर टिक जाते, तो मैच भारत की पकड़ से दूर निकल जाता। सीरीज में बने रहने के लिए भारत को यह मुकाबला हर हाल में जीतना जरूरी था, क्योंकि पहला मैच हारने के बाद एक और हार या ड्रॉ सीरीज गंवाने जैसा होता। ऐसे में भारतीय ड्रेसिंग रूम और मैदान पर खिलाड़ियों के चेहरों पर बेचैनी साफ झलक रही थी।
पी सारा ओवल में वो एक ऐतिहासिक आउटस्विंगर
जब तमाम मुख्य गेंदबाज मैथ्यूज का तोड़ निकालने में नाकाम साबित हो रहे थे, तब कप्तान विराट कोहली ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला। उन्होंने गेंद स्टुअर्ट बिन्नी के हाथों में थमा दी। बिन्नी ने गेंदबाजी क्रीज पर आते ही अपनी सटीक लाइन और लेंथ से श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। फिर आया वह लम्हा जो भारतीय टेस्ट इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। बिन्नी ने एक बेहतरीन आउटस्विंगर गेंद फेंकी, जिसे पढ़ने में शतकवीर एंजेलो मैथ्यूज पूरी तरह चकमा खा गए। गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेती हुई सीधे विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा के दस्तानों में समा गई। 102 रन पर बल्लेबाजी कर रहे मैथ्यूज का विकेट गिरते ही पी सारा ओवल मैदान में सन्नाटा छा गया और भारतीय खिलाड़ी खुशी से झूम उठे।
22 साल का सूखा खत्म और तीसरे टेस्ट का दोहरा प्रदर्शन
एंजेलो मैथ्यूज का आउट होना केवल एक विकेट गिरना भर नहीं था, बल्कि यह श्रीलंकाई मध्यक्रम और निचले क्रम की रीढ़ तोड़ने जैसा था। मैथ्यूज के पवेलियन लौटते ही पूरी श्रीलंकाई टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। भारत ने इस मैच में एक विशाल और शानदार जीत दर्ज करके सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। बिन्नी के इस जादुई स्पेल से पूरी टीम में एक नया आत्मविश्वास भर गया। इसके बाद खेले गए तीसरे और अंतिम टेस्ट मैच में भी बिन्नी ने अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने बल्ले से महत्वपूर्ण 49 रन बनाए और गेंदबाजी में 2 अहम विकेट झटके। भारतीय टीम ने तीसरा टेस्ट जीतकर श्रीलंका की धरती पर पूरे 22 साल बाद टेस्ट सीरीज जीतने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया।
भारतीय टेस्ट क्रिकेट में सही फैसले की अहमियत
स्टुअर्ट बिन्नी का वह प्रदर्शन इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि क्रिकेट के लंबे प्रारूप में सही समय पर लिया गया एक साहसिक फैसला और फेका गया एक सटीक ओवर पूरे मैच का भाग्य बदल सकता है। मैच से पहले बिन्नी के चयन पर सवाल उठाने वाले तमाम आलोचक इस प्रदर्शन के बाद कप्तान कोहली की दूरदर्शिता और बिन्नी के जज्बे की तारीफ करने पर मजबूर हो गए। विराट कोहली की कप्तानी के शुरुआती दौर की यह जीत भारतीय क्रिकेट के सबसे महान कमबैक में से एक मानी जाती है, जिसकी नीव पी सारा ओवल में बिन्नी के उस एक ऐतिहासिक ओवर ने रखी थी।



















