भारतीय क्रिकेट टीम को आगामी वनडे वर्ल्ड कप में चैंपियन बनाने के लिए पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि आगामी वैश्विक टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए देश के घरेलू मैदानों पर बाउंड्री की लंबाई को बढ़ा देना चाहिए। आगामी विश्व कप मुकाबलों की मेजबानी संयुक्त रूप से दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया द्वारा की जानी है, और इन विदेशी परिस्थितियों से निपटने के लिए भारतीय खिलाड़ियों को अभी से बड़ी बाउंड्री पर अभ्यास करने की जरूरत है।
घरेलू मैदानों पर बाउंड्री बढ़ाने की मांग
खेल पत्रिकाओं में लिखे अपने नियमित कॉलम के माध्यम से इस महान खिलाड़ी ने इस बात पर जोर दिया कि आगामी घरेलू सत्र की शुरुआत के साथ ही सभी मैदानों पर बाउंड्री का दायरा बड़ा कर देना चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि यदि बल्लेबाज अभी से ऐसी विशाल सीमाओं पर अभ्यास करेंगे, तो आगामी विश्व कप के दौरान उन्हें मैदान की माप से तालमेल बिठाने में कोई कठिनाई नहीं होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश स्टेडियमों में एलईडी विज्ञापन बोर्ड के पीछे काफी अतिरिक्त स्थान उपलब्ध है, जिसके कारण इस बदलाव को अमल में लाना किसी भी प्रकार से कठिन नहीं होगा।
स्मार्ट और रणनीतिक क्रिकेट पर जोर
वनडे प्रारूप में केवल अंधाधुंध शॉट्स लगाने से जीत हासिल नहीं की जा सकती है, बल्कि इसके लिए सूझबूझ और रणनीति की आवश्यकता होती है। बल्लेबाजों को यह भली-भांति सीखना होगा कि किस गेंदबाज के खिलाफ रक्षात्मक रुख अपनाना है और किस गेंदबाज पर आक्रामक होकर रन बटोरे जा सकते हैं। किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम के पास पांच श्रेष्ठ गेंदबाज नहीं होते हैं, इसलिए प्रत्येक मैच के दौरान स्कोरबोर्ड को चलाने के अवसर हमेशा मिलते रहते हैं।
शॉट के चयन और अहंकार पर नियंत्रण
खिलाड़ियों को अपनी स्थापित छवि के दबाव में आकर हर गेंद पर हवाई शॉट खेलने के प्रयास से बचना चाहिए। इस संबंध में सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि शॉट का चुनाव बेहद अहम भूमिका निभाता है और खिलाड़ियों को अपने अहंकार को किनारे रखकर प्रत्येक गेंद को उसकी मेरिट के हिसाब से खेलना चाहिए।
टी20 और वनडे प्रारूप का अंतर
छोटे प्रारूप और वनडे क्रिकेट के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि टी20 मुकाबलों में पहले ओवर से ही ताबड़तोड़ प्रहार करने की अनिवार्यता होती है, जबकि वनडे में खिलाड़ियों के पास पर्याप्त समय होता है। इस लंबे प्रारूप में बल्लेबाज पहले पिच के मिजाज को अच्छी तरह भांपते हैं और उसके बाद अपनी पारी को आगे बढ़ाते हैं। यदि भारतीय खेमा अभी से इन बारीकियों पर काम करना शुरू कर दे, तो आगामी टूर्नामेंट में खिताबी जीत की संभावनाएं काफी हद तक मजबूत हो सकती हैं।



















