अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान न्यूजीलैंड डॉलर अमरीकी डॉलर के मुकाबले 0.5835 के करीब मजबूती दर्ज करता हुआ दिखाई दिया। वैश्विक मुद्रा बाजार में निवेशकों और ट्रेडर्स का ध्यान पूरी तरह से अमरीका के आगामी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों पर टिका हुआ है। इससे पहले अमरीका में जारी हुए उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई के आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि अमरीका में थोक स्तर पर महंगाई की दर अभी भी बनी हुई है। इस डेटा के सार्वजनिक होने के बाद ब्याज दर वायदा बाजार में इस बात की संभावना 70 प्रतिशत से अधिक हो गई है कि अमरीकी फेडरल रिजर्व अपनी आगामी बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि कर सकता है। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड के केंद्रीय बैंक का नरम रुख घरेलू मुद्रा की बढ़त को सीमित कर रहा है।
अमरीकी दरें और रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का रुख
अमरीका में पीपीआई आंकड़ों के उम्मीद से अधिक गर्म रहने के बाद सीएमई फेडवॉच टूल के जरिए बाजार सहभागियों ने अमरीकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना को 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (आरबीएनजेड) ने अपनी हालिया नीतिगत समीक्षा में आधिकारिक नकद दर यानी ओसीआर को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 2.75 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने अपनी ब्याज दर बढ़ोतरी के साथ एक बेहद सतर्क और नरम मौद्रिक रुख अपनाया है। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड ने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा ब्याज दर स्तर अभी भी अर्थव्यवस्था के लिए सहायक बने हुए हैं और केंद्रीय बैंक का मुख्य ध्यान मौद्रिक प्रोत्साहन को बहुत धीरे-धीरे और क्रमिक रूप से हटाने पर है।
अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का व्यापक रूप से मानना है कि वर्ष के अंत से पहले, संभवतः दिसंबर महीने में, न्यूजीलैंड का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कम से कम एक और वृद्धि कर सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड के सतर्क रुख और भविष्य के दिशा-निर्देशों ने बाजार की उन उम्मीदों को धीमा कर दिया है जो एक बहुत हीक्रामक मौद्रिक कसाव चक्र की उम्मीद कर रही थीं। केंद्रीय बैंक के इस सतर्क रवैये के कारण न्यूजीलैंड डॉलर की ऊपरी बढ़त पर एक तरह से सीमा लग गई है, जो आने वाले दिनों में मुद्रा पर दबाव बनाए रख सकता है।
तकनीकी चार्ट विश्लेषण और प्रमुख मूल्य स्तर
दैनिक प्राइस चार्ट का तकनीकी विश्लेषण करने पर पता चलता है कि निकट भविष्य में न्यूजीलैंड डॉलर बनाम अमरीकी डॉलर (NZD/USD) की जोड़ी में मंदी का झुकाव बना हुआ है। इस जोड़ी का हाजिर मूल्य 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और बोलिंजर बैंड्स की मध्य रेखा से नीचे अटका हुआ है। तकनीकी संकेतक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई (14) वर्तमान में 41 से 43 के आसपास बना हुआ है। यह स्तर किसी अति-बिक्री यानी ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाने के बजाय कमजोरी का संकेत देता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिकवाल अभी भी बाजार में मजबूत स्थिति में हैं। जब तक मूल्य निकटतम मूविंग एवरेज प्रतिरोध को पार नहीं कर लेता, तब तक गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
गिरावट के परिदृश्य में पहला प्रमुख सपोर्ट स्तर बोलिंजर बैंड्स की निचली सीमा 0.5800 पर स्थित है। यदि मूल्य इस क्षेत्र से नीचे ब्रेकआउट देता है, तोNZD/USD जोड़ी में और अधिक गहरी गिरावट का रास्ता खुल सकता है, जिससे यह अपने पिछले निचले स्तरों की ओर खिसक सकती है। दूसरी ओर, ऊपर की तरफ तात्कालिक प्रतिरोध 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज पर 0.5842 के स्तर पर मौजूद है। इसके बाद बोलिंजर बैंड्स की मध्य रेखा 0.5900 के आसपास एक मजबूत रुकावट के रूप में कार्य करती है। इस मंदी के माहौल को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए मूल्य को बोलिंजर बैंड्स की ऊपरी सीमा 0.6000 के स्तर को पार करना होगा, जो कि एक दूरस्थ प्रतिरोध स्तर है।
न्यूजीलैंड डॉलर के बुनियादी कारक: चीन और डेयरी निर्यात
व्यापारियों के बीच किवी के नाम से जाने जाने वाला न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में एक प्रमुख और सक्रिय रूप से कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। न्यूजीलैंड डॉलर का मूल्य काफी हद तक देश की आर्थिक स्थिति और वहां के केंद्रीय बैंक की नीतियों से निर्धारित होता है। हालांकि, कुछ विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय कारक भी हैं जो न्यूजीलैंड डॉलर की चाल को गहराई से प्रभावित करते हैं। चीन की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़ी किसी भी नकारात्मक खबर का सीधा मतलब यह होता है कि वहां न्यूजीलैंड के उत्पादों का निर्यात कम होगा, जिसका असर न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा पर पड़ता है।
न्यूजीलैंड डॉलर को प्रभावित करने वाला दूसरा सबसे बड़ा बुनियादी कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार में डेयरी उत्पादों की कीमतें हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि डेयरी उद्योग न्यूजीलैंड के कुल निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है। जब वैश्विक बाजार में डेयरी उत्पादों की कीमतें अधिक होती हैं, तो न्यूजीलैंड की निर्यात आय में बढ़ोतरी होती है। इससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और न्यूजीलैंड डॉलर को सीधा समर्थन मिलता है। इसके विपरीत, डेयरी कीमतों में गिरावट घरेलू मुद्रा के लिए नकारात्मक साबित होती है।
केंद्रीय बैंक का लक्ष्य और ब्याज दर अंतर का प्रभाव
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का प्राथमिक लक्ष्य मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति दर को 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के बीच बनाए रखना है, जिसमें मुख्य ध्यान इसे 2 प्रतिशत के मध्य बिंदु के करीब रखने पर होता है। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों का उचित स्तर तय करता है। जब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति बहुत अधिक हो जाती है, तो आरबीएनजेड आर्थिक गतिविधियों को ठंडा करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। ब्याज दरें बढ़ने से देश के सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल यानी यील्ड अधिक हो जाती है, जो विदेशी निवेशकों को न्यूजीलैंड में निवेश करने के लिए आकर्षित करती है और इस प्रकार NZD को मजबूती मिलती है।
इसके विपरीत, जब ब्याज दरें कम की जाती हैं या दरें कम रहने की उम्मीद होती है, तो न्यूजीलैंड डॉलर कमजोर होने लगता है। इसके अलावा, ब्याज दर अंतर या रेट डिफरेंशियल भी NZD/USD की विनिमय दर को तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इसका मतलब यह है कि न्यूजीलैंड में ब्याज दरें अमरीका के फेडरल रिजर्व द्वारा तय की गई दरों की तुलना में किस स्तर पर हैं या भविष्य में कहां रहने की संभावना है। यदि अमरीका में दरें न्यूजीलैंड की तुलना में तेजी से बढ़ती हैं, तो पूंजी अमरीकी डॉलर की ओर प्रवाहित होती है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन का हाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमरीकी डॉलर (AUD/USD) शुक्रवार के एशियाई सत्र के दौरान 0.7100 के मध्य स्तर के करीब स्थिर होता नजर आया। इसने पिछले कारोबारी दिन दर्ज की गई तेज गिरावट को रोक दिया है, जब यह एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर पर चला गया था। अमरीका के मजबूत पीपीआई आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाए जाने के दांव को मजबूत किया था, जिससे अमरीकी डॉलर में उछाल आया और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भारी दबाव पड़ा था। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नुकसान को सीमित कर दिया।
इसी तरह, अमरीकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान 154.00 के स्तर के आसपास निचले दायरे में बना रहा। जापान में उम्मीद से अधिक गर्म पीपीआई आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त करने की संभावनाओं को बढ़ा दिया, जिससे जापानी येन को नया समर्थन मिला। हालांकि, अमरीकी डॉलर ने अमरीकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पहले अपनी पिछली बढ़त को बरकरार रखा, जिससे जापानी येन की बढ़त भी एक सीमित दायरे में ही बंधी रही।


















