कर्ज के बोझ से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आईडिया एक बार फिर वित्तीय बाजार के केंद्र में आ गई है। देश के टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और नेटवर्क कवरेज का विस्तार करने के उद्देश्य से कंपनी बड़े पैमाने पर नए कर्ज की तलाश में है। इस दिशा में एक अहम प्रगति देखने को मिली है, जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के नेतृत्व में बैंकों का एक कंसोर्टियम वोडाफोन आईडिया के लगभग 35,000 करोड़ रुपये के फंडिंग प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। वित्तीय बाजार में इस खबर के आने के बाद शुक्रवार, 11 सितंबर को कंपनी के शेयरों में निवेशकों की नई दिलचस्पी देखी गई।
फंडिंग प्रस्ताव और इसकी बनावट
बैंकों के समक्ष रखे गए इस 35,000 करोड़ रुपये के कुल पैकेज को मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें से लगभग 25,000 करोड़ रुपये की राशि फंडेड फैसिलिटीज यानी सीधे टर्म लोन या कार्यशील पूंजी के रूप में मांगी गई है। इसके अलावा, शेष 10,000 करोड़ रुपये नॉन-फंडेड सुविधाओं के अंतर्गत रखे गए हैं, जिनमें बैंक गारंटी और लेटर्स ऑफ क्रेडिट (एलसी) जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
यह गैर-फंडेड ढांचा वोडाफोन आईडिया को अपने वेंडर्स और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं के प्रति प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करेगा। कंपनी इस पूंजी का उपयोग अपने 4G और 5G नेटवर्क के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाने और रिलायंस जियो तथा भारती एयरटेल जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों का मुकाबला करने के लिए करना चाहती है।
शुक्रवार को कैसा रहा शेयरों का हाल
फंडिंग वार्ताओं की खबरों के बीच शुक्रवार को वोडाफोन आईडिया के शेयरों में सुस्ती के बीच हल्की तेजी का रुख रहा। सुबह लगभग 11:21 बजे कंपनी का शेयर 0.54 प्रतिशत या 0.08 रुपये की बढ़त के साथ 14.98 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। दिन के दौरान शेयर 15.08 रुपये पर खुला और इसने 15.20 रुपये का उच्च स्तर तथा 14.84 रुपये का निचला स्तर छुआ।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बैंक लोन मंजूर हो जाता है, तो इससे वोडाफोन आईडिया को अपनी अल्पकालिक और मध्यकालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में बड़ी राहत मिलेगी। इससे कंपनी को अपने नेटवर्क रोलआउट को तेज करने में मदद मिलेगी, जो पिछले कुछ समय से पूंजी की कमी के कारण सुस्त पड़ा हुआ था।
बैंकों की सतर्कता और सरकार की हिस्सेदारी
हालांकि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती समीक्षा स्तर पर है और अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। कंसोर्टियम में शामिल प्रत्येक बैंक अपने क्रेडिट एक्सपोजर, वोडाफोन आईडिया की पुनर्भुगतान क्षमता, प्रतिभूति संरचना और आंतरिक जोखिम मापदंडों का बारीक अध्ययन कर रहा है। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, अतीत में टेलीकॉम क्षेत्र में रहे तनाव को देखते हुए लेंडर्स सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुनर्भुगतान की ठोस गारंटियों की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, बकाए के बदले इक्विटी रूपांतरण के बाद भारत सरकार का कंपनी में सबसे बड़ा शेयरधारक बनना बाजार और बैंकरों के लिए राहत का एक पहलू है। हालांकि, इसके बावजूद बैंक इस बात की पूरी जांच कर रहे हैं कि वोडाफोन आईडिया का व्यावसायिक मॉडल और कैश-फ्लो जनरेशन भविष्य में कर्ज चुकाने के लिए कितना सक्षम होगा।
जेफरीज की रिपोर्ट और 20 रुपये का टारगेट
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने 10 सितंबर को वोडाफोन आईडिया पर अपनी नई कवरेज रिपोर्ट जारी की थी। जेफरीज ने वोडाफोन आईडिया को एक 'हाई-बीटा टर्नअराउंड अवसर' करार देते हुए इसके शेयर के लिए 20 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है, जो वर्तमान में बाजार में उपलब्ध सबसे ऊंचे टारगेट में से एक है।
ब्रोकरेज का मानना है कि यदि कंपनी कर्ज के जरिए 25,000 करोड़ रुपये जुटाने में सफल रहती है, तो इससे अगले कुछ वर्षों के लिए उसकी फंडिंग की जरूरतें काफी हद तक पूरी हो जाएंगी। हालांकि, जेफरीज ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबी अवधि में कंपनी को स्थायी रूप से मजबूत स्थिति में लाने के लिए आगे चलकर अतिरिक्त इक्विटी जुटाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है।


















