भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रमुख विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपने गृह राज्य उत्तराखंड में स्थायी निवास बनाने की इच्छा जताते हुए राज्य प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। वर्तमान में श्रीलंका के दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम के साथ मौजूद इस स्टार खिलाड़ी ने सोशल मीडिया मंच एक्स का सहारा लेते हुए सीधे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई है। ऋषभ पंत पिछले तीन वर्षों से दिल्ली से अपना मुख्य ठिकाना बदलकर उत्तराखंड में बसने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त बड़ी और सुविधाजनक आवासीय भूमि खोजने में असमर्थ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता राज्य के विकास में सक्रिय योगदान देने और अपने मूल पहाड़ी समुदाय के निकट रहने की है।
ऋषभ पंत का सार्वजनिक संदेश और सरकारी दर पर खरीदारी का प्रस्ताव
7 अगस्त 2026 को जारी अपने विस्तृत संदेश में ऋषभ पंत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विनम्र अनुरोध करते हुए अपनी समस्या साझा की। पंत ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने के नाते कोई प्रोत्साहन मिलना गर्व की बात होती है, परंतु वे किसी भी प्रकार की मुफ्त जमीन या रियायत की मांग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि उन्हें निर्धारित सरकारी दरों पर भूमि खरीदने की अनुमति और सहायता प्रदान की जाए ताकि वे अपने गृह राज्य में अपना पहला घर निर्मित कर सकें। हरिद्वार जिले के रुड़की शहर में जन्मे ऋषभ पंत ने अपने शुरुआती क्रिकेट करियर का सफर इसी राज्य से शुरू किया था। यद्यपि वे घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिताओं में दिल्ली टीम का प्रतिनिधित्व करते आए हैं, परंतु उत्तराखंड के साथ उनका भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव अटूट रहा है।
उत्तराखंड नए भू-कानून 2025: बाहरी राज्यों के नागरिकों के लिए कड़े नियम
ऋषभ पंत की इस सार्वजनिक अपील के बाद राज्य में जमीन खरीद-बिक्री के मौजूदा कानूनी नियमों और प्रशासनिक सीमाओं पर व्यापक चर्चा छिड़ गई है। उत्तराखंड में लागू नए भू-कानून नियम 2025 के अंतर्गत अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार या किसी भी बाहरी क्षेत्र से आने वाले व्यक्तियों के लिए संपत्ति खरीदने के संबंध में अत्यंत कठोर प्रावधान तय किए गए हैं। इन नियमों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं
- कृषि भूमि क्रय पर पूर्ण प्रतिबंध: हरिद्वार तथा उधमसिंह नगर जिलों के मैदानी इलाकों को छोड़कर शेष 11 पर्वतीय जिलों में गैर-निवासियों द्वारा खेती, बागवानी या कृषि योग्य भूमि खरीदने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- आवासीय भूमि की अधिकतम सीमा: कोई भी बाहरी नागरिक अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार अधिकतम 250 वर्ग मीटर (लगभग 300 वर्ग गज) तक की ही आवासीय भूमि मकान बनाने के उद्देश्य से खरीद सकता है।
- अनिवार्य शपथ पत्र (एफिडेविट): भूमि क्रय करने की इच्छा रखने वाले बाहरी खरीदारों को संपत्ति के सटीक उपयोग और उद्देश्य का विवरण देते हुए एक आधिकारिक शपथ पत्र जमा करना अनिवार्य बनाया गया है।
- केंद्रीयकृत ऑनलाइन निगरानी: संपत्ति सौदों में पारदर्शिता लाने के लिए जिलाधिकारियों के व्यक्तिगत अधिकारों को सीमित कर सभी सौदों की निगरानी एक विशेष ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से अनिवार्य कर दी गई है।
- टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट 1973: यदि कोई गैर-निवासी अपनी खरीदी गई संपत्ति में किसी भी प्रकार का ढांचागत बदलाव, जीर्णोद्धार या विस्तार करना चाहता है, तो उसे संबंधित नगर नियोजन प्राधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।
- अवैध कब्जे एवं नियम उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति भ्रामक जानकारी देकर निर्धारित सीमा से अधिक या गैर-कानूनी ढंग से जमीन खरीदता है, तो राज्य सरकार के पास उस संपत्ति को जब्त करने का विधिक अधिकार है।
मूल निवासियों के अधिकार और ऋषभ पंत के समक्ष वास्तविक बाधा
विधिक दृष्टिकोण से यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि बाहरी लोगों पर लागू होने वाले नए भू-कानून 2025 के कड़े प्रतिबंध ऋषभ पंत पर लागू नहीं होते हैं। ऋषभ पंत का जन्म उत्तराखंड के रुड़की में हुआ है और वे राज्य के मूल निवासी श्रेणी में आते हैं। उत्तराखंड के स्थानीय नागरिकों पर 250 वर्ग मीटर की सीमित दायरा सीमा या कृषि भूमि खरीद की बंदिशें लागू नहीं होती हैं। वे राज्य में नियमानुसार आवश्यक विस्तार वाली भूमि खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके बावजूद ऋषभ पंत को आ रही मुख्य कठिनाई कानूनी प्रतिबंध नहीं, बल्कि उनकी प्राथमिकताओं के अनुरूप विशाल, सुरक्षित और सर्वसुविधायुक्त निजी भूखंड का न मिल पाना है।
राज्य के सर्वोच्च व्यक्तिगत आयकर दाता के रूप में आर्थिक योगदान
ऋषभ पंत न केवल खेल के मैदान पर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी उत्तराखंड राज्य के विकास में विशाल योगदान दे रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ऋषभ पंत उत्तराखंड राज्य में सबसे अधिक व्यक्तिगत आयकर (इन्कम टैक्स) चुकाने वाले नागरिक बने हैं। उन्होंने इस आकलन वर्ष में कुल 23.84 करोड़ रुपये का आयकर जमा किया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब पंत ने पूरे उत्तराखंड में सर्वोच्च आयकर दाता होने का कीर्तिमान स्थापित किया है। अपने गृह राज्य के प्रति इस वृहद वित्तीय प्रतिबद्धता के कारण ही वे उत्तराखंड में अपनी स्थायी संपत्ति बनाकर स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक प्रगति को गति देना चाहते हैं।



















