ग्रेटर नोएडा में दो गुप्त सिंथेटिक ड्रग लैब पकड़ी गईं, केंद्रीय गृह मंत्री ने अभियान को सराहात्योहारी सीजन और खेती की मांग से देश में डीजल की खपत में जबरदस्त तेजी, पखवाड़े में खपा 2.7 करोड़ बैरलईरान पर परमाणु विकल्प खारिज होने के बाद 96 डॉलर पर आया कच्चा तेल, खाड़ी संकट और भंडार में भारी गिरावट से बाजार गर्मछतरपुर में निजी डॉक्टर की दवा से 17 साल की छात्रा की मौत, परिजनों का हंगामा और सड़क जामएनवीआईडीआईए की पूर्व अधिकारी अमूल्य विश्वनाथ ने बताया, रोबोटिक्स अभी अपने 'लेगो युग' में हैमनी प्लांट की देखभाल: गमले में इस खास सफेद चीज के इस्तेमाल से दोगुनी तेजी से बढ़ेगा पौधा और छायेगी हरियालीपश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्ति पर सईद खतीबजादेह की दो टूक, हर मोर्चे पर जंग रुकना जरूरीपानी के संपर्क में आते ही खतरनाक हो जाते हैं माइक्रोप्लास्टिक्स, वैज्ञानिकों का नया खुलासानवरात्रि की महाष्टमी पर होगी माता महागौरी की विशेष पूजा, जानिए प्रिय पुष्प और शुभ रंगउत्तर प्रदेश के ललितपुर में एक ही घर के भीतर फंदे पर लटके मिले पति-पत्नी, जांच में जुटी पुलिस
दशहरे पर क्यों की जाती है शमी वृक्ष और शस्त्रों की पूजा, जानिए क्या है धार्मिक मान्यतात्योहार
18 अक्तू॰ 2026, 1:16 am (40 मिनट पहले)· 0

दशहरे पर क्यों की जाती है शमी वृक्ष और शस्त्रों की पूजा, जानिए क्या है धार्मिक मान्यता

विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन रावण दहन के साथ-साथ शस्त्र पूजा और शमी वृक्ष की पूजा का भी विशेष विधान है, जिसका संबंध महाभारत और पौराणिक कथाओं से जुड़ा है।

सनातन धर्म में विजयादशमी एक बेहद महत्वपूर्ण पर्व है। इस त्योहार को अधर्म पर धर्म की और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण का संहार करने की स्मृति में हर साल दशहरा मनाया जाता है। इस विशेष अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में रावण दहन की परंपरा तो निभाई ही जाती है, साथ ही शस्त्रों की पूजा का भी बड़ा विधान है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विजयादशमी के दिन हथियारों की पूजा क्यों की जाती है और इसके पीछे कौन-सी पौराणिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं?

दशहरा मनाने की तिथि और पंचांग

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के अनुष्ठान के बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर दशमी तिथि का आरंभ होगा और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर इसका समापन होगा। इसके चलते 20 अक्टूबर को ही दशहरा मनाया जाएगा और इस दिन देश के कई कोनों में रावण का पुतला दहन भी किया जाएगा।

ये भी पढ़ें

रावण दहन का शुभ मुहूर्त

विजयादशमी के पावन पर्व पर रावण दहन के लिए प्रदोष काल और सूर्यास्त के समय को सबसे उत्तम माना गया है। पंचांग की गणना के अनुसार, 20 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 5 बजकर 47 मिनट पर होगा। इस स्थिति में रावण दहन का शुभ समय शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।

शस्त्र पूजा का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में शस्त्रों को मात्र युद्ध का साधन नहीं समझा जाता है। इन्हें शक्ति, साहस, आत्मरक्षा और धर्म की संरक्षा का प्रतीक माना गया है। शस्त्र पूजन के पीछे मूल भावना यह होती है कि शक्ति का प्रयोग हमेशा अन्याय के विरोध में और धर्म की स्थापना के लिए होना चाहिए। यही वजह है कि विजयादशमी के दिन सैनिक, पुलिसकर्मी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग अपने हथियारों की पूजा करते हैं। इसके अलावा कारीगर, किसान और विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोग भी अपने कामकाज के औजारों का पूजन करते हैं।

महाभारत काल से जुड़ी परंपरा

शस्त्र पूजा की इस प्राचीन परंपरा का जुड़ाव महाभारत काल से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ के नीचे छिपाकर रखे थे। जब उनका अज्ञातवास पूरा हुआ, तब अर्जुन ने इसी वृक्ष से अपने हथियार वापस निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की विशाल सेना का मुकाबला किया था। यह पूरी घटना आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि से जुड़ी हुई मानी जाती है। इसी कारणवश कई क्षेत्रों में आज भी विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष और शस्त्रों की पूजा पूरी निष्ठा के साथ की जाती है।

भगवान राम और माता दुर्गा की विजय

विजयादशमी का सीधा संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर ऐतिहासिक विजय से भी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, श्रीराम ने रावण का वध करके अधर्म का पूरी तरह से नाश किया था। वहीं दूसरी ओर, देवी महात्म्य के प्रसंग में माता दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का विस्तृत वर्णन मिलता है। ये दोनों ही प्रसंग समाज को अन्याय और नकारात्मक ताकतों पर विजय हासिल करने का संदेश देते हैं। इसी सकारात्मक भावना के साथ शस्त्र पूजा को शक्ति के सही और धर्मसंगत उपयोग का संकल्प माना जाता है।

अपराजिता और शमी वृक्ष के दर्शन

विजयादशमी के पावन दिन पर ईशान कोण में जाकर अपराजिता पौधे की विधि-विधान से पूजा करने और शमी के पेड़ के दर्शन करने की भी विशेष परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस प्रक्रिया को विजय और सफलता प्राप्ति का प्रतीक माना गया है।

सवाल-जवाब

विजयादशमी का पर्व कब मनाया जाता है?
विजयादशमी शारदीय नवरात्रि के बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है।
इस वर्ष दशहरा किस तारीख को मनाया जाएगा?
पंचांग के अनुसार इस वर्ष 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा।
रावण दहन का शुभ समय क्या है?
20 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 5:47 बजे से रात 8:23 बजे तक रावण दहन का शुभ समय माना गया है।
शस्त्र पूजा के पीछे क्या धार्मिक भावना है?
शस्त्र पूजा के पीछे यह भाव होता है कि शक्ति का उपयोग अन्याय के खिलाफ और धर्म की रक्षा के लिए किया जाए।
शस्त्र पूजा का संबंध महाभारत के किस प्रसंग से है?
महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे, जिसे शस्त्र पूजा से जोड़ा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp