तिरुवनंतपुरम में क्रिकेट के खेल से जुड़ा इंतजार हमेशा से ही सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार रहा है। कभी किसी खिलाड़ी को मुख्य टीम में अपने चयन की खबर का इंतजार होता है, तो कभी कोई खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में शामिल होने के लिए तरसता है। लेकिन सबसे ज्यादा पीड़ादायक वह स्थिति होती है जब कोई शानदार खिलाड़ी सिर्फ डगआउट में बैठकर बेंच गर्म करने को मजबूर हो जाता है। इस वक्त भारतीय क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल बिल्कुल इसी दौर से गुजर रहे हैं। वनडे प्रारूप में उनका हाल कुछ-कुछ वैभव सूर्यवंशी जैसा हो चुका है, जो टी-20 सेटअप में ठीक इसी प्रकार की मानसिक उलझन का सामना कर रहे हैं। यहां तक कि दोनों खिलाड़ियों की इस परेशानी और दर्द की दास्तान बिल्कुल एक जैसी है, बस अंतर इतना है कि फॉर्मेट बदल गया है।
एक जैसी फ्रेंचाइजी और एक जैसी सांत्वना
महज चौबीस साल के यशस्वी जायसवाल और पंद्रह साल के युवा वैभव सूर्यवंशी दोनों ही इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से पारी की शुरुआत करते हैं। यशस्वी को भी ठीक वही दिलासा और सांत्वना दी जा रही है जो वैभव सूर्यवंशी को अक्सर सुनने को मिलती है। उन्हें यह कहकर शांत कराया जा रहा है कि अभी उनकी उम्र बहुत कम है और भविष्य में उनके लिए सुनहरे मौके आएंगे, इसलिए उन्हें बस धैर्य के साथ सही वक्त का इंतजार करना चाहिए। वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी सत्ताइस सितंबर से शुरू होने जा रही वनडे सीरीज से ठीक एक शाम पहले भारतीय क्रिकेट टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक मीडिया से रूबरू हुए थे। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यशस्वी जायसवाल को टीम से बाहर रखने और उनके चयन को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो सितांशु कोटक ने खुलकर जवाब दिया।
कोच सितांशु कोटक का बयान और चयन की पेचीदगियां
मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सितांशु कोटक ने साफ किया कि इस समय भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों के बीच बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। उन्होंने माना कि हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि जायसवाल दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली और बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार हैं। जब भी उन्हें मैदान पर उतरने का मौका मिला है, उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर शानदार प्रदर्शन करके दिखाया है, और यही वजह है कि वह स्क्वाड का हिस्सा बने हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि इस युवा खिलाड़ी के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने सलाह दी कि यशस्वी को अपनी कड़ी मेहनत जारी रखनी चाहिए और अपने मौके का इंतजार करना चाहिए क्योंकि अतीत में जब भी उन्हें चांस मिला, उन्होंने खुद को साबित किया है।
वनडे विश्व कप तक की राह और मुंबई के ओपनर का भविष्य
अगर यशस्वी जायसवाल के हालिया अंतरराष्ट्रीय सफर पर नजर डाली जाए तो उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी घरेलू धरती पर तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली थी। हालांकि इसके तुरंत बाद जब टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई, तो वहां उन्हें स्क्वाड में जगह नहीं दी गई थी। अब इस प्रतिभाशाली बाएं हाथ के ओपनर को वेस्टइंडीज के खिलाफ चुनी गई पंद्रह सदस्यीय वनडे टीम में दोबारा शामिल तो कर लिया गया है। टेस्ट क्रिकेट फॉर्मेट में अपनी जड़ें मजबूत कर चुके मुंबई के इस सलामी बल्लेबाज के लिए आगामी दो हजार सत्ताइस का वनडे विश्व कप खेलना भी अब काफी मुश्किल नजर आ रहा है, क्योंकि टीम संयोजन कुछ ऐसा बन चुका है कि अनुभवी और अन्य खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिल रही है।
वैभव सूर्यवंशी और गौतम गंभीर का रुख
दूसरी तरफ पंद्रह साल के वैभव सूर्यवंशी के साथ भी कुछ ऐसा ही वाकया पेश आया था, जब उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज के दौरान टीम में चुने जाने के बावजूद अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में शामिल नहीं किया गया था। उस वक्त भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी मीडिया के सामने बयान दिया था कि सूर्यवंशी अभी बहुत युवा हैं और उनके सामने लंबा क्रिकेट करियर पड़ा है। गंभीर ने स्पष्ट किया था कि वैभव को जब भी खेलने का मौका मिलेगा, वह एक लंबा और निरंतर मौका होगा। फिलहाल संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की आक्रामक जोड़ी ही टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद बनी हुई है। महज पंद्रह साल की कम उम्र में टी-20 क्रिकेट की दुनिया में अपने खेल से तहलका मचाने वाले वैभव आज भारतीय क्रिकेट के नए पोस्टर बॉय बन चुके हैं और उनके खेल को देखने के लिए स्टेडियम दर्शकों से भर जाते हैं।




















