बेंगलुरु में एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या के इस सनसनीखेज मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले के मुख्य आरोपी कैब ड्राइवर इंदुशेखर को लेकर अब यह बात सामने आई है कि उसकी साजिश सिर्फ सात लोगों की जान लेने तक सीमित नहीं थी। पुलिस जांच में यह जानकारी मिली है कि आरोपी के निशाने पर दो और लोग थे, जिन्हें वह मौत के घाट उतारने की योजना बना रहा था। इस तरह उसकी पूरी सूची में कुल नौ लोगों के नाम शामिल थे, लेकिन गनीमत रही कि किन्हीं कारणों से उन दो लोगों की जान बच गई।
इस दर्दनाक और खौफनाक हत्याकांड में एक और हैरान करने वाला पहलू आरोपी की नाबालिग बेटी की संलिप्तता का है। पुलिस के सामने आए बयानों के अनुसार, इंदुशेखर की बेटी पर भी इस जुर्म में अपने पिता का साथ देने का गंभीर आरोप है। ऐसा बताया जा रहा है कि बेटी ने हत्या के बाद शवों को प्लास्टिक के थैलों में भरने, उन्हें इधर-उधर ले जाने और घटनास्थल से खून के निशान साफ करने में अपने पिता की पूरी मदद की थी। शुरुआती जानकारियों से संकेत मिलता है कि आरोपी ने अपनी बेटी का मानसिक ब्रेनवॉश इस तरह किया था कि वह अपनी मां के परिवार के सदस्यों को ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानने लगी थी।
सात हत्याओं के बाद भी नहीं रुका आरोपी का खूनी सिलसिला
जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, इंदुशेखर ने अपने ही परिवार के सात सदस्यों को मौत के घाट उतारने के बाद भी अपनी इस खूनी योजना को बंद नहीं किया था। उसका नापाक इरादा दो और व्यक्तियों को अपना निशाना बनाने का था। इस प्रकार कुल नौ लोगों को खत्म करने का उसका प्लान था। वारदातों को अंजाम देने के बाद आरोपी ने कुछ दिनों तक अपनी आगे की रणनीति पर काम करने और छिपने की कोशिश की, इसी दौरान वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। हालांकि, जिन दो अन्य लोगों को वह मारना चाहता था, उनकी पहचान और इस कथित साजिश के पीछे की असली वजह को लेकर पुलिस के पास अभी कोई स्पष्ट और विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इस पूरे मामले का सबसे ज्यादा झकझोर देने वाला हिस्सा नाबालिग बेटी की कथित भूमिका है। पुलिस के समक्ष आए बयानों में यह बात सामने आई है कि बेटी ने अपनी मां के मायके वालों के खिलाफ मन में गहरी दुश्मनी पाल ली थी। आरोप है कि इंदुशेखर ने उसे इस तरह से अपनी बातों में उलझा लिया था कि वह जुर्म के रास्ते पर उसके साथ खड़ी हो गई। हालांकि, नाबालिग बेटी की संलिप्तता को लेकर सामने आए इन तमाम बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना और पुलिस की विस्तृत जांच के निष्कर्ष आना अभी बेहद महत्वपूर्ण है। कानून के मुताबिक किसी भी नाबालिग की भूमिका को अदालत में दोष सिद्ध होने से पहले सीधे तौर पर अपराधी के रूप में नहीं पेश किया जा सकता है।
थैलों में भरकर शवों को ठिकाने लगाने की थी खौफनाक तैयारी
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी ने सभी शवों को एक ही बार में ठिकाने लगाने के बजाय उन्हें अलग-अलग जगहों पर ले जाकर फेंकने की सोची समझी योजना बनाई थी। इस नापाक काम के लिए उसने पहले से ही बड़े थैलों का इंतजाम कर रखा था। आरोप है कि हत्या करने के बाद शवों के हाथ-पैर मोड़े गए और उन्हें बोरियों या थैलों में भरकर उसकी अपनी इटियोस कार से अलग-अलग स्थानों की ओर ले जाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में उसकी बेटी के भी हाथ बंटाने की बात उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ थैले पहले से ही घर के भीतर रखे हुए थे। अब पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इन शवों को किन-किन इलाकों में ले जाया गया और इस पूरी घिनौनी प्रक्रिया में किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही थी।
पुलिस के सामने आए कथित बयानों के अनुसार, आरोपी इंदुशेखर ने यह भी स्वीकार किया कि वह इन सभी लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद खुद भी अपनी जान देना चाहता था। यानी उसकी मूल योजना में हत्याओं के बाद आत्महत्या करना भी शामिल था। हालांकि, सात लोगों की बेरहमी से हत्या करने के बाद भी वह तुरंत पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया और पकड़े जाने से पहले कुछ दिनों तक बाहर खुले में घूमता रहा। इसी दौरान उसने अपने बाकी बचे दो लक्ष्यों को भी ठिकाने लगाने की योजना पर विचार किया था।
पारिवारिक कलह से शुरू हुई खूनी रंजिश
इस हत्याकांड की जड़ें पति-पत्नी और उनके बीच के घरेलू विवादों में जुड़ी हुई बताई जा रही हैं। आरोपी इंदुशेखर और उसकी पत्नी सुनीता के बीच लंबे समय से तनाव और मनमुटाव की खबरें पहले भी आ चुकी हैं। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर यह पारिवारिक कलह किस तरह से इतनी भयानक खूनी वारदात में तब्दील हो गई। फिलहाल पुलिस आरोपी की ओर से दिए गए बयानों, शवों को ठिकाने लगाने के तौर-तरीकों और इस साजिश में शामिल हो सकने वाले अन्य संदिग्धों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इस क्रूर कांड से जुड़े हर राज से पर्दा उठाया जा सके।


















