उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के हल्दी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां दस्तावेजों में एक जीवित बुजुर्ग को मृत दिखाकर उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद करा दी गई। इस गंभीर मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन बीडीओ, तत्कालीन सचिव और तत्कालीन ग्राम प्रधान समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान उसने एक अन्य उम्मीदवार का समर्थन किया था, जिसके कारण तत्कालीन प्रधान उससे रंजिश रखने लगी थीं और इसी राजनीतिक द्वेष के चलते उनके साथ यह साजिश रची गई।
बीडीओ और प्रधान समेत तीन पर दर्ज हुआ मुकदमा
स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, हल्दी थाना क्षेत्र के दोपही गांव के रहने वाले 80 वर्षीय विष्णु दयाल दूबे ने इस संबंध में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी तहरीर के आधार पर दुबहर क्षेत्र पंचायत के तत्कालीन बीडीओ, तत्कालीन सेक्रेटरी प्रमोद कुमार और तत्कालीन ग्राम प्रधान मारिया गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 261 और 120बी के तहत बीते शुक्रवार को मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस अब इस पूरे मामले की कानूनी बारीकियों से जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी और साजिश में शामिल अन्य पहलुओं का भी खुलासा किया जा सके।
कागजों में मृत दिखाकर बंद की गई पेंशन
बलिया पुलिस ने दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए बताया कि बुजुर्ग विष्णु दयाल दूबे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। यही वजह थी कि उन्हें साल 2023 तक सरकार की ओर से वृद्धावस्था पेंशन का नियमित लाभ मिल रहा था। हालांकि, कुछ समय पहले उन्हें इस बात की जानकारी मिली कि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है, जिसके आधार पर उनकी पेंशन का भुगतान पूरी तरह से रोक दिया गया है। अपनी आजीविका के लिए इस पेंशन पर निर्भर रहने वाले बुजुर्ग ने जब इसकी गहराई से पड़ताल की, तो उन्हें इस पूरी जालसाजी के बारे में पता चला।
चुनावी रंजिश और अन्य लोगों को भी शिकार बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता बुजुर्ग के गंभीर आरोपों के मुताबिक, ग्राम प्रधान चुनाव के दौरान दूसरे उम्मीदवारों का साथ देने की सजा उन्हें इस रूप में दी गई है। उनका यह भी आरोप है कि केवल वही नहीं, बल्कि उनके ही गांव के रहने वाले भृगुनाथ चौबे और कविलाश यादव को भी इसी पुरानी रंजिश की वजह से आधिकारिक दस्तावेजों में मृत दिखा दिया गया है, ताकि उन्हें भी सरकारी योजनाओं और पेंशन के लाभ से वंचित किया जा सके। चुनावी प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते सरकारी दस्तावेजों में इस तरह की हेराफेरी करना एक बड़ा अपराध माना जा रहा है।
पुलिस की छानबीन और शासन स्तर की सख्ती
बैरिया इलाके के पुलिस क्षेत्राधिकारी यानी सीओ आलोक गुप्ता ने शनिवार को मीडिया को जानकारी दी कि पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की गहराई से छानबीन की जा रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वोदय विद्यालय और समाज कल्याण विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी। उस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों की छात्रवृत्ति और वृद्धजनों की पेंशन के मामलों को लेकर बेहद सख्त और अहम निर्देश जारी किए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए जो पात्र लोग अब तक किसी कारण से वंचित रह गए हैं, उनके आवेदनों का तत्काल सत्यापन कराया जाए और जल्द से जल्द उन्हें पेंशन का लाभ पहुंचाया जाए।



















