हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक विभीषिका से उबर रहे नेपाल के सामने अब एक और गंभीर जल प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में भोटेकोशी नदी की सहायक ल्हेंदे नदी का प्रवाह रुकने से एक विशाल अस्थाई झील निर्मित हो गई है। सैटेलाइट से प्राप्त हालिया तस्वीरों से यह पुष्टि हुई है कि इस झील में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। यदि यह कृत्रिम झील का बांध अचानक टूटता है तो नेपाल के निचले इलाकों में एक बार फिर भयंकर सैलाब आ सकता है। इसे देखते हुए नदी तट के पास रहने वाली आबादी को तुरंत सतर्क होने और सुरक्षित स्थलों पर जाने की सख्त चेतावनी जारी की गई है।
इस संभावित आपदा के विषय में चीन द्वारा नेपाल के विदेश मंत्रालय को आधिकारिक तौर पर सूचित किया गया है। चीनी प्राधिकारियों ने उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीरों का विश्लेषण कर बताया कि सीमापार जलमार्ग में जलभराव की गंभीर स्थिति बन चुकी है। तस्वीरों के अनुसार, नेपाल की रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर तिब्बती क्षेत्र में ल्हेंदे नदी के तटीय हिस्से में पानी की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। इस रुकावट के कारण लगभग 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जल निकाय का निर्माण हुआ है, जिसका दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
आपदा प्रबंधन एजेंसी की सख्त चेतावनी और निगरानी
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने इस संकट की गंभीरता को देखते हुए सैटेलाइट छवियों के आधार पर स्थिति की समीक्षा की है। प्राधिकरण ने X पर लिखा है कि ल्हेंदे नदी के तटीय क्षेत्र में जलमार्ग अवरुद्ध होने से एक बड़ी झील का आकार बन चुका है। इसके परिणामस्वरूप द्वितीयक बाढ़ का भारी खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने रसुवा जिले के साथ-साथ भोटेकोशी नदी के किनारे बसे सभी गांवों, बाजारों और बस्तियों में रहने वाले निवासियों से अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की है।
पहले आए जल प्रलय का कारण और उसका भयानक इतिहास
नेपाल में हाल ही में आई तबाही ने पहले ही 350 से अधिक निर्दोष लोगों की जान ले ली है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं। उस भयंकर आपदा की शुरुआत तिब्बत के पहाड़ों में 17,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित एक विशाल ग्लेशियर के फटने से हुई थी। उस स्थान पर बर्फ की ऊपरी परत के नीचे करोड़ों लीटर पानी का भंडारण बना हुआ था। लगभग 2,000 फीट चौड़ा बर्फ का एक विशाल टुकड़ा ग्लेशियर से अचानक अलग हो गया।
यह बर्फ खंड 17,000 फीट की ऊंचाई से टूटकर करीब 4,000 फीट नीचे आ गिरा। इस भयावह गिरावट का दबाव इतना तीव्र था कि ग्लेशियर फटने के साथ ही पहाड़ों की चट्टानें टूट गईं और विशालकाय बोल्डर बह निकले। इसके साथ ही करीब 2 करोड़ घनमीटर, यानी लगभग 2,000 करोड़ लीटर पानी अचानक नीचे की ओर बह निकला। पानी का यह प्रचंड वेग सीधे भोटेकोशी नदी में प्रविष्ट हुआ, जिसने रास्ते में आने वाली हर संरचना को ध्वस्त कर दिया।
संकरी नदी और प्रचंड जलप्रवाह का प्रभाव
इस जल राशि के परिमाण का आकलन इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2,000 करोड़ लीटर पानी नेपाल के रसुवा इलाके में लगातार 30 दिनों तक होने वाली भारी बारिश के बराबर है। जो पानी पूरे एक महीने में गिरना चाहिए था, वह चंद मिनटों में भोटेकोशी नदी के संकरे पाट में आ समाया। नदी का संकरा स्वरूप इतने विशाल और तीव्र जलप्रवाह को समाहित करने में असमर्थ साबित हुआ।
पानी की अत्यधिक रफ्तार और बोल्डरों के घर्षण से नदी के मार्ग में आने वाले पक्के पुल, रिहायशी मकान, व्यावसायिक दुकानें, स्थानीय बाजार, पनबिजली प्लांट और बांध पूरी तरह जलमग्न होकर बह गए। तबाही का मुख्य कारण केवल पानी की मात्रा ही नहीं, बल्कि ढलान से उतरते समय उसकी अत्यधिक गति भी थी। अब उसी नदी घाटी के ऊपरी हिस्से में फिर से झील बनने से नेपाल की चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं।



















