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सैनिकों और अग्निवीरों के लिए उत्तराखंड सरकार का बड़ा निर्णय, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अनुग्रह राशि बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कीउत्तराखंड
27 अग॰ 2026, 9:49 pm (1 घंटे पहले)· 2

सैनिकों और अग्निवीरों के लिए उत्तराखंड सरकार का बड़ा निर्णय, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अनुग्रह राशि बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की

उत्तराखंड सरकार ने 4 साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए देश का पहला रोजगार सेल गठित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परमवीर चक्र विजेताओं और शहीदों के परिवारों की अनुग्रह राशि में भारी बढ़ोतरी सहित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

उत्तराखंड देश में सैन्य कल्याण के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। भारतीय सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद घर लौटने वाले अग्निवीरों की सहायता के लिए एक समर्पित रोजगार सेल स्थापित करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण भी पूरा कर लिया है, जो जल्द ही राज्य की जनता को समर्पित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि यह सैन्य धाम राज्य की समृद्ध सैन्य विरासत और अमर बलिदानियों के सम्मान का प्रतीक बनेगा।

अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए समर्पित रोजगार सेल और 10 प्रतिशत आरक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है। हाल ही में धामी कैबिनेट ने अग्निवीरों के लिए विशेष रोजगार सेल के गठन के प्रस्ताव को अपनी औपचारिक मंजूरी दी है। यह सेल सैन्य सेवा से लौटने वाले युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सरकारी व गैर-सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान कराने में मदद करेगा। इससे पूर्व उत्तराखंड सरकार ने अग्निवीरों को राज्य की सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत का आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया था, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है।

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बलिदानियों के सम्मान में बढ़ा अनुदान और पैतृक गांवों में लगेंगी प्रतिमाएं

सैनिक कल्याण की दिशा में हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों की स्मृतियों को संजोने के लिए उनके पैतृक गांवों में उनकी भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को शहीदों की शौर्य गाथाओं से परिचित कराना और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।

इसके अतिरिक्त सरकार ने शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली आर्थिक मदद में उल्लेखनीय वृद्धि की है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 1.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं अन्य सभी श्रेणी के बलिदानियों के परिवारों के लिए यह सहायता राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है।

देहरादून में बनकर तैयार हुआ सैन्य धाम, संजोया गया शहीदों के आंगन का सम्मान

राजधानी देहरादून में महत्वाकांक्षी सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है और अब इसके भव्य लोकार्पण की तैयारियां चल रही हैं। इस पावन धाम में उत्तराखंड के हर बलिदानी सैनिक के घर और आंगन की पवित्र मिट्टी को पूरे सम्मान के साथ लाकर स्थापित किया गया है। इसके अलावा परिसर में राज्य के सभी अमर शहीदों की वीरता की कहानियां भी दर्ज की गई हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "हमारी सरकार वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।"

शहीद परिवारों को सरकारी नौकरी: आवेदन की मियाद बढ़ाकर हुई 5 साल

राज्य सरकार की नीति के अनुसार हर बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा रहा है। इस योजना के तहत अब तक 28 पात्र आश्रितों को राज्य सरकार की विभिन्न सेवाओं में नियुक्त किया जा चुका है। शहीद के परिजनों को आवेदन प्रक्रिया में सहूलियत देने के उद्देश्य से सरकार ने आवेदन जमा करने की समय सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया है।

स्टाम्प शुल्क में रियायत, भूमि विवादों से राहत और 15 हजार परिवारों को पक्का मकान

सेवारत और पूर्व सैनिकों को आर्थिक राहत प्रदान करने के लिए सरकार 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की सीधी छूट दे रही है। इसके साथ ही जिला अदालतों में सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों से जुड़े लंबित भूमि धोखाधड़ी और संपत्ति विवाद के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराया जा रहा है।

सामाजिक विकास की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा लक्ष्य रखा है। पूर्व में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने घोषणा की थी कि इस वर्ष दिसंबर तक राज्य में 15,000 से अधिक पात्र परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि हर जरूरतमंद परिवार के पास अपनी पक्की छत हो।

सवाल-जवाब

उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाए गए अग्निवीर रोजगार सेल का क्या उद्देश्य है?
यह सेल सशस्त्र बलों में 4 साल की सेवा पूरी करके लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार और पुनर्वास के अवसर प्रदान करने में मदद करेगा।
उत्तराखंड की सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को कितना आरक्षण दिया गया है?
धामी कैबिनेट के फैसले के अनुसार अग्निवीरों को उत्तराखंड की सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है।
परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को अब कितनी अनुग्रह राशि मिलेगी?
परमवीर चक्र से सम्मानित बलिदानी सैनिकों के परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 1.5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
अन्य शहीद सैनिकों के आश्रितों की सहायता राशि में कितनी बढ़ोतरी की गई है?
अन्य सभी बलिदानियों के परिवारों के लिए अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
सैनिकों और पूर्व सैनिकों को संपत्ति की खरीद पर क्या छूट मिलेगी?
सेवारत और पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है।
देहरादून में बने सैन्य धाम की क्या खासियत है?
सैन्य धाम का निर्माण उत्तराखंड के शहीद सैनिकों की स्मृति में कराया गया है, जहाँ प्रदेश के सभी बलिदानियों के घर के आंगन की मिट्टी लाई गई है और उनकी शौर्य गाथाएं उकेरी गई हैं।
शहीद परिवार के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने के नियम में क्या बदलाव हुआ है?
धामी सरकार अब तक 28 पात्र आश्रितों को सरकारी नौकरी दे चुकी है और आवेदन की समय सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 मिनट पहले

उत्तराखंड सरकार द्वारा अग्निवीरों के लिए रोजगार सेल का गठन और अनुग्रह राशि को बढ़ाकर 50 लाख तथा 2 करोड़ रुपये करना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सुरक्षात्मक कदम है। यद्यपि यह निर्णय सैनिकों और उनके परिवारों के मनोबल को ऊँचा रखने में सहायक होगा, किंतु यह देखना भी अत्यंत आवश्यक होगा कि रोजगार सेल के माध्यम से इन युवाओं का पुनर्वास कितनी पारदर्शिता और गति से धरातल पर उतरता है, ताकि कानून-व्यवस्था और रोजगार सुरक्षा का संतुलन बना रहे।

Rohan Verma@rohan-verma·18 मिनट पहले

सैन्य बहुल राज्य उत्तराखंड में यह नीतिगत बदलाव चुनावी राजनीति और क्षेत्रीय लोक नीति के दृष्टिकोण से बेहद अहम है। चार साल की सेवा के बाद लौटने वाले युवाओं के लिए रोजगार सेल और 10 प्रतिशत आरक्षण का क्रियान्वयन यह तय करेगा कि राज्य में बेरोजगारी और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा।

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