राजस्थान के अजमेर स्थित रेलवे भर्ती बोर्ड में मुख्य कार्यालय अधीक्षक के पद पर तैनात रवि मीणा के सनसनीखेज अपहरण मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। 21 अगस्त से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुए अधिकारी को पुलिस ने बांदीकुई से सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश के पीछे रवि के अपने साले महेंद्र का हाथ है। पीड़ित अधिकारी का अपनी पत्नी के साथ लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है, जिसकी वजह से अदालत में तलाक की कानूनी प्रक्रिया भी विचाराधीन है। इसी रंजिश के तहत साजिशकर्ताओं ने रवि का अपहरण किया और उनसे 51 लाख रुपये की मोटी फिरौती की मांग की। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और जमीनी दबिश के दम पर आरोपियों के मंसूबों को नाकाम करते हुए अधिकारी को सुरक्षित छुड़ा लिया है।
21 अगस्त को कार्यालय के बाहर से हुआ था अपहरण
पुलिस जांच में वारदात के दिन का पूरा घटनाक्रम सामने आया है। रवि मीणा 21 अगस्त को अजमेर स्थित अपने दफ्तर से बांदीकुई जाने के लिए निकले थे, लेकिन वे अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सके। पीड़ित अधिकारी ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि 21 अगस्त को जब वे कार्यालय से बाहर निकले, तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मारने की कोशिश की। इससे पहले कि वे संभल पाते, कार में से दो अज्ञात व्यक्ति बाहर निकले और उन्हें जबरन खींचकर वाहन के भीतर बिठा लिया। रवि के अनुसार, कार सवार इन दोनों व्यक्तियों ने अपने नाम देव और अनुज बताए।
गाड़ी में बिठाकर ले जाने के दौरान अपहरणकर्ताओं ने रवि को साफ शब्दों में बताया कि इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए उनके साले महेंद्र ने ही उन्हें सुपारी दी है। इसके बाद आरोपी पीड़ित को बांदीकुई, दौसा सदर और आसपास के विभिन्न गुप्त ठिकानों पर घुमाते रहे। इस दौरान आरोपियों ने पीड़ित पर लगातार दबाव बनाया और रिहाई के बदले 51 लाख रुपये की फिरौती की मांग रखी। पीड़ित अधिकारी को कई घंटों तक बंधक बनाकर अलग-अलग स्थानों पर रखा गया, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया था।
मां की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
रवि मीणा के अचानक लापता होने और बांदीकुई न पहुंचने पर उनके परिजन बेहद चिंतित हो गए। पीड़ित की मां सामंती देवी ने तुरंत अजमेर के सिविल लाइन थाने पहुंचकर पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। सामंती देवी ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर रवि के ससुराल पक्ष पर गंभीर आशंका जताई थी। उन्होंने पुलिस को दी अपनी तहरीर में रवि के साले महेंद्र, पलाराम और इंद्राज समेत ससुराल परिवार के अन्य सदस्यों के नाम नामजद करते हुए अपहरण का संदेह व्यक्त किया था।
मां सामंती देवी की शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस ने तत्काल गुमशुदगी और अपहरण की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पीड़ित की तलाश के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया और अजमेर से लेकर दौसा तक नाकाबंदी और तलाश अभियान शुरू किया गया।
सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन से मिला सुराग
जांच अधिकारी की अगुवाई में गठित पुलिस टीम ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस ने सबसे पहले रवि मीणा के दफ्तर और आसपास के इलाकों में लगे विभिन्न सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। सीसीटीवी फुटेज से संदेहास्पद वाहन और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही के अहम सुराग हाथ लगे। इसके साथ ही पुलिस की साइबर सेल ने पीड़ित अधिकारी के मोबाइल नंबर और संदिग्धों के फोन नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स तथा टावर लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया।
तकनीकी विश्लेषण के दौरान पुलिस को रवि मीणा के मोबाइल की अंतिम लोकेशन बांदीकुई, दौसा सदर और पास के ग्रामीण इलाकों में मिली। लोकेशन मिलते ही अजमेर पुलिस की टीम ने दौसा और बांदीकुई की स्थानीय पुलिस से संपर्क साधा और संयुक्त अभियान चलाया। पुलिस टीमों ने संदिग्ध ठिकानों, संभावित शरणस्थलों और आरोपियों के रिश्तेदारों के घरों पर ताबड़तोड़ दबिश देना शुरू कर दिया।
पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद बांदीकुई में छोड़कर भागे आरोपी
पुलिस की सख्त कार्रवाई और रिश्तेदारों से लगातार जारी पूछताछ के कारण अपहरणकर्ताओं पर चौतरफा मानसिक दबाव बन गया। आरोपियों को यह अहसास हो गया कि पुलिस की कई टीमें उनके बिल्कुल करीब पहुंच चुकी हैं और उनका बचना नामुमकिन है। पुलिस की लगातार जारी घेराबंदी और दबिश के कारण घबराकर अपहरणकर्ताओं ने रवि मीणा को बांदीकुई के सुनसान इलाके में छोड़ दिया और स्वयं मौके से फरार हो गए।
रवि के बांदीकुई में मिलने की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाने की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और अधिकारी को अपनी सुरक्षा में ले लिया। इसके बाद पुलिस टीम रवि को सकुशल अजमेर लेकर आई, जहां उनका प्राथमिक परीक्षण कराया गया। इस पूरे राहत और बचाव अभियान में सिविल लाइन थाने के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) मनीराम और कांस्टेबल सुमित ने अत्यंत सराहनीय एवं विशेष भूमिका निभाई। दोनों पुलिसकर्मियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई की बदौलत ही अधिकारी को सुरक्षित वापस लाया जा सका।
वैवाहिक रंजिश बनी जांच का मुख्य केंद्र
अजमेर पुलिस अब इस पूरे मामले के हर एक पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि रवि मीणा और उनकी पत्नी के बीच चल रहा गंभीर पारिवारिक विवाद ही इस वारदात की मुख्य जड़ है। दोनों पक्षों के बीच मतभेद इतने बढ़ चुके हैं कि तलाक की याचिका न्यायालय में लंबे समय से लंबित है। पीड़ित रवि मीणा ने भी पुलिस को दिए अपने आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया है कि इसी पारिवारिक रंजिश का बदला लेने और अनुचित आर्थिक लाभ कमाने के लिए उनके साले ने 51 लाख रुपये की फिरौती मांगने की यह साजिश रची।
फिलहाल रवि मीणा सकुशल अपने परिवार के पास पहुंच चुके हैं, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली है। पुलिस की जांच टीम अब मामले की तमाम कड़ियों को आपस में जोड़ रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साजिश की रूपरेखा कब और कहां तैयार की गई, इसमें साले महेंद्र के अलावा पलाराम, इंद्राज, देव और अनुज की क्या-क्या व्यक्तिगत भूमिकाएं थीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है और जल्द ही इस पूरी साजिश में शामिल सभी अभियुक्तों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।



















