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फर्जी बिलों का खेल और करोड़ों का घोटाला, ईडी ने मुजफ्फरनगर और फरीदाबाद समेत नौ ठिकानों पर की छापेमारीअपराध
24 अग॰ 2026, 11:45 am (75 दिन पहले)· 3

फर्जी बिलों का खेल और करोड़ों का घोटाला, ईडी ने मुजफ्फरनगर और फरीदाबाद समेत नौ ठिकानों पर की छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई ठिकानों पर छापेमारी कर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल ऑफिस ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के साथ-साथ हरियाणा के फरीदाबाद में भी ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय एजेंसी की टीमों ने कुल नौ अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर अहम दस्तावेजों की तलाश की है। यह पूरी कार्रवाई फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने और उसे आगे पास करने के बेहद जटिल और बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी हुई है, जिसके तार कई शहरों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

पीएमएलए के तहत शुरू हुई गहन छानबीन

जांच एजेंसी द्वारा यह पूरी तलाशी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत की जा रही है। इस जांच का मुख्य केंद्र एक ऐसा सुनियोजित नेटवर्क है जो बिना किसी वास्तविक सामान की आवाजाही के केवल कागजों पर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करता था। इसके जरिए धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का सृजन किया जाता था और फिर उसे आगे अन्य संस्थाओं को ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि सरकारी तंत्र को भारी चपत लगाई जा सके।

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जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड की भूमिका

अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे प्रकरण के केंद्र में मेसर्स जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड नामक कंपनी का नाम सामने आ रहा है। यह कंपनी कथित तौर पर कागजी दस्तावेजों की हेराफेरी करके बोगस आईटीसी बनाने और उसे बड़े पैमाने पर फैलाने के काले कारोबार में संलिप्त थी। जांचकर्ताओं को इस बात का पुख्ता शक है कि इस मुख्य कंपनी और इससे जुड़ी अन्य सहयोगी इकाइयों ने मिलकर भारी-भरकम धोखाधड़ी वाला टैक्स क्रेडिट तैयार किया, जबकि धरातल पर इनवॉइस और ई-वे बिल के मुकाबलों किसी भी तरह के सामान का भौतिक परिवहन या व्यापार हुआ ही नहीं था।

सर्कुलर ट्रांजेक्शन और लेयरिंग का पर्दाफाश

अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती और मौजूदा जांच के दौरान यह बात खुलकर सामने आई है कि इस पूरे खेल में बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा फंड्स की तेजी से लेयरिंग करने यानी पैसे को एक के बाद कई खातों में घुमाने और कई फर्जी व अस्तित्वहीन कंपनियों के माध्यम से भारी मात्रा में कैश निकालने की बात भी उजागर हुई है। इन तमाम तौर-तरीकों से यह साफ संकेत मिलता है कि आईटीसी धोखाधड़ी से हासिल की गई अवैध रकम को ठिकाने लगाने के लिए सिर्फ कागजों पर चलने वाली शेल कंपनियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।

सरकारी खजाने को करोड़ों का भारी नुकसान

माल एवं सेवा कर विभाग के अधिकारियों ने अपनी शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य ढूंढा है कि करीब 9.63 करोड़ रुपये का आईटीसी पूरी तरह से गलत और अवैध तरीके से क्लेम किया गया था। इसके साथ ही लगभग 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे अन्य खातों में सफलतापूर्वक ट्रांसफर भी किया जा चुका है, जिसके कारण सरकारी राजकोष को सीधे तौर पर भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के दायरे में इस तरह की वित्तीय हेराफेरी से जुटाई गई संपत्ति या धन को सीधे तौर पर अपराध से हुई कमाई की श्रेणी में रखा जाता है।

अवैध कमाई और नेटवर्क के चेहरों की तलाश

प्रवर्तन निदेशालय की इस व्यापक छापेमारी का मुख्य मकसद इन संदिग्ध और धोखाधड़ी वाले आईटीसी लेनदेन के जरिए बनाई गई अवैध कमाई का पूरा कच्चा-चिट्ठा खंगालना है। साथ ही एजेंसी उन तमाम व्यक्तियों और व्यावसायिक संस्थाओं की पहचान करने में जुटी है जिन्हें इस अवैध नेटवर्क से किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ पहुंचा है। इस दौरान तलाशी अभियान में ऐसे तमाम कागजी और डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं, जो जांचकर्ताओं को इस कथित फर्जी नेटवर्क के पूरे ढांचे को समझने में मदद करेंगे। इन सबूतों के आधार पर ही इस पूरे वित्तीय घोटाले में शामिल विभिन्न इकाइयों और इसके असली लाभार्थियों की व्यक्तिगत भूमिका तय की जाएगी।

सवाल-जवाब

प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में किन जगहों पर छापेमारी की है?
ईडी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद तथा हरियाणा के फरीदाबाद सहित कुल नौ जगहों पर छापेमारी की है।
यह पूरी कार्रवाई किस मामले से जुड़ी हुई है?
यह कार्रवाई फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने और उसे आगे पास करने से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में की गई है।
इस जांच के दायरे में मुख्य रूप से कौन सी कंपनी शामिल है?
जांच में मेसर्स जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड कंपनी का नाम सामने आया है जो बोगस आईटीसी बनाने में शामिल थी।
कितने रुपये का आईटीसी गलत तरीके से लिया और ट्रांसफर किया गया?
जांच में पाया गया कि 9.63 करोड़ रुपये का आईटीसी गलत तरीके से लिया गया और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे ट्रांसफर किया गया।
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