गुलाबी नगरी जयपुर में रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई और बहन के आपसी स्नेह और पवित्र रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर के आराध्य देव ठाकुर श्री गोविंद देव जी के प्रति अपार भक्ति और अटूट श्रद्धा को प्रकट करने का भी एक महान अवसर है। जयपुर में इस त्योहार का शुभारंभ अपने सगे भाइयों को राखी बांधने से पहले भगवान गोविंद देव जी के चरणों में प्रथम रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा से होता है। इस पावन अवसर पर गोविंद देव जी मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाता है, जहां भगवान का अनुपम श्रृंगार किया जाता है और मनमोहक झांकी सजाई जाती है।
प्रथम रक्षा सूत्र अर्पित करने की सदियों पुरानी प्रथा
जयपुर शहर में यह मान्यता पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है कि किसी भी शुभ कार्य या पर्व की शुरुआत नगर सेठ यानी ठाकुर श्री गोविंद देव जी की पूजा के साथ ही होनी चाहिए। रक्षाबंधन के दिन तड़के से ही हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष मंदिर परिसर में जुटने लगते हैं। बहनें बड़ी श्रद्धा भाव से अपने साथ लाए गए सुंदर रक्षा सूत्रों को ठाकुर जी के चरणों में समर्पित करती हैं। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि जब भगवान स्वयं उनके रक्षक बन जाते हैं, तो उनके भाइयों, परिजनों और प्रियजनों पर आने वाली हर विपत्ति दूर हो जाती है।
विशेष श्रृंगार, पंचामृत अभिषेक और मनमोहक झांकी
रक्षाबंधन के अवसर पर गोविंद देव जी मंदिर का दृश्य अत्यंत दिव्य और विहंगम हो जाता है। मुख्य गर्भगृह में विराजित ठाकुर जी को तरह-तरह की आकर्षक राखियों से सजाया जाता है। प्रातः काल वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का पंचामृत अभिषेक किया जाता है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग होता है। इसके उपरांत ठाकुर जी को विशेष भोग अर्पित किया जाता है। भगवान के इस दिव्य रूप और विशेष श्रृंगार दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त खिंचे चले आते हैं। पूरा मंदिर परिसर जयकारों और 'हर-हर गोविंद' की गूंज से भक्तिमय हो उठता है।
राजपरिवार से लेकर आमजन तक का अटूट विश्वास
गोविंद देव जी महाराज जयपुर के राजपरिवार के भी आराध्य देव माने जाते हैं। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर राजपरिवार के सदस्यों से लेकर सामान्य नागरिकों तक, सभी एक ही धरातल पर आकर भगवान के समक्ष नतमस्तक होते हैं। मंदिर में उपस्थित होकर हर कोई अपने परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और सुरक्षा की कामना करता है। दिनभर चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।
भक्त और भगवान के रिश्ते का अनूठा पावन पर्व
इस प्रकार जयपुर में रक्षाबंधन का पर्व सामाजिक और पारिवारिक संबंधों से ऊपर उठकर भक्त और भगवान के बीच विश्वास, समर्पण और सुरक्षा का एक अनुपम उदाहरण पेश करता है। राखियों से सुशोभित ठाकुर जी की प्रतिमा, पंचामृत स्नान की सुगंध, और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ इस दिन को जयपुर की सांस्कृतिक धरोहर में एक स्वर्णिम अध्याय बना देती है। यही कारण है कि जयपुरवासी अपने हर पर्व का पहला न्योता और पहली राखी अपने आराध्य देव को ही समर्पित करते हैं।



















