राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर स्थित अपने नए परिसर की बदहाल और खस्ताहाल स्थिति पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस नए भवन की जर्जर हालत और उससे पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए उच्च न्यायालय की दोहरी पीठ ने खुद संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। अदालत के इस कड़े रुख के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि पीठ ने सुरक्षा खामियों को लेकर सीधे शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय की है।
न्यायिक परिसर की सुरक्षा पर उठा सवाल
अदालत में रोजाना आने वाले सैकड़ों वकीलों, पक्षकारों, आम नागरिकों और न्यायिक कर्मचारियों की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मुद्दे को प्राथमिक आधार पर लिया है। नए परिसर की बुनियादी संरचना में आई गंभीर कमियों और संभावित दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) तथा अन्य संबंधित महकमों के सर्वोच्च अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश जारी किए। आदेश मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया और अधिकारियों को आनन-फानन में जोधपुर पहुंचना पड़ा।
शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति
उच्च न्यायालय की सख्त हिदायत के बाद राज्य के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस महकमे के आला अफसर जोधपुर पहुंचकर कोर्ट के समक्ष हाजिर हुए। सुनवाई के दौरान राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश हुए। उनके साथ ही पुलिस महानिदेशक (स्पेशल ऑपरेशंस) आनंद श्रीवास्तव ने भी पीठ के समक्ष उपस्थित होकर स्थिति का ब्योरा दिया। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से मुख्य अभियंता मुकेश भाटी के साथ वरिष्ठ अधिकारी सत्येंद्र कुमार और कौशलेंद्र कुमार ने भी अदालत की कार्यवाही में भाग लिया और सवालों का सामना किया।
निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और आरएसआरडीसी की पेशी
करोड़ों की भारी-भरकम लागत से बने इस आधुनिक परिसर के इतने कम समय में जर्जर होने पर अदालत ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। इसी क्रम में राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम (RSRDC) के शीर्ष अधिकारियों को भी जवाबदेही तय करने के लिए बुलाया गया। निगम के कार्यकारी प्रबंध निदेशक (MD) अनिल विजयवर्गीय और अतिरिक्त मुख्य अभियंता डीके गुप्ता अदालत में उपस्थित रहे। पीठ यह जानने का प्रयास कर रही है कि निर्माण की बुनियादी संरचना में कहाँ-कहाँ गंभीर खामियां छूटी हैं और इतने बड़े बजट के बाद भी भवन की यह दशा कैसे हुई।
कंप्लायंस रिपोर्ट और भविष्य की कार्ययोजना पर नजर
कार्रवाई के दौरान सभी संबंधित विभागों की ओर से जर्जर भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ढांचागत कमियों को दूर करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की गई। हाईकोर्ट इस बात की लगातार निगरानी कर रहा है कि परिसर में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए क्या तात्कालिक उपाय किए गए हैं और भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रशासन के पास क्या ठोस योजना है। फिलहाल सभी निगाहें विभागों की ओर से पेश की जाने वाली कंप्लायंस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर अदालत आगामी कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।





















