वैश्विक मुद्रा बाजारों में इस हफ्ते की शुरुआत से ही काफी हलचल देखने को मिल रही है, जहां प्रमुख मुद्राओं में उतार-चढ़ाव जारी है। शिकागो के फ्यूचर्स मार्केट से सामने आए ताजा पोजीशनिंग आंकड़ों के अनुसार, एसेट मैनेजर और लीवरेज्ड फंड लगातार यूरो कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। इस रुझान से साफ है कि मार्केट के बड़े खिलाड़ी धीरे-धीरे यूरो के पक्ष में अपनी पोजीशन मजबूत कर रहे हैं, जिससे इस करेंसी को धीरे-धीरे लेकिन लगातार बढ़त मिलने की उम्मीद बंध रही है।
जर्मन आईएफओ और पीएमआई आंकड़ों का इंतजार
इस सप्ताह बाजार की नजरें कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। इसमें आने वाले दिनों में जारी होने वाला अगस्त का जर्मन आईएफओ (IFO) इंडेक्स बेहद अहम रहने वाला है। यूरोजोन के पीएमआई आंकड़ों की तरह ही इस इंडेक्स से भी यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह मार्च और अप्रैल के महीनों में आई भारी गिरावट के बाद से अपनी रिकवरी की रफ्तार को बनाए रखेगा। जानकारों का मानना है कि ये आंकड़े यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की सेहत को समझने में मदद करेंगे और मुद्रा की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
EUR/USD की चाल और बाजार का रुख
करेंसी बाजार के जानकारों का आकलन है कि मौजूदा बाजार परिवेश में EUR/USD जोड़ी के लिए 1.1660 से 1.1700 के बीच का स्तर कड़ा समर्थन दे रहा है। हालांकि सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान यह जोड़ी 1.1700 के नीचे रक्षात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही थी, लेकिन जब तक जोखिम भरे परिसंपत्तियों में कोई बड़ी गिरावट नहीं आती, तब तक इसके इस समर्थन स्तर से नीचे जाने की आशंका सीमित ही नजर आती है। हालांकि, पिछले हफ्ते के ब्रेक-आउट जोन को एक संभावित जोखिम के रूप में देखा जा रहा है, यदि वैश्विक जोखिम भरी संपत्तियों पर किसी तरह का दबाव बढ़ता है। ING बैंक की तरफ से EUR/USD के लिए सितंबर के अंत तक 1.17 और साल के अंत तक 1.18 के अपने पूर्वानुमानों को फिलहाल समीक्षा के दायरे में रखा गया है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने का हाल
सोमवार को बाजार खुलने के साथ ही GBP/USD जोड़ी में भी सुस्ती का माहौल देखा गया और यह 1.3600 के मध्य स्तर के आसपास नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही थी। अमेरिकी डॉलर में हो रही मामूली रिकवरी के पीछे मुख्य वजह ईरान पर संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता है, जिसके चलते ब्रिटिश पाउंड जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्राएं दबाव में आ गई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी के हालिया बॉन्ड बायबैक प्लान और अमेरिका-कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक तनावों के बीच अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का फायदा सोने को मिल रहा है। कीमती धातु सोना यूरोपीय सत्र के दौरान 4,650 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा था, जो पिछले तीन महीनों के इसके सबसे ऊंचे स्तरों के नजदीक है।
अमेरिकी ट्रेजरी का लिक्विडिटी बायबैक प्लान
इस पूरे आर्थिक परिदृश्य के केंद्र में अमेरिकी ट्रेजरी का वह अप्रत्याशित कदम है जो उसने पिछले बुधवार को उठाया था। ठीक दोपहर 12:32 जीएमटी पर, विभाग ने घोषणा की थी कि वह 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक जारी रहने वाली है। इसी नीतिगत बदलाव के बाद से अमेरिकी डॉलर में एक सुस्त रिकवरी देखने को मिली है, जिसका असर सोने और अन्य विदेशी मुद्राओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।



















