सोने के बाजार में एक बार फिर से मजबूत तेजी का दौर देखने को मिल रहा है, और वित्तीय बाजारों के जानकारों का मानना है कि यह रफ्तार अभी थमने वाली नहीं है। सोशिए जनरल के विश्लेषकों ने इस बात पर जोर दिया है कि पीली धातु ने एक छोटे बेस फॉर्मेशन को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इस हालिया उछाल के दौरान सोने ने अपने महत्वपूर्ण 200-डीएमए यानी 200-दिवसीय मूविंग एवरेज को भी फिर से अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे बाजार में खरीदार खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के अवमूल्यन की चिंताओं और बढ़ते टर्म प्रीमियम के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
मूविंग एवरेज और नए टारगेट
बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि इस लंबी अवधि के मूविंग एवरेज से ऊपर उठना इस बात का साफ संकेत है कि बाजार में upward momentum यानी ऊपर की ओर जाने की ताकत लौट आई है। सोशिए जनरल के मुताबिक, सोने के लिए आने वाले दिनों में ऊपर की तरफ क्रमशः 4,730 डॉलर और 4,770 डॉलर के स्तर पर रुकावटें आ सकती हैं। इसके अलावा, अप्रैल महीने में बने अपने उच्चतम स्तर 4,890 डॉलर को छूना भी अगला बड़ा लक्ष्य हो सकता है। दूसरी ओर, 4,510 डॉलर के आसपास मौजूद 200-डीएमए इस पूरी तेजी को बनाए रखने के लिए सबसे मजबूत सपोर्ट का काम करेगा और इस स्तर का बचाव करना बेहद अहम होगा।
अमेरिकी ट्रेजरी का बायबैक प्लान और करंसी मार्केट की चाल
सोने की इस चाल के पीछे व्यापक मुद्रा बाजार में चल रही उथल-पुथल की भी बड़ी भूमिका है। यूरोपीय सत्र के दौरान सोमवार को सोना 4,650 डॉलर के आसपास मंडरा रहा था, जो पिछले तीन महीनों में इसके सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। यह कीमती धातु अमेरिकी डॉलर की कमजोरी का पूरा फायदा उठा रही है, जो अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक प्लान और अमेरिका-कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक तनावों के बाद लड़खड़ा गया है। बाजार के तमाम ट्रेडर्स अब ईरान पर संभावित आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़ी आधिकारिक जानकारियों का इंतजार कर रहे हैं ताकि बाजार को नई दिशा मिल सके।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने पिछले हफ्ते बुधवार को अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया था। दोपहर 12:32 जीएमटी पर विभाग ने घोषणा की कि वह 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता वाले सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को कम से कम दोगुना कर देगा। इसके तहत अधिकतम सीमा को प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह योजना 9 सितंबर से प्रभावी हो गई है और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। इस कदम ने ट्रेजरी बॉन्ड बाजार में खलबली मचा दी थी, जिससे डॉलर में भारी बिकवाली देखने को मिली थी।
अन्य मुद्राओं और वैश्विक बाजारों पर असर
करंसी मार्केट में इस व्यापक उठापटक का असर अन्य प्रमुख जोड़ियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत यानी सोमवार को GBP/USD की जोड़ी 1.3600 के मध्य स्तर के आसपास नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रही थी। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अनिश्चितता के चलते अमेरिकी डॉलर ने कुछ रिकवरी की है, जिससे जोखिम के प्रति संवेदनशील ब्रिटिश पाउंड पिछड़ गया है। इसी तरह, EUR/USD की जोड़ी भी यूरोपीय सत्र के दौरान 1.1700 के नीचे रक्षात्मक रुख अपनाए हुए है। पिछले हफ्ते ट्रेजरी के बायबैक प्लान के कारण डॉलर में आई भारी गिरावट के बाद, अब अमेरिकी डॉलर थोड़ी संभलने की कोशिश कर रहा है, जिससे यूरो पर दबाव बना हुआ है।



















