दैनिक जीवन की छोटी-सी खींचतान और मामूली असहमति कभी-कभी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, इसका अंदाजा पूर्वी दिल्ली में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना से लगाया जा सकता है। चंद पैसों या फटे नोट जैसे तुच्छ कारणों पर इंसान का अपने गुस्से पर काबू न रख पाना किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। सामान की डिलीवरी देने गए एक युवक को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उसने एक पुराना और फटा हुआ नोट स्वीकार करने से मना कर दिया था। इस विवाद के बाद हुई बेइज्जती और मारपीट से आहत होकर उस युवा ने अंततः ऐसा कदम उठाया जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
फटे नोट से शुरू हुआ था पूरा विवाद
पूर्वी दिल्ली के इलाके में हुई इस वारदात के केंद्र में 24 साल का डिलीवरी बॉय समीर हुसैन था। घटना की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि समीर किसी काम के सिलसिले में वहां पहुंचा था और लेन-देन के दौरान एक फटा हुआ 10 रुपये का नोट उसके सामने आया। जब उसने वह नोट लेने से साफ इंकार कर दिया, तो बात इतनी बढ़ गई कि दो स्थानीय निवासियों ने उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की। आरोप है कि आरोपियों ने उसे धमकाते हुए कहा कि नोट लेना ही पड़ेगा वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। इस अपमानजनक और हिंसक व्यवहार ने समीर को अंदर से तोड़कर रख दिया और उसने अपनी जान देने जैसा घातक फैसला कर लिया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोचा
घटना के तुरंत बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान 30 साल के राकेश उर्फ बंटी और 65 साल के रामपाल सिंह के रूप में की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर की रात को हुई थी जब रात के ठीक 11 बजकर 3 मिनट पर पुलिस नियंत्रण कक्ष यानी पीसीआर को इस हमले की सूचना मिली थी। खुद समीर ने पुलिस को फोन करके अपने ऊपर हुए हमले की जानकारी दी थी कि किस तरह फटे नोट के लेन-देन को लेकर उसके साथ हाथापाई की गई।
मेडिकल जांच और वीडियो बयान
पुलिस को सूचना मिलने के बाद उसी रात समीर की चिकित्सकीय-कानूनी रिपोर्ट यानी एमएलसी तैयार की गई और कल्याणपुरी थाने में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। इस कानूनी प्रक्रिया के बीच समीर ने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था जिसमें उसने अपने ऊपर बीते उस डरावने वाकये और पूरी आपबीती को विस्तार से बयां किया था। पुलिस इस वीडियो को भी मामले की अहम कड़ी मानकर जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि उस रात असल में क्या-क्या हुआ था और किन परिस्थितियों ने उसे इस हद तक जाने को मजबूर किया।
अस्पताल में भर्ती और 20 अक्टूबर को मौत
हमले के अगले दिन यानी 5 अक्टूबर को पुलिस को यह दुखद सूचना मिली कि समीर ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन संघर्ष लंबा खिंचने के बाद आखिरकार 20 अक्टूबर को 24 वर्षीय समीर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इतनी कम उम्र में हुई इस मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और हर कोई यही सोच रहा है कि क्या एक मामूली से फटे नोट की कीमत किसी की जान से ज्यादा हो सकती है।
समीर की मौत के बाद पुलिस ने इस मामले में कानूनी शिकंजा कसते हुए प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 108 भी जोड़ दी है, जो सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के पीछे की सभी परिस्थितियों और हर एक पहलू की गहराई से जांच की जा रही है ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है कि क्या हम अपनी रोजमर्रा की खीझ और गुस्से में इतने अंधे हो चुके हैं कि सामने वाले इंसान की गरिमा और उसकी जिंदगी का मोल भूलते जा रहे हैं। असहमति और विवाद जीवन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें हिंसा या आत्महत्या के मुकाम तक ले जाना किसी भी सभ्य समाज की निशानी नहीं है।



















