मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में प्रशासनिक हलकों को हैरान करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक आयुष चिकित्सा अधिकारी के तबादले के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम से पूरी तरह से फर्जी पत्र तैयार किया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध व्यक्ति को दबोच लिया है। आरोपी के पास से पुलिस ने एक मोबाइल फोन और एक टैबलेट भी जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल इस गैरकानूनी कृत्य में किए जाने का संदेह है। इसके साथ ही, स्थानीय पुलिस अब इस पूरे षड्यंत्र में संबंधित आयुष चिकित्सा अधिकारी और उनके वाहन चालक की संदिग्ध भूमिका की भी गहराई से छानबीन कर रही है ताकि यह पता चल सके कि परदे के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे।
वॉट्सऐप के जरिए भेजा गया था फर्जी आदेश जैसी शक्ल वाला पत्र
इस पूरे धोखाधड़ी के मामले का खुलासा तब हुआ जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राजेश अतुलकर ने स्थानीय पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक रघुवंश कुमार सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि 21 जुलाई को सीएमएचओ के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर वॉट्सऐप के माध्यम से एक अज्ञात व्यक्ति ने यह फर्जी पत्र भेजा था। इस पत्र को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि पहली नजर में यह मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी हुआ कोई आधिकारिक आदेश प्रतीत हो, जिससे प्रशासनिक तंत्र में भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई थी।
फर्जी लेटरपैड और तस्वीर के इस्तेमाल से रचा गया षड्यंत्र
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह फर्जी पत्र सीधे तौर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय को संबोधित किया गया था। इस दस्तावेज को प्रामाणिक दिखाने के लिए इसमें मुख्यमंत्री के नाम के फर्जी लेटरपैड का बेजा इस्तेमाल किया गया था और साथ ही उनकी तस्वीर का भी प्रयोग किया गया था। पत्र के भीतर यह दर्शाया गया था कि आलीराजपुर जिले में पदस्थ आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. निर्मला निगवाल का ट्रांसफर उदयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से हटाकर सोंडवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किए जाने का आधिकारिक आवेदन या अनुमोदन है, जिसे प्रशासनिक अमले को गुमराह करने के लिए प्रसारित किया गया था।
सीहोर से धरे गए आरोपी के पास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
मामले की तह तक जाने के लिए गठित पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से अपनी जांच का दायरा बढ़ाया। इसी कड़ी में पुलिस ने सीहोर जिले के रहने वाले 33 वर्षीय मुकेश भोंसले को धर दबोचा। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक मोबाइल फोन और एक टैबलेट बरामद किए गए हैं, जिनका फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस अब मुख्य तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मुकेश भोंसले ने अकेले ही यह फर्जी पत्र तैयार किया था या इस साजिश के पीछे कोई बड़ा गिरोह या अन्य लोग भी सक्रिय थे, जो प्रशासनिक फेरबदल के नाम पर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
वाहन चालक के बैंक खाते से जुड़े वित्तीय लेन-देन का खुलासा
इस जांच में एक नया और अहम मोड़ तब आया जब पुलिस निरीक्षक सोनू सितोले ने वित्तीय लेन-देन का खुलासा किया। पुलिस की छानबीन में यह तथ्यात्मक बात सामने आई कि आयुष चिकित्सा अधिकारी के आधिकारिक वाहन चालक नवल सिंह ने गिरफ्तार किए गए आरोपी मुकेश भोंसले को यूपीआई के माध्यम से कुल 15 हजार रुपये का भुगतान किया था। इस वित्तीय ट्रांसफर के सामने आने के बाद पुलिस का शक और गहरा गया है कि यह मामला केवल एक फर्जी पत्र भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरी आर्थिक सांठगांठ या भ्रष्टाचार का खेल भी हो सकता है।
चिकित्सक और ड्राइवर की भूमिका पर टिकी पुलिस की नजर
वाहन चालक द्वारा आरोपी को भेजे गए इस 15 हजार रुपये के लेन-देन को अब पुलिस ने अपनी आधिकारिक जांच का मुख्य हिस्सा बना लिया है। पुलिस अधीक्षक ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तार आरोपी ही नहीं, बल्कि आयुष चिकित्सा अधिकारी और उनके वाहन चालक की प्रत्येक गतिविधि और भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बहुस्तरीय जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जो भी ठोस तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर इस मामले में आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


















