राजस्थान के जयपुर से सटे कोटपूतली जिले में आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के तहत स्थानीय पुलिस ने जाली मुद्रा के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में ५००-५०० रुपये के जाली नोटों की एक बड़ी खेप जब्त की है और इस गोरखधंधे से जुड़े दो संदिग्धों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से स्थानीय बाजारों में हड़कंप का माहौल है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर हुई कार्रवाई
जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के मार्गदर्शन और वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में कोटपूतली थाना पुलिस ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। पिछले कुछ दिनों से पुलिस को गोपनीय सूत्रों के जरिए यह जानकारी मिल रही थी कि इलाके में कुछ लोग सक्रिय रूप से फर्जी नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सूचना को पुख्ता करने के बाद पुलिस ने एक विशेष दल का गठन किया और सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की।
गिरफ्तार आरोपियों से बरामद हुई नकदी
पुलिस के हत्थे चढ़े दोनों शातिरों की पहचान बर्डोद के रहने वाले निशीकांत और राहुल के रूप में की गई है। जब पुलिस ने उनकी तलाशी ली, तो उनके पास से ५००-५०० रुपये मूल्य के कुल 135 जाली नोट बरामद हुए। इसके अलावा, पूछताछ और छानबीन के दौरान पुलिस ने बाजार में फर्जी नोट खपाने से जुटाई गई 14,440 रुपये की असली नकदी भी जब्त कर ली है। शुरुआती पूछताछ में इन आरोपियों ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि वे महज करीब 40 हजार रुपये की मामूली रकम चुकाकर एक लाख रुपये तक के नकली नोट हासिल करते थे।
बाजारों में खपाए जा रहे थे फर्जी नोट
जांच में यह बात सामने आई है कि ये शातिर आरोपी एक सोची-समझी रणनीति के तहत बेहद कम कीमत पर जाली करेंसी मंगवाते थे और फिर उसे आम बाजारों तथा छोटे दुकानदारों के बीच आसानी से चला देते थे। इस तरह वे असली नोटों को अपने पास जमा कर रहे थे। चूंकि आने वाले समय के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की चौकसी बेहद कड़ी होती है, ऐसे में इस तरह के गिरोहों का सक्रिय रहना देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस आपराधिक सिंडिकेट के तार राज्य के किन अन्य हिस्सों या बाहरी राज्यों से जुड़े हुए हैं।
आगे की गहन पूछताछ जारी
कोटपूतली थाना पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों से बेहद सख्ती से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह खंगालने की कोशिश कर रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह या किसी मुख्य सरगना का हाथ तो नहीं है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जाली मुद्रा के इस अवैध कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और बहुत जल्द इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य राज भी सामने लाए जाएंगे।


















