महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते ने एक गुप्त सूचना के आधार पर ठाणे जिले के ठाकुरली इलाके से दस लाख रुपये के इनामी नक्सली को दबोच लिया है। पकड़ा गया आरोपी झारखंड का वांछित माओवादी नेता है, जिसकी तलाश सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से कर रही थीं। खुफिया इनपुट मिलने के बाद दस्ते ने इलाके में घेराबंदी कर उसे सफलतापूर्वक हिरासत में लिया।
ठाकुरली में दस दिनों से काट रहा था फरारी
गिरफ्तार किए गए 45 वर्षीय आरोपी की पहचान संजय सरजू यादव उर्फ गोदाराम यादव के रूप में हुई है। वह मूल रूप से झारखंड के पलामू जिले में स्थित छतरपुर थाना क्षेत्र के देवगन गांव का निवासी है। संगठन के भीतर वह रीजनल कमेटी के अहम सदस्य के तौर पर सक्रिय था। शुरुआती पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि वह अपनी पहचान छिपाकर पिछले करीब दस दिनों से ठाकुरली इलाके में छिपकर रह रहा था। महाराष्ट्र एटीएस ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे झारखंड पुलिस के हवाले कर दिया, जहां उसकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की गई।
झारखंड में सुरक्षा एजेंसियों का साझा अभियान
झारखंड में वामपंथी उग्रवाद के खात्मे के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस की संयुक्त टीमें बड़े स्तर पर लगातार अभियान चला रही हैं। इसी अभियान के मद्देनजर पूरे राज्य में कड़ा सुरक्षा अलर्ट लागू किया गया था, जिसके दबाव के चलते कई नक्सली राज्य से बाहर पनाह लेने की कोशिश कर रहे हैं। संजय सरजू यादव की गिरफ्तारी सुरक्षा बलों के इस साझा नेटवर्क और अंतरराज्यीय समन्वय की एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
हालिया महीनों में उग्रवादी नेटवर्क को लगे बड़े झटके
इस गिरफ्तारी से पहले भी झारखंड में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसी वर्ष अक्टूबर के महीने में सुरक्षा बलों ने राज्य में एक मुठभेड़ के दौरान माओवादी संगठन के सब-रीजनल कमांडर कुंवर मांझी उर्फ सहदेव मांझी को ढेर कर दिया था। इसके अलावा, इसी साल जुलाई में रांची में संगठन के रीजनल कमांडर संतोष महतो सहित कुल 16 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी उग्रवादियों पर कुल मिलाकर 39 लाख रुपये का सरकारी इनाम घोषित था।
नेटवर्क की बची कड़ियों को खत्म करने पर जोर
सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों की प्राथमिकता अब माओवादी ढांचे की बची हुई कड़ियों को पूरी तरह समाप्त करने पर केंद्रित है। केंद्र और प्रभावित राज्यों की एजेंसियां मिलकर उग्रवादियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई और आत्मसमर्पण नीति को आगे बढ़ा रही हैं। इसी साल के शुरुआती हिस्से में गृह मंत्री अमित शाह ने भी व्यापक सुरक्षा अभियानों और बड़े पैमाने पर हुए आत्मसमर्पण के आधार पर यह रेखांकित किया था कि देश काफी हद तक वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो चुका है।


















