छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाना होता है फलदायी, जानिए सही समय और पूजा के जरूरी नियमकथक क्वीन सितारा देवी: जिन्हें रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी नृत्य सम्राज्ञी की उपाधि, जानिए अनसुनी दास्तांरोबोटिक्स के लिए काम करने वाली फिजिसल ने जुटाए 1 करोड़ डॉलर, एलेक्स डी विगान का नया वेंचरराजस्थान में 969 करोड़ रुपये से बदल रही ब्रिटिश काल की रेल लाइन, उदयपुर-जोधपुर का सफर होगा आसानरूखे और बेजान बालों से हैं परेशान, तो फेंकने के बजाय केले के छिलके से बनाएं असरदार हेयर टॉनिकबेंगलुरु से लखनऊ जा रही इंडिगो फ्लाइट में हाईजैक की धमकी, टॉयलेट में मिला नोट तो करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंगदीवाली के मौके पर कोटा के कड़के सेव की मांग तेज, 125 साल पुरानी इस रेसिपी का स्वाद है बेहद खासपराग्वे में तख्तापलट, राष्ट्रपति सैंटियागो पेना महाभियोग के बाद पद से बर्खास्त और नजरबंदछोटी दिवाली पर क्यों होती है हनुमान जी की आराधना, जानिए इसके पीछे की पौराणिक वजह और चमत्कारिक लाभधनु राशिफल 8 नवंबर: किसी मित्र की शुभ सूचना से खिलेगा मन, प्रापर्टी खरीदने का निर्णय फिलहाल टालें
कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला, महिला को गलत नजर से देखना नहीं है यौन संबंध की मांगअपराध
8 नव॰ 2026, 6:44 am (4 मिनट पहले)· 0

कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला, महिला को गलत नजर से देखना नहीं है यौन संबंध की मांग

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला को अनुचित तरीके से देखना अपने आप में यौन संबंध बनाने का अनुरोध नहीं है। अदालत ने इस आधार पर दर्ज आपराधिक कार्यवाही को खारिज कर दिया।

बेंगलुरु की अदालत ने एक अहम कानूनी मामले में स्पष्ट किया है कि किसी महिला को गलत नजर से घूरना या देखना स्वतः ही यौन उत्पीड़न या यौन संबंध बनाने की मांग के दायरे में नहीं आता है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था देते हुए एक आरोपी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत का यह फैसला ऐसे मामलों में कानूनी परिभाषा और सबूतों के दायरे को स्पष्ट करता है।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए रेखांकित किया कि केवल इस बात के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(ii) के अंतर्गत अपराध का गठन नहीं किया जा सकता कि आरोपी ने किसी महिला को अनुचित तरीके से देखा था। अदालत ने यह कदम तब उठाया जब यह सामने आया कि शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस जांच के दौरान अपने शुरुआती बयानों से कई गंभीर आरोप वापस ले लिए थे और केवल घूरने की बात तक सीमित रह गई थी।

ये भी पढ़ें

मूल शिकायत के अनुसार, एक महिला ने आर्थिक लेन-देन के विवाद के सिलसिले में आरोपी के आवास का दौरा किया था। इस दौरान उसने यह गंभीर आरोप लगाया था कि आरोपी ने उससे शारीरिक संबंध बनाने की मांग की और इसके बदले में धन तथा अन्य प्रकार के लाभ देने की पेशकश की। इसके अलावा महिला ने यह भी दावा किया था कि पैसे वापस मांगने या विवाद के दौरान आरोपी ने उसे गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाने की धमकी दी थी।

हालांकि, मामले की तफ्तीश के दौरान जब पुलिस ने महिला का दोबारा बयान दर्ज किया, तो उसने अपने शुरुआती तमाम आरोपों से पलटते हुए उन्हें खारिज कर दिया। उसने स्वीकार किया कि आरोपी ने ऐसी कोई मांग नहीं की थी और केवल उसे गलत नजर से देखा था। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल करते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(ii) के साथ-साथ धारा 351(2) के तहत आपराधिक धमकी के आरोप दर्ज कर दिए थे।

इन तमाम कानूनी कार्यवाहियों से राहत पाने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। दो नवंबर को दिए अपने फैसले में अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए माना कि महिला के संशोधित बयानों के बाद कथित अपराध के बुनियादी तत्व ही समाप्त हो जाते हैं। पीठ ने जोर देकर कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए यौन अनुग्रह की मांग या आपराधिक धमकी के आरोपों को साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई ठोस सामग्री या साक्ष्य मौजूद नहीं है।

सवाल-जवाब

कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या मुख्य फैसला दिया?
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को गलत नजर से देखना अपने आप में यौन संबंध की मांग या यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता है।
किस अदालत के न्यायाधीश ने यह फैसला सुनाया?
यह फैसला न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की पीठ द्वारा सुनाया गया।
शिकायतकर्ता महिला ने अपने बयानों में क्या बदलाव किया था?
महिला ने शुरुआत में यौन संबंध की मांग और धमकी के आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में पुलिस जांच में उसने इन आरोपों से इनकार कर दिया और केवल गलत नजर से देखने की बात कही।
आरोपी के खिलाफ कौन सी धाराएं दर्ज की गई थीं?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1)(ii) और धारा 351(2) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही क्यों रद्द की?
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता के बाद के बयानों से अपराध के आवश्यक तत्व समाप्त हो गए थे और आरोपों की पुष्टि के लिए कोई अन्य सामग्री नहीं थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp