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उत्तराखंड के चमोली में कुप्रथा की भेंट चढ़ी बेटी, पीरियड के दौरान नदी किनारे नहाने गई सुमित्रा की पानी में डूबकर मौतअपराध
23 अग॰ 2026, 8:38 am (75 दिन पहले)· 5

उत्तराखंड के चमोली में कुप्रथा की भेंट चढ़ी बेटी, पीरियड के दौरान नदी किनारे नहाने गई सुमित्रा की पानी में डूबकर मौत

चमोली जिले के नंदानगर ब्लॉक में पीरियड्स के दौरान गांव से दूर नहाने जाने की कुप्रथा के कारण एक युवती की नदी में बहने से मौत हो गई। इस अमानवीय परंपरा को लेकर पूरे इलाके में गहरा आक्रोश है।

उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जनपद के नंदानगर ब्लॉक के सुतोल-तातड़ा तोक इलाके में 15 अगस्त की शाम को अलकनंदा के पास से लापता हुई युवती सुमित्रा का शव आखिरकार बरामद कर लिया गया है। यह केवल एक साधारण दुर्घटना नहीं है, बल्कि उस अमानवीय और रूढ़िवादी प्रथा का परिणाम है जिसके बारे में आज के दौर में सोचना भी किसी बड़ी विडंबना से कम नहीं है।

मासिक धर्म के दौरान गांव की सीमा में स्नान पर सख्त पाबंदी

सामने आई जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा सुतोल के तातड़ा तोक क्षेत्र को भूमियाल देवता की पवित्र भूमि माना जाता है। इसी मान्यता के चलते आज भी महिलाओं और युवतियों को मासिक धर्म के दिनों में गांव की सीमा के भीतर स्नान करने की अनुमति नहीं दी जाती है। इस कड़े प्रतिबंध के कारण महिलाओं को तातड़ा गांव से लगभग 5 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके सुतोल गांव में नंदाकिनी नदी के तट पर जाना पड़ता है।

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स्नान के लिए अकेले नदी किनारे गई थी सुमित्रा

घटना वाले दिन यानी 15 अगस्त को सुमित्रा गांव में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के बाद शाम के समय स्नान करने के लिए गांव से 5 किलोमीटर दूर नदी के किनारे गई हुई थी। वहीं पर उसके साथ यह भयानक हादसा घटित हो गया। घटना के बाद से ही ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी। उसी रात उसकी चप्पल नदी के तेज बहाव में घटनास्थल से करीब 1 किलोमीटर दूर पाई गई थी। तभी से यह आशंका जताई जा रही थी कि वह उफनती नदी की चपेट में आ गई है। शनिवार को उसका शव मिलने के बाद इस आशंका की पुष्टि हो गई।

दर्दनाक हादसे के बाद परंपरा के खिलाफ उठा रोष

इस हृदय विदारक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय लोगों के भीतर भारी गुस्सा देखा जा रहा है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि आज के आधुनिक युग में भी महिलाओं को मीलों दूर अकेले और असुरक्षित जगहों पर स्नान के लिए विवश करना सरासर प्रताड़ना है। इसके अलावा रास्ते में मिलने वाले हर व्यक्ति को यह बताना पड़ता है कि वह मासिक धर्म से गुजर रही है, जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है।

कुप्रथा को तत्काल समाप्त करने की जोरदार अपील

क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और जागरूक लोगों ने गांव के बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं से भी कड़े शब्दों में अपील की है कि इष्ट देवता कभी भी अपने भक्तों का बुरा नहीं चाहते हैं। किसी भी देवी-देवता की ऐसी मंशा नहीं हो सकती कि उनकी पूजा या पवित्रता के नाम पर किसी मासूम बेटी की जान चली जाए। स्थानीय लोगों ने अब इस अमानवीय प्रथा को हमेशा के लिए बंद करने की मांग की है।

सवाल-जवाब

सुमित्रा किस दिन और कहां से लापता हुई थी?
सुमित्रा 15 अगस्त की शाम चमोली जिले के नंदानगर ब्लॉक के सुतोल-तातड़ा तोक में अलकनंदा किनारे से लापता हुई थी।
सुमित्रा नदी के पास क्यों गई थी?
मासिक धर्म के दौरान गांव की सीमा में स्नान पर रोक होने के कारण उसे 5 किलोमीटर दूर नदी किनारे स्नान करने जाना पड़ा था।
सुमित्रा का शव कब और कैसे मिला?
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद नहाने गई सुमित्रा की तलाश के दौरान उसकी चप्पल नदी में मिली थी, और शनिवार को उसका शव बरामद हुआ।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?
पूरे क्षेत्र में गहरा शोक और आक्रोश है, तथा जागरूक लोगों ने इस अमानवीय कुप्रथा को तुरंत समाप्त करने की अपील की है।
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