यूरोपियन सेंट्रल बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा क्षेत्र में बनी हुई महंगाई आने वाले समय में वेतन वार्ताओं और संपूर्ण अर्थव्यवस्था में मूल्य निर्धारण को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी। उनके अनुसार केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य इस महंगाई के असर को अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों में फैलने से रोकना है। मौद्रिक अधिकारियों का लक्ष्य अगले एक से दो वर्षों के भीतर मुद्रास्फीति को तय लक्ष्य पर वापस लाना है। वैश्विक बाजारों में इस बयान को मौद्रिक सख्ती बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि निवेशक अमेरिकी और कनाडाई रोजगार आंकड़ों की घोषणा से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं।
वेतन वार्ताओं और आर्थिक परिदृश्य पर फिलिप लेन का रुख
यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबावों का विश्लेषण करते हुए फिलिप लेन ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर अब श्रम बाजार तक पहुंच रहा है। जब ऊर्जा महंगी होती है, तो कर्मचारी अपने जीवन यापन के खर्च को पूरा करने के लिए अधिक वेतन की मांग करते हैं। इससे कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ता है और वे अपने उत्पादों तथा सेवाओं की कीमतें बढ़ा देती हैं। इस प्रक्रिया से द्वितीयक प्रभाव उत्पन्न होने का जोखिम रहता है। मौद्रिक नीति का मुख्य कार्य इसी दुष्चक्र को तोड़ना है ताकि मुद्रास्फीति को एक से दो साल की अवधि में नियंत्रित किया जा सके।
अर्थव्यवस्था के अन्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए लेन ने उल्लेख किया कि वित्तीय परिस्थितियों में पहले ही पर्याप्त सख्ती आ चुकी है। हालांकि, यूरो क्षेत्र के निर्यात में उम्मीद से अधिक मजबूती देखने को मिली है, जिससे आर्थिक वृद्धि को सहारा मिला है। राजकोषीय नीति के मोर्चे पर उन्होंने माना कि सरकारी खर्च अनुमान से अधिक सुस्त या व्यापक रहा है, लेकिन अगले वर्ष और उसके बाद राजकोषीय समेकन तथा सख्ती की उम्मीद है। दिसंबर में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समीक्षा के संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक तब तक उपलब्ध सभी आर्थिक आंकड़ों को एकत्र करेगा और उनके आधार पर ही ब्याज दरों पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन की स्थिति
यूरोपीय मौद्रिक नीति के संकेतों के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नरम रुख और वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बढ़ा। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में दो महीने के निचले स्तर तक आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त को सीमित किया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निचले स्तरों पर कुछ राहत मिली।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में मिला-जुला कारोबार दर्ज किया गया। सप्ताह के निचले स्तर को छूने के बाद डॉलर-येन जोड़ी में मामूली सुधार देखा गया। बैंक ऑफ जापान के सख्त मौद्रिक रुख और जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की चेतावनियों ने येन को सहारा दिया है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव घटने की उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के कारण डॉलर-येन में बड़ी बढ़त दर्ज नहीं हो सकी।
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख
कीमती धातुओं के बाजार में सोने के भाव शुरुआती गिरावट से उबरने में सफल रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,070 डॉलर से 4,075 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी डॉलर में आए हालिया सुधार और फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख के कारण सोने की कीमतों पर ऊपरी स्तरों से दबाव देखा गया। इससे पहले सोने ने दो सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ था। हालांकि, व्यापारी शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों से पहले बड़े दांव लगाने से बचते दिखे।
अमेरिका और कनाडा के रोजगार आंकड़ों पर टिकी बाजार की निगाहें
वैश्विक वित्तीय बाजारों की तात्कालिक दिशा शुक्रवार को जारी होने वाले श्रम बाजार के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। स्टैटिस्टिक्स कनाडा शुक्रवार को 13:30 GMT पर अक्टूबर महीने का लेबर फोर्स सर्वे जारी करने जा रहा है। सितंबर में रोजगार में आई भारी गिरावट के बाद अक्टूबर में मामूली सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इस आंकड़े से कनाडाई डॉलर की विनिमय दर प्रभावित हो सकती है।
इसी समय, यानी 13:30 GMT पर अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो अपने अक्टूबर महीने के नॉन-फार्म पेरोल आंकड़े पेश करेगा। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अक्टूबर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 65,000 नए गैर-कृषि रोजगार जुड़े हैं, जो सितंबर के 29,000 के आंकड़े से बेहतर हैं। यदि यह आंकड़ा अनुमान के अनुरूप या उससे बेहतर रहता है, तो अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल सकती है और फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीति पर इसका सीधा असर पड़ेगा।



















