पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) की टीम ने एक बड़े रंगदारी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस महकमे के भीतर जारी अवैध गतिविधियों पर नकेल कसते हुए अधिकारियों ने झारग्राम पुलिस स्टेशन में तैनात एक सिपाही और उसके तीन मददगार दलालों को रंगे हाथों दबोच लिया। यह पूरी कार्रवाई बालू परिवहन करने वाले वाहन चालकों और ठेकेदारों से की जा रही गैर-कानूनी वसूली की शिकायतों के बाद अमल में लाई गई है।
रंगदारी सिंडिकेट और 5.70 लाख रुपये नकद बरामदगी
एसीबी द्वारा की गई इस छापेमारी के दौरान कुल 5 लाख 70 हजार रुपये की नकद राशि जब्त की गई है। गिरफ्तार किए गए पुलिस कांस्टेबल की पहचान रतन प्रमाणिक के रूप में हुई है, जो झारग्राम पुलिस स्टेशन में कार्यरत था। वहीं, उसके साथ साठगांठ कर वसूली करने वाले तीनों बिचौलियों के नाम शांतनु बारिक, दीपांकर बारिक और रवि बारिक हैं। ये तीनों आरोपी बांधगोरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले श्यामसुंदरपुर गांव के रहने वाले हैं। ये दलाल इलाके में बालू लादकर गुजरने वाले ट्रकों और ट्रैक्टरों से जबरन पैसे वसूलने का काम करते थे।
एसीबी का जाल और 'झारग्राम मैनेजर' का पर्दाफाश
भ्रष्टाचार निवारण विभाग को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि स्थानीय थाने का एक सिपाही दलालों के जरिए बालू कारोबारियों और वाहन मालिकों को धमकाकर नियमित वसूली करवा रहा है। इस पर कार्रवाई करते हुए एसीबी की विशेष टीम ने जाल बिछाया और तीनों दलालों को उस समय धर दबोचा जब वे एक ट्रक मालिक से रिश्वत का पैसा ले रहे थे। कड़ाई से की गई पूछताछ में दलालों ने स्वीकार किया कि यह रकम सीधे सिपाही रतन प्रमाणिक के लिए एकत्र की जाती थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाली जानकारी भी सामने आई कि मुख्य दलाल के मोबाइल फोन में आरोपी सिपाही का संपर्क नंबर 'झारग्राम मैनेजर' के नाम से सहेजा गया था। जब्त की गई रकम में ताजा वसूली के अलावा पहले से एकत्र किए गए 5 लाख रुपये भी शामिल हैं।
झारग्राम में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला
इस मामले में शामिल अन्य संभावित आरोपियों और प्रशासनिक कड़ियों की गहन पड़ताल की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। झारग्राम में सरकारी पदों का दुरुपयोग कर रिश्वतखोरी का यह पहला मामला नहीं है। इसी वर्ष अगस्त के महीने में जाम्बोनी बीडीओ कार्यालय में पदस्थ सब-असिस्टेंट इंजीनियर बिमल साहा को भी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उस मामले में एक सब-कॉन्ट्रैक्टर ने अधिकारी की प्रताड़ना से तंग आकर एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद बिमल साहा को रंगे हाथों पकड़ा गया था।


















