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बड़ी मस्जिद के नाम से मशहूर जौनपुर की यह इमारत सदियों से खड़ी है शान सेकल्चर
14 जुल॰ 2026, 9:25 am (45 दिन पहले)· 1

बड़ी मस्जिद के नाम से मशहूर जौनपुर की यह इमारत सदियों से खड़ी है शान से

जौनपुर की जामा मस्जिद, जिसे लोग बड़ी मस्जिद कहते हैं, ऊंचे चबूतरे पर बनी शर्कीकालीन वास्तुकला की मिसाल है। एएसआई से संरक्षित यह इमारत हर साल हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती है।

जौनपुर शहर के बीचोंबीच खड़ी जामा मस्जिद, जिसे लोग बड़ी मस्जिद के नाम से भी जानते हैं, शहर की सबसे ऊंची और भव्य इमारतों में शुमार होती है। शर्की शासनकाल में तैयार हुई यह मस्जिद ऊंचे चबूतरे पर बनी है और अपनी विशालता तथा ऐतिहासिक महत्व की वजह से देश-विदेश से पर्यटकों को खींच लाती है। जौनपुर की पहचान और गौरव में इस इमारत का नाम सबसे ऊपर आता है।

बड़ी मस्जिद के नाम से क्यों जानी जाती है

विशाल प्रांगण, ऊंचा मुख्य द्वार और भव्य निर्माण के कारण स्थानीय लोग इसे बड़ी मस्जिद कहते हैं। शर्की दौर में बनी यह मस्जिद आज भी अपनी ऐतिहासिक सुंदरता और धार्मिक अहमियत के लिए जानी जाती है। हर शुक्रवार यहां बड़ी तादाद में नमाजी नमाज अदा करने पहुंचते हैं, जिससे मस्जिद परिसर की रौनक देखने लायक होती है।

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शर्की सल्तनत की स्थापत्य कला की मिसाल

इतिहासकारों के मुताबिक जामा मस्जिद का निर्माण इब्राहिम शाह शर्की के शासनकाल में शुरू हुआ था और इसे बाद में पूरा कराया गया। इसके विशाल मेहराब, मजबूत पत्थर की चिनाई और बारीक नक्काशी इसे इलाके की बाकी मस्जिदों से अलग खड़ा करती है। यही वजह है कि इसे शर्की सल्तनत की बेहतरीन वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है।

ऊंचा चबूतरा है सबसे बड़ी खासियत

जामा मस्जिद की सबसे बड़ी खूबी इसका ऊंचा चबूतरा है, जिसकी वजह से यह दूर से ही नजर आ जाती है और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। इसकी भव्य बनावट और मजबूत निर्माण आज भी मध्यकालीन इंजीनियरिंग की मिसाल माने जाते हैं। यही कारण है कि जौनपुर आने वाले पर्यटकों की सूची में यह मस्जिद हमेशा ऊपर रहती है।

इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं का ठिकाना

सदियों पुरानी यह मस्जिद आज भी शर्की शासनकाल की गौरवगाथा बयां करती है। इसकी दीवारों, मेहराबों और विशाल प्रांगण में उस दौर की स्थापत्य कला साफ झलकती है। यही वजह है कि इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग और शोधकर्ता इस धरोहर को करीब से देखने और समझने के लिए यहां पहुंचते रहते हैं।

शाही पुल के साथ जौनपुर की दूसरी पहचान

जौनपुर की पहचान सिर्फ शाही पुल तक सीमित नहीं है, जामा मस्जिद भी इस शहर के गौरव का अहम हिस्सा है। अपनी ऊंचाई, विशालता और ऐतिहासिक महत्व की बदौलत यह शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। हर साल हजारों पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचकर इसकी भव्यता को करीब से निहारते हैं।

एएसआई के संरक्षण में सुरक्षित है धरोहर

जौनपुर की यह ऐतिहासिक जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। इसके रखरखाव और संरक्षण का काम नियमित तौर पर किया जाता है। यह इमारत सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि भारतीय विरासत की भी एक अनमोल कड़ी है।

जौनपुर जाएं तो इस भव्य इमारत को जरूर देखें

अगर आप जौनपुर घूमने की योजना बना रहे हैं तो शहर की सबसे ऊंची और ऐतिहासिक जामा मस्जिद यानी बड़ी मस्जिद का दीदार जरूर करें। शर्की काल में बनी यह भव्य मस्जिद अपनी विशाल वास्तुकला, ऊंचे चबूतरे और ऐतिहासिक अहमियत के लिए जानी जाती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की अनूठी नक्काशी और स्थापत्य कला देखने के लिए पहुंचते हैं। यह मस्जिद जौनपुर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की अनमोल पहचान बनी हुई है।

सवाल-जवाब

जौनपुर की जामा मस्जिद स्थानीय तौर पर किस नाम से जानी जाती है?
इसे बड़ी मस्जिद के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसका प्रांगण, मुख्य द्वार और निर्माण बेहद विशाल है।
जामा मस्जिद का निर्माण किसके शासनकाल में शुरू हुआ था?
इतिहासकारों के मुताबिक इसका निर्माण इब्राहिम शाह शर्की के शासनकाल में शुरू हुआ था और बाद में इसे पूरा कराया गया।
मस्जिद की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
इसका ऊंचा चबूतरा सबसे बड़ी खासियत है, जिसकी वजह से यह दूर से ही नजर आ जाती है।
क्या जामा मस्जिद संरक्षित स्मारक है?
हां, यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है और इसकी नियमित देखभाल की जाती है।
यहां किस दिन सबसे ज्यादा भीड़ रहती है?
हर शुक्रवार यहां बड़ी संख्या में नमाजी नमाज अदा करने पहुंचते हैं।
जौनपुर की पहचान में जामा मस्जिद के अलावा और क्या शामिल है?
जौनपुर की पहचान में शाही पुल भी शामिल है, लेकिन जामा मस्जिद भी शहर के गौरव का अहम हिस्सा मानी जाती है।
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