पोकेमॉन गो के लॉन्च से पहले आए पहले ट्रेलर में जो सीन सिर्फ एक सपना लग रहा था, वह दस साल बाद हकीकत बन गया। इस हफ्ते न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में हजारों ट्रेनर्स जुटे और उन्होंने चौक को घेरे बिलबोर्ड्स पर छाए विशालकाय मेगा म्यूटू Y से मुकाबला किया, यह सब मोबाइल गेम की 10वीं वर्षगांठ के जश्न का हिस्सा था।
मोबाइल गेमिंग की दुनिया बदलने वाला गेम
साल 2016 में लॉन्च होते ही नियांटिक का बनाया पोकेमॉन गो रातोंरात दुनियाभर में सनसनी बन गया था। यह एक मिश्रित रियलिटी गेम है, जिसमें खिलाड़ी अपने फोन कैमरे से असली सड़कों, पार्कों और लैंडमार्क्स पर निकलकर डिजिटल जीव पकड़ते हैं। लॉन्च के पहले ही महीने में इसे 13 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया। उसी साल इसने 23.2 करोड़ एक्टिव खिलाड़ियों का रिकॉर्ड बनाया और करीब 1 अरब डॉलर की कमाई की, जो उस दौर के किसी मोबाइल ऐप के लिए बेहद असाधारण आंकड़े थे।
इस गेम की खासियत सिर्फ इसकी शुरुआती लोकप्रियता नहीं, बल्कि इसका लंबे समय तक टिके रहना है। नियांटिक ने इसे दुनिया के पहले मोबाइल फॉरएवर गेम्स में से एक बनाने की कोशिश की थी, यानी ऐसा गेम जो हफ्तों नहीं बल्कि सालों तक खिलाड़ियों को बांधे रखे, और यह कोशिश काफी हद तक कामयाब रही। स्टेटिस्टा के मुताबिक खिलाड़ी अब तक इस गेम पर 6 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। पिछले साल दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल गेम पब्लिशरों में शामिल स्कोपली ने, जिसके पास मोनोपॉली गो जैसे गेम भी हैं, नियांटिक को 3.5 अरब डॉलर में खरीद लिया था।
दस साल पुराना वादा आखिरकार पूरा हुआ
पोकेमॉन गो के लॉन्च से पहले आए ट्रेलर में कई ऐसे फीचर्स दिखाए गए थे जो असल लॉन्च के वक्त गेम में मौजूद ही नहीं थे, जैसे दोस्तों के साथ पोकेमॉन का आदान-प्रदान करना और दूसरे ट्रेनर्स से लड़ाई लड़ना। उस वीडियो के आखिर में एक नाटकीय दृश्य था, जिसमें ट्रेनर्स टाइम्स स्क्वायर की तरफ बढ़ते दिख रहे थे और हर बिलबोर्ड पर खतरनाक म्यूटू के खिलाफ एक विशाल सामूहिक लड़ाई दिखाई गई थी। दस साल में दुनियाभर में हुए पोकेमॉन गो फेस्ट के तमाम आयोजनों के बावजूद, न तो नियांटिक और न ही बाद में स्कोपली ने कभी इस सीन को हूबहू दोहराया था, इस हफ्ते के वर्षगांठ इवेंट तक।
स्कोपली में प्रोडक्ट के वाइस प्रेसिडेंट माइकल स्टेरांका, जो 2017 से नियांटिक में पोकेमॉन गो पर काम कर रहे हैं, कहते हैं, "हमने खिलाड़ियों से इस गेम को लेकर कुछ वादे किए थे। अब 10 साल बाद, जब हम उस ट्रेलर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो लगता है कि हमने वहां किए गए ज्यादातर वादे सच में पूरे कर दिए हैं।"
टाइम्स स्क्वायर की उस रात की पूरी कहानी
इस इवेंट का न्योता न्यूयॉर्क शहर के पांचों बरो के 2,000 खिलाड़ियों को कम्युनिटी एंबेसडर्स के जरिए भेजा गया था। स्कोपली ने जानबूझकर इसे सिर्फ निमंत्रण वाला इवेंट रखा, ताकि दुनिया की सबसे व्यस्त जगहों में शुमार इस इलाके में भीड़ बेकाबू न हो जाए। स्कोपली में मार्केटिंग कम्युनिकेशंस के डायरेक्टर मार्क वैन लॉमेल के मुताबिक, न्योता पाने वाले खिलाड़ियों को सिर्फ इतना बताया गया था कि टाइम्स स्क्वायर के आसपास थीम आधारित रेड होने वाली हैं, उन्हें असली सरप्राइज का पता नहीं था।
शाम को एक तय वक्त पर गेम के अंदर नोटिफिकेशन भेजे गए, जिनमें टिकट वाले खिलाड़ियों से टाइम्स स्क्वायर पहुंचने को कहा गया। वहां पहुंचने पर पहले लाउड लग्जरी का लाइव EDM कॉन्सर्ट हुआ, उसके बाद आसपास की तमाम स्क्रीन्स पर मेगा म्यूटू Y छा गया और सामूहिक लड़ाई शुरू हो गई। आखिरकार जुटे हुए ट्रेनर्स ने मेगा म्यूटू Y को हरा दिया।
यह पूरा इवेंट पोकेमॉन की सभी आधिकारिक वेबसाइटों और सोशल चैनलों पर लाइवस्ट्रीम किया गया। इस वीकेंड एक अलग पोकेमॉन गो फेस्ट ग्लोबल वर्चुअल इवेंट के जरिए दुनियाभर के ट्रेनर्स भी वही मेगा म्यूटू Y वाला गेमप्ले खेल सकेंगे, बस टाइम्स स्क्वायर वाली स्क्रीन्स का अनुभव नहीं मिलेगा। वैन लॉमेल कहते हैं, "इस वीकेंड दुनियाभर में कोई भी इसे मुफ्त में खेल सकता है।"
एक दशक की कामयाबी, आंकड़ों की जुबानी
स्कोपली का कहना है कि पिछले दस सालों में 80 करोड़ से ज्यादा लोग पोकेमॉन गो खेल चुके हैं, और अब तक खिलाड़ी मिलकर 1 खरब से ज्यादा पोकेमॉन पकड़ चुके हैं। 2024 में गेम के 10 करोड़ से ज्यादा एक्टिव खिलाड़ी थे, और अकेले 2025 में इसने 1 अरब डॉलर की कमाई की। एक्टिव खिलाड़ी औसतन रोज करीब 45 मिनट गेम खेलते हैं, और अब तक सब खिलाड़ी मिलकर पोकेस्टॉप्स और पोकेमॉन की तलाश में 62 अरब मील से ज्यादा चल चुके हैं।
पोकेमॉन गो में गेम डेवलपमेंट की वाइस प्रेसिडेंट किम एडम्स बताती हैं कि कंपनी के कम्युनिटी एंबेसडर्स का नेटवर्क, यानी वे वेरिफाइड वॉलंटियर जो लोकल गेमिंग ग्रुप्स को संभालते और आयोजित करते हैं, दो साल पहले सिर्फ 50 लोगों का था, जो अब दुनियाभर में बढ़कर 3,000 से ज्यादा हो गया है।
लाइव इवेंट्स ही वह खासियत है जो पोकेमॉन गो को बाकी मोबाइल गेम्स से अलग बनाती है, और स्कोपली के मुताबिक 2024 में ऐसे इवेंट्स के लिए करीब 10 लाख टिकट बिके। कंपनी का कहना है कि पिछले साल से एंगेजमेंट में डबल डिजिट ग्रोथ देखी गई है, रोजाना खेलने का वक्त 10 फीसदी बढ़ा है और असल दुनिया में घूमने-फिरने की दर 29 फीसदी बढ़ी है।
हर सफर आसान नहीं रहा
एक साथ हजारों खिलाड़ियों को रेड में शामिल करना हमेशा आसान नहीं रहा। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन में काम करने वाले होवी रागुंटन, जो 2016 में गेम आने के बाद से इसे खेल रहे हैं, बताते हैं कि उन्हें 2017 में शिकागो में हुआ पहला पोकेमॉन गो फेस्ट याद है, जो सेल नेटवर्क ओवरलोड और सर्वर की गड़बड़ी की वजह से पूरी तरह फ्लॉप हो गया था। वे कहते हैं, "इन सालों में कंपनी ने काफी कुछ सीखा है।"
रागुंटन का इस गेम से नाता बाकी लोगों से कहीं गहरा है। उन्होंने पोकेमॉन गो खेलते हुए ही अपनी पत्नी से मुलाकात की और जून में एक पोकेमॉन गो इवेंट में उन्हें प्रपोज किया। उनका कहना है कि इस गेम ने उनकी जिंदगी बदल दी, क्योंकि टेक्सास से नौकरी के लिए शिकागो शिफ्ट होने के फौरन बाद उन्होंने इसे खेलना शुरू किया था। वे कहते हैं, "इस गेम ने मुझे लोगों से घुलने-मिलने में मदद की, इसने मुझे बाहर निकलने पर मजबूर किया, और मुझे यही सबसे ज्यादा पसंद है।"
काम के सिलसिले में बार-बार यात्रा करनी पड़ती है, इसलिए रागुंटन नियांटिक के वेफेरर प्रोग्राम में काफी वक्त देते हैं, जिसमें वे अमेरिका के दूर-दराज इलाकों के लोकल लैंडमार्क्स को वेस्टॉप्स के तौर पर नॉमिनेट करते हैं। ये नॉमिनेशन बाद में पोकेस्टॉप्स में बदल सकते हैं, जहां दूसरे खिलाड़ी जाकर इन-गेम आइटम इकट्ठा करते हैं। इस वॉलंटियर काम के लिए उन्हें पैसे नहीं मिलते, हालांकि बदले में कुछ इन-गेम फ्रीबीज जरूर मिल जाते हैं।
रागुंटन जैसे फैंस के जुटाए इस डेटा से स्कोपली के दूसरे गेम्स को भी बेहतर बनाने में मदद मिलती है, और एडम्स कहती हैं कि यही वजह है कि कंपनी कम्युनिटी फीडबैक को इतनी अहमियत देती है। वे कहती हैं, "इस तरह गेम में योगदान देने वाले इन तमाम लोगों के बिना हमारा कोई वजूद नहीं है, हम उन्हीं की सेवा में हैं।"
रागुंटन कहते हैं, "पोकेमॉन गो ने मुझे मानसिक तौर पर संभाले रखा है। मैं हमेशा बड़े एयरपोर्ट्स पर काम नहीं करता, मैं ऐसे एयरपोर्ट्स पर काम करता हूं जहां पैसेंजर फ्लाइट्स होती ही नहीं, वहां सिर्फ प्राइवेट फ्लाइट्स आती हैं, ये सब छोटे-छोटे कस्बों की सुनसान जगहें होती हैं। लेकिन पोकेमॉन गो हमेशा वहां साथ रहता है।"
अगली पीढ़ी के लिए बनता गेम
क्या 2036 में जब गेम की 20वीं वर्षगांठ होगी, तब भी पोकेमॉन गो इसी रफ्तार से चलता रहेगा, यह सवाल अभी खुला है, लेकिन स्टेरांका मानते हैं कि पोकेमॉन की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ने अब तक गेम की रफ्तार बनाए रखने में जरूर मदद की है। हालांकि उनका कहना है कि पिछले दस सालों में गेम ने जो असल जिंदगी की कम्युनिटीज खड़ी की हैं, वही इसे अगले दशक तक ले जाएंगी, इसीलिए कंपनी की योजना इन्हीं जगहों में निवेश जारी रखने और ज्यादा यादगार पल बनाने में मदद करने की है। वे कहते हैं कि आगे का सबसे अहम लक्ष्य पोकेमॉन गो को एक ऐसा गेम बनाए रखना है जो एक ही परिवार की कई पीढ़ियों को साथ जोड़े।
स्टेरांका बताते हैं, "मैं अपनी मां के साथ पार्क जाता हूं, जो अगले हफ्ते 70 साल की होने वाली हैं, अपनी पत्नी के साथ, और अपने दोनों बच्चों के साथ, जिनमें बड़ा साढ़े तीन साल का है, हम सब मिलकर पोकेमॉन गो खेलने का मजा ले सकते हैं। शायद अपवाद सिर्फ मेरा 6 महीने का बच्चा है।"
स्टेरांका कहते हैं कि यह मोबाइल गेम आज भी लोगों के लिए पोकेमॉन की पूरी दुनिया से जुड़ने का पहला जरिया बना हुआ है, और डेवलपमेंट में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हर उम्र के खिलाड़ियों को पसंद आने वाले फीचर्स बनाना है। उन्होंने यह नहीं बताया कि फ्रैंचाइजी के लिए आगे क्या आने वाला है, यह भी नहीं कि कंपनी दोबारा हार्डवेयर पर हाथ आजमाएगी या नहीं, लेकिन उनका कहना है कि अगर कोई भी टेक्नोलॉजी गेम के लिए वाकई मौजूं हो, तो उनके "वर्ल्ड क्लास" इंजीनियर उसे जरूर आजमाएंगे।
स्टेरांका कहते हैं, "हम सिर्फ टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए टेक्नोलॉजी नहीं अपनाना चाहते। लेकिन अगर हमें लगे कि किसी चीज से गेम बेहतर बन सकता है, अनुभव बेहतर हो सकता है, हमारे खिलाड़ियों के लिए इमर्शन बेहतर हो सकता है, तो हम उसमें निवेश करने और उसे आजमाने से पीछे नहीं हटेंगे।"
एडम्स कहती हैं कि द पोकेमॉन कंपनी के साथ दस साल के सम्मानजनक रिश्ते के बाद, और अब स्कोपली के मैनेजमेंट में आने के बाद, टीम भविष्य को लेकर खुद को "सुपरचार्ज्ड" महसूस करती है और अपनी सबसे बड़ी खासियत, यानी कम्युनिटी पर ही आगे भी दांव लगाने की योजना बना रही है।
एडम्स कहती हैं, "आज के वक्त में लोगों को अपनी जिंदगी में ज्यादा खुशी की जरूरत है। जिंदगी कई बार बहुत मुश्किल हो सकती है, और अगर मैं किराने की दुकान की लाइन में खड़ी हूं और कोई पोकेमॉन मेरा दिन खुशनुमा बना सकता है, तो मैं अकेली नहीं हूं जो ऐसा महसूस करती है। उनके लिए और हमारे लिए भी, यह सिर्फ एक गेम भर नहीं है।"











