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जयपुर के इस घर में 50 सालों से सहेजा जा रहा है भारतीय नोटों का अनोखा खजानाकल्चर
3 घंटे पहले· 1

जयपुर के इस घर में 50 सालों से सहेजा जा रहा है भारतीय नोटों का अनोखा खजाना

जयपुर के हवामहल बाजार स्थित राजा भट्ट की हवेली में रहने वाले 75 वर्षीय विष्णु कुमार भार्गव ने करीब 50 सालों में भारतीय नोटों का 500 से ज्यादा दुर्लभ नोटों का संग्रह तैयार किया है, जिसमें 786 और 667788 जैसे खास नंबर वाले नोट भी शामिल हैं.

मीरा जोशीमीरा जोशीरिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जयपुर सिर्फ अपने किलों और महलों के लिए नहीं, बल्कि यहां के लोगों द्वारा पीढ़ियों से सहेजी गई छोटी-छोटी विरासतों के लिए भी जाना जाता है। शहर की चारदीवारी में बसे हवामहल बाजार की राजा भट्ट की हवेली में रहने वाले विष्णु कुमार भार्गव पिछले करीब 50 सालों से एक ऐसा ही खजाना संजो रहे हैं, जिसमें आजादी के बाद से अब तक जारी हुए भारतीय नोटों का दुर्लभ संग्रह मौजूद है। उनके इस संग्रह को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक खासतौर पर जयपुर पहुंचते हैं।

पुश्तैनी शौक से बना अनमोल खजाना

75 वर्षीय भार्गव बताते हैं कि उनके परिवार में पुराने सिक्के, स्टाम्प पेपर, डाक टिकट, बही-खाते और नोट संजोने की परंपरा वर्षों पुरानी है और उन्होंने इसे अपने पूर्वजों से आगे बढ़ाया है। यही वजह है कि आज उनके पास भारतीय मुद्रा के 500 से अधिक दुर्लभ नोटों का संग्रह मौजूद है, जिसे इतनी बारीकी से देख पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं। यह हवेली अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि भारतीय नोटों के इतिहास की एक छोटी सी गैलरी बन चुकी है, जहां हर नोट अपने साथ एक अलग दौर की कहानी लेकर आता है।

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एक रुपये से हजार रुपये तक, हर नोट में छिपी एक कहानी

भार्गव के मुताबिक दुनिया के हर देश की करंसी अपने भीतर एक अलग इतिहास समेटे रहती है और भारत भी इसमें अलग नहीं है। उनके संग्रह में एक रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक, अलग-अलग दौर में चलन में रहे नोट मौजूद हैं। उनका कहना है कि भारतीय नोट हमेशा से अपनी खूबसूरत डिजाइन, प्रतीक चिन्हों और भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले चित्रों के लिए पहचाने जाते रहे हैं। समय बीतने के साथ नोटों में लगी सुरक्षा तकनीक भी बदलती गई, जिससे नकली नोटों को पकड़ना पहले से आसान हुआ है। भार्गव वर्ष 1950 से लगातार यह संग्रह तैयार कर रहे हैं, जिसमें फैंसी नोट, अलग-अलग नंबर सीरीज वाले नोट और एक ही मूल्य वर्ग के कई अलग-अलग संस्करण शामिल हैं। हालांकि कुछ दुर्लभ नोट आज भी उनके संग्रह में शामिल नहीं हो पाए हैं, लेकिन वह अब भी चलन में आने वाले हर नए और अलग नंबर वाले नोट पर बारीकी से नजर रखते हैं और कोई खास नोट मिलते ही उसे फौरन अपने संग्रह का हिस्सा बना लेते हैं।

786 और 667788 जैसे नंबरों वाले नोट बने सबसे बड़ी पहचान

साल 1950 के बाद केंद्र सरकार ने समय-समय पर कई नए नोट जारी किए, जिन पर भारतीय किसान, ऐतिहासिक इमारतों और देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी तस्वीरें छापी गईं। भार्गव के संग्रह की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें 667788 जैसी डबल डिजिट नंबर सीरीज और 786 जैसे विशेष अंकों वाले कई दुर्लभ नोट शामिल हैं। ऐसे खास नंबर वाले नोटों की बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है और कई लोग इन्हें हासिल करने के लिए मोटी रकम चुकाने को भी तैयार रहते हैं।

पैसों से नहीं, विरासत के लिहाज से आंकते हैं अपने नोट

इतनी मोटी रकम मिलने के प्रस्तावों के बावजूद भार्गव इन नोटों को बेचने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ कागज के नोट नहीं, बल्कि भारतीय मुद्रा की विरासत हैं, जिन्हें वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखना चाहते हैं। यही वजह है कि उनका यह अनोखा संग्रह देखने के लिए जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक और भारतीय करंसी के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग बड़ी संख्या में राजा भट्ट की हवेली तक पहुंचते हैं और घंटों इस खजाने को निहारते हैं।

इसका आप पर असर

अगर आपके घर में भी पुराने नोट या सिक्के रखे हैं, तो यह खबर आपके काम की है.

  • भारत में: 786 या 667788 जैसी खास नंबर सीरीज वाले पुराने नोटों की कलेक्टरों के बीच अच्छी मांग रहती है और लोग इनके बदले बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं, इसलिए घर में रखे पुराने नोट फेंकने से पहले उनके नंबर जरूर जांच लें.
  • जयपुर में: शहर घूमने आने वाले पर्यटक अब हवामहल बाजार की राजा भट्ट की हवेली में यह अनोखा संग्रह भी देख सकते हैं, जिससे जयपुर की सांस्कृतिक विरासत में एक और आकर्षण जुड़ता है.

प्रेरणा और सीख

विष्णु कुमार भार्गव की कहानी बताती है कि धैर्य और लगन से एक साधारण शौक भी अनमोल विरासत बन सकता है.

  • परिवार से मिली परंपरा को उन्होंने खुद आगे बढ़ाया और उसे एक पहचान दी.
  • 1950 से लगातार, बिना रुके संग्रह करते रहने की उनकी निरंतरता ही इसे इतना खास बनाती है.
  • दुर्लभ नोटों के लिए बड़ी रकम के प्रस्ताव मिलने पर भी उन्होंने पैसों से ज्यादा विरासत को तवज्जो दी.
  • हर नए और अलग नंबर वाले नोट पर नजर रखने की उनकी बारीक निगरानी बताती है कि किसी भी काम में सफलता के लिए निरंतर सतर्कता जरूरी है.
  • वह अपनी मेहनत से जुटाई गई विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहते हैं, जो बताता है कि असली संग्रह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि आगे बांटने के लिए होता है.

सवाल-जवाब

विष्णु कुमार भार्गव कौन हैं?
वह जयपुर के हवामहल बाजार स्थित राजा भट्ट की हवेली में रहने वाले 75 वर्षीय संग्रहकर्ता हैं, जो पिछले करीब 50 सालों से भारतीय नोटों का संग्रह कर रहे हैं.
उनके संग्रह में कितने नोट हैं?
उनके पास भारतीय मुद्रा के 500 से अधिक दुर्लभ नोटों का संग्रह है.
इस संग्रह के सबसे खास नोट कौन से हैं?
667788 जैसी डबल डिजिट सीरीज और 786 जैसे विशेष नंबर वाले नोट इस संग्रह की सबसे बड़ी खासियत हैं.
उन्होंने संग्रह करना कब शुरू किया?
उन्होंने वर्ष 1950 से लगातार यह संग्रह तैयार करना शुरू किया.
वह अपने दुर्लभ नोट बेचते क्यों नहीं?
उनका मानना है कि ये सिर्फ नोट नहीं बल्कि भारतीय मुद्रा की विरासत हैं, जिन्हें वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं.
उनके संग्रह में नोटों के अलावा और क्या शामिल है?
इसमें पुराने सिक्के, स्टाम्प पेपर, डाक टिकट और बही-खाते भी शामिल हैं.
इस संग्रह को देखने कौन पहुंचता है?
देश-विदेश से पर्यटक और भारतीय करंसी के इतिहास में रुचि रखने वाले लोग खासतौर पर इसे देखने पहुंचते हैं.
मीरा जोशी
लेखक के बारे मेंमीरा जोशीरिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता जम्मू-कश्मीर
विशेषज्ञतारिश्ते, मानसिक स्वास्थ्य, वेलनेस, लाइफस्टाइल, डेटिंग, विवाह, भावनात्मक कल्याण, आत्म-विकास, माइंडफुलनेस, वर्क-लाइफ बैलेंस

मीरा जोशी एक रिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता हैं जो आधुनिक रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य, लाइफस्टाइल और व्यक्तित्व विकास को कवर करती हैं। वे भावनात्मक स्वास्थ्य और मानवीय जुड़ाव पर सूझबूझ भरी कहानियाँ लिखती हैं।

मीरा जोशी एक रिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता हैं जो रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित लाइफस्टाइल पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखती हैं। वे आधुनिक डेटिंग, विवाह, संवाद, आत्म-विकास, माइंडफुलनेस और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे विषय कवर करती हैं। संवेदनशील और शोध-आधारित नज़रिये के साथ मीरा मानवीय रिश्तों के मनोवैज्ञानिक व सामाजिक पहलुओं की पड़ताल करती हैं और पाठकों को व्यावहारिक अंतर्दृष्टि व सहज दृष्टिकोण देती हैं। उनकी रिपोर्टिंग का मक़सद पाठकों को भावनात्मक चुनौतियों से निपटने, स्वस्थ रिश्ते बनाने और आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में समग्र कल्याण बेहतर करने में मदद करना है।

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