जयपुर सिर्फ अपने किलों और महलों के लिए नहीं, बल्कि यहां के लोगों द्वारा पीढ़ियों से सहेजी गई छोटी-छोटी विरासतों के लिए भी जाना जाता है। शहर की चारदीवारी में बसे हवामहल बाजार की राजा भट्ट की हवेली में रहने वाले विष्णु कुमार भार्गव पिछले करीब 50 सालों से एक ऐसा ही खजाना संजो रहे हैं, जिसमें आजादी के बाद से अब तक जारी हुए भारतीय नोटों का दुर्लभ संग्रह मौजूद है। उनके इस संग्रह को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक खासतौर पर जयपुर पहुंचते हैं।
पुश्तैनी शौक से बना अनमोल खजाना
75 वर्षीय भार्गव बताते हैं कि उनके परिवार में पुराने सिक्के, स्टाम्प पेपर, डाक टिकट, बही-खाते और नोट संजोने की परंपरा वर्षों पुरानी है और उन्होंने इसे अपने पूर्वजों से आगे बढ़ाया है। यही वजह है कि आज उनके पास भारतीय मुद्रा के 500 से अधिक दुर्लभ नोटों का संग्रह मौजूद है, जिसे इतनी बारीकी से देख पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं। यह हवेली अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि भारतीय नोटों के इतिहास की एक छोटी सी गैलरी बन चुकी है, जहां हर नोट अपने साथ एक अलग दौर की कहानी लेकर आता है।
एक रुपये से हजार रुपये तक, हर नोट में छिपी एक कहानी
भार्गव के मुताबिक दुनिया के हर देश की करंसी अपने भीतर एक अलग इतिहास समेटे रहती है और भारत भी इसमें अलग नहीं है। उनके संग्रह में एक रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक, अलग-अलग दौर में चलन में रहे नोट मौजूद हैं। उनका कहना है कि भारतीय नोट हमेशा से अपनी खूबसूरत डिजाइन, प्रतीक चिन्हों और भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले चित्रों के लिए पहचाने जाते रहे हैं। समय बीतने के साथ नोटों में लगी सुरक्षा तकनीक भी बदलती गई, जिससे नकली नोटों को पकड़ना पहले से आसान हुआ है। भार्गव वर्ष 1950 से लगातार यह संग्रह तैयार कर रहे हैं, जिसमें फैंसी नोट, अलग-अलग नंबर सीरीज वाले नोट और एक ही मूल्य वर्ग के कई अलग-अलग संस्करण शामिल हैं। हालांकि कुछ दुर्लभ नोट आज भी उनके संग्रह में शामिल नहीं हो पाए हैं, लेकिन वह अब भी चलन में आने वाले हर नए और अलग नंबर वाले नोट पर बारीकी से नजर रखते हैं और कोई खास नोट मिलते ही उसे फौरन अपने संग्रह का हिस्सा बना लेते हैं।
786 और 667788 जैसे नंबरों वाले नोट बने सबसे बड़ी पहचान
साल 1950 के बाद केंद्र सरकार ने समय-समय पर कई नए नोट जारी किए, जिन पर भारतीय किसान, ऐतिहासिक इमारतों और देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी तस्वीरें छापी गईं। भार्गव के संग्रह की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें 667788 जैसी डबल डिजिट नंबर सीरीज और 786 जैसे विशेष अंकों वाले कई दुर्लभ नोट शामिल हैं। ऐसे खास नंबर वाले नोटों की बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है और कई लोग इन्हें हासिल करने के लिए मोटी रकम चुकाने को भी तैयार रहते हैं।
पैसों से नहीं, विरासत के लिहाज से आंकते हैं अपने नोट
इतनी मोटी रकम मिलने के प्रस्तावों के बावजूद भार्गव इन नोटों को बेचने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ कागज के नोट नहीं, बल्कि भारतीय मुद्रा की विरासत हैं, जिन्हें वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखना चाहते हैं। यही वजह है कि उनका यह अनोखा संग्रह देखने के लिए जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक और भारतीय करंसी के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोग बड़ी संख्या में राजा भट्ट की हवेली तक पहुंचते हैं और घंटों इस खजाने को निहारते हैं।











