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हैदराबाद के 5 लोकप्रिय स्थानों के बदले हुए नाम, जानें किन ऐतिहासिक कहानियों से जुड़े हैं ये बदलावकल्चर
31 अग॰ 2026, 12:19 pm (59 दिन पहले)· 3

हैदराबाद के 5 लोकप्रिय स्थानों के बदले हुए नाम, जानें किन ऐतिहासिक कहानियों से जुड़े हैं ये बदलाव

हैदराबाद के कई मशहूर स्थानों के नाम वक्त के साथ स्थानीय जुबान और बोलचाल के चलते बदल गए हैं। बाग़-ए-आम से लेकर शमशाबाद एयरपोर्ट तक, इन पांच जगहों के पीछे दिलचस्प इतिहास छिपा है।

दक्षिण भारत का प्रमुख शहर हैदराबाद सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों और महलों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां की गलियों और चौराहों पर रचे-बसे नामों का एक अलग ही इतिहास है। दशकों और सदियों के सफर में कई स्थानों के मूल नाम आम जनता की जुबान पर आते-आते नए रूपों में ढल गए। आज लोग इन जगहों को उनके दस्तावेजों वाले असली नाम की बजाय उस लहजे से पहचानते हैं जो स्थानीय संस्कृति ने उन्हें दिया है। पब्लिक गार्डन्स से लेकर कोरंटी दवाखाना तक, हर चर्चित नाम के पीछे हैदराबाद की तहज़ीब और भाषा का एक अनूठा संगम छिपा हुआ है। इन बदलावों को करीब से देखना दरअसल उस दौर की सैर करना है जब शहर की संस्कृति आकार ले रही थी।

बाग़-ए-आम से पब्लिक गार्डन्स बनने का सफर

शहर के बीचों-बीच स्थित जिस बड़े पार्क को आज हर कोई पब्लिक गार्डन्स के तौर पर जानता है, उसका मूल और ऐतिहासिक नाम बाग़-ए-आम है। इस खूबसूरत बगीचे का निर्माण कार्य 1864 से 1872 के कालखंड में पूरा हुआ था। उस समय रियासत के बाग़ और तफरीह के स्थान केवल शाही परिवारों, नवाबों और उच्च वर्ग के रईसों की पहुंच तक सीमित हुआ करते थे। इसके विपरीत बाग़-ए-आम की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसे आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया था। जैसे-जैसे समय बीता, इस नाम का अंग्रेजी रूपांतरण चलन में आ गया और लोग इसे पब्लिक गार्डन्स पुकारने लगे। वर्तमान समय में यह नाम इतना रच-बस चुका है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि इस हरी-भरी जगह का असली नाम बाग़-ए-आम था, जो उस ऐतिहासिक बदलाव की गवाही देता है जब शहर में पहली बार जनता को सार्वजनिक उद्यान का तोहफा मिला था।

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क्वारेंटाइन हॉस्पिटल से कैसे बना कोरंटी दवाखाना

स्थानीय बोलचाल में बदलाव का एक और बेहतरीन उदाहरण हैदराबाद का एक पुराना चिकित्सा संस्थान है। साल 1915 में जब महानगर में खतरनाक हैजा की बीमारी फैली थी, तब संक्रमित रोगियों को स्वस्थ आबादी से अलग रखने और महामारी को और फैलने से रोकने के वास्ते इस अस्पताल की स्थापना की गई थी। शुरुआत में इसे क्वारेंटाइन हॉस्पिटल नाम दिया गया था। हालांकि आम जनता की जुबान ने इस अंग्रेजी शब्द को अपने अंदाज में ढाल लिया और बोलते-बोलते क्वारेंटाइन शब्द कोरंटी में बदल गया। धीरे-धीरे लोगों ने इस अस्पताल को कोरंटी दवाखाना कहना शुरू कर दिया और यह नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि आज भी शहर के पुराने बाशिंदे इसे इसी नाम से याद रखते हैं। हालांकि इस ऐतिहासिक संस्थान का आधिकारिक नाम अब सर रोनाल्ड रॉस इंस्टीट्यूट है, लेकिन जनमानस में कोरंटी दवाखाना की पहचान आज भी उतनी ही गहरी है।

नुमाइश-ए-मसनूआत-ए-मुल्की से सिर्फ नुमाइश तक

सालभर में लगने वाली प्रसिद्ध वार्षिक प्रदर्शनी का पूरा और वास्तविक नाम नुमाइश-ए-मसनूआत-ए-मुल्की है, जिसका उर्दू में मतलब स्थानीय उत्पादों की नुमाइश होता है। आज के समय में इसे केवल नुमाइश कहकर पुकारा जाता है, लेकिन इसकी नींव के पीछे स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन देने की एक बड़ी पहल थी। साल 1938 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी के कुछ उत्साही विद्यार्थियों ने स्थानीय कला और दस्तकारी को बढ़ावा देने के इरादे से इस मेले का आगाज किया था। तत्कालीन हैदराबाद रियासत के सातवें निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान ने इस प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन किया था। वक्त के साथ इसका दायरा इतना फैला कि इसका लंबा पारंपरिक नाम छोटा होकर सिर्फ नुमाइश रह गया। आज यह आयोजन महानगर की संस्कृति का मुख्य स्तंभ बन चुका है और देश की चुनिंदा बड़ी प्रदर्शनियों में शुमार होता है।

राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और शमशाबाद की पहचान

शहर के सबसे बड़े विमानन केंद्र का आधिकारिक नाम राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। पुराने बेगमपेट हवाई अड्डे के भार को कम करने के लिए इसे साल 2008 में चालू किया गया था और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सम्मान में इसका यह नाम रखा गया। कागजी दस्तावेजों और सरकारी फाइलों में भले ही यही नाम दर्ज हो, लेकिन भौगोलिक स्थिति के कारण आम बोलचाल में इसे आज भी शमशाबाद एयरपोर्ट कहा जाता है। यह हवाई अड्डा शमशाबाद इलाके में स्थित है, जिस वजह से यह क्षेत्रीय नाम पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गया। स्थिति यह है कि शहर से बाहर के मुसाफिर भी इस जगह को इसी नाम से तलाशते हैं।

शहरान बाज़ार से शैरान मार्केट का दिलचस्प किस्सा

चारमीनार के करीब बसा शहरान बाज़ार हैदराबाद के प्राचीन बाजारों में शुमार है, जिसके नाम का शाब्दिक अर्थ शहरी बाजार है। समय के पहिए के साथ स्थानीय उच्चारण ने इसे बदलते हुए शैरान मार्केट के रूप में स्थापित कर दिया। इतिहास के पन्नों के मुताबिक, 1960 के दशक में इस क्षेत्र के व्यापारी बाहर से आयातित कपड़े और सौंदर्य प्रसाधन बड़े बक्से या पेटियों में रखकर बेचा करते थे। उस दौर में स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की पकड़ से बचने के लिए दुकानदारों को अपना सामान समेटकर फौरन भागना पड़ता था। बाजार की उसी भागदौड़ और आम बोलचाल के लहजे के बीच शहरान शब्द धीरे-धीरे शैरान बन गया। आज भी आधिकारिक दस्तावेजों में इसका पुराना नाम ही दर्ज है, लेकिन खरीदारी करने वालों के बीच शैरान मार्केट ही सबसे ज्यादा मशहूर है।

सवाल-जवाब

पब्लिक गार्डन्स का मूल और ऐतिहासिक नाम क्या है?
पब्लिक गार्डन्स का मूल और ऐतिहासिक नाम बाग़-ए-आम है।
कोरंटी दवाखाना को पहले किस नाम से जाना जाता था?
इस संस्थान को वर्ष 1915 में हैजा फैलने के दौरान क्वारेंटाइन हॉस्पिटल के रूप में स्थापित किया गया था।
वार्षिक नुमाइश की शुरुआत किसने की थी?
इस प्रदर्शनी की शुरुआत वर्ष 1938 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा की गई थी।
राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट कहां स्थित है?
यह हवाई अड्डा हैदराबाद के शमशाबाद क्षेत्र में स्थित है।
शैलान या शैरान मार्केट का पुराना नाम क्या है?
इस बाजार का मूल नाम शहरान बाज़ार है।
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