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5 सितंबर के कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, रोक लगाने से इनकारदिल्ली
31 अग॰ 2026, 1:48 pm (54 मिनट पहले)· 2

5 सितंबर के कॉकरोच जनता पार्टी के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, रोक लगाने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा निकाले जाने वाले प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से आगामी 5 सितंबर को एक बार फिर से विरोध प्रदर्शन और मार्च का ऐलान किया गया है। इस पूरे मामले को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। हालांकि शीर्ष अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रस्तावित मार्च पर किसी भी तरह की रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत का यह रुख साफ करता है कि फिलहाल न्यायिक हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं समझी गई है।

कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखना पूरी तरह से सरकार का दायित्व है। अदालत ने यह भरोसा भी जताया कि सरकार और प्रशासन देश के संविधान तथा कानून के दायरे में रहकर ही अपने सभी कदम उठाएंगे। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ कर रही थी। पीठ ने साफ किया कि इस स्तर पर उनके सामने ऐसा कोई भी ठोस आधार या कारण मौजूद नहीं है, जिससे यह माना जा सके कि मार्च के दौरान कुछ अप्रिय या गलत होगा।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और अदालत के निर्देश

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना और अपनी बात रखना नागरिकों का बुनियादी अधिकार है। इसके साथ ही पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इस याचिका को सॉलिसिटर जनरल के सामने रखा जाए और मामले को पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ आगामी 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई गंभीर या चिंताजनक हालात पैदा होते हैं, तो संबंधित पक्ष तुरंत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, बशर्ते वह मामला अदालत के न्यायिक दायरे के अंतर्गत आता हो।

मार्च का रूट और पिछले आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने आगामी 5 सितंबर को राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने उन तमाम वादों को पूरा करने में नाकाम रही है, जिनके आधार पर कॉकरोच जनता पार्टी ने बीते 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर अपना 36 दिन लंबा आंदोलन समाप्त किया था। तय योजना के मुताबिक, यह प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होगा और इसका समापन दिल्ली पुलिस मुख्यालय की तरफ मार्च करते हुए होगा।

पीड़ित परिवारों के हाथों में होगी मार्च की कमान

इस आगामी मार्च की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका नेतृत्व वे लोग करेंगे जो सीधे तौर पर प्रभावित रहे हैं। इस मार्च की कमान नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों और पुलिस कार्रवाई का शिकार हुए लोगों के परिवारों के हाथों में होगी। इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी ने देश में एक नया अभियान शुरू करने का भी ऐलान किया है, जिसके तहत क्या बोलती पब्लिक नाम से नई मुहिम चलाई जाएगी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर के मार्च पर क्या फैसला दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
इस मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने की।
कॉकरोच जनता पार्टी यह मार्च क्यों निकाल रही है?
पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कराते वक्त किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।
मार्च का रूट क्या तय किया गया है?
यह प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय की तरफ जाएगा।
इस मार्च का नेतृत्व कौन करेगा?
मार्च का नेतृत्व नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों और पुलिस कार्रवाई के शिकार लोगों के परिवार करेंगे।
मामला अगली बार सुनवाई के लिए कब आएगा?
अदालत ने मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ 10 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
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