राजस्थान के सीकर जिले में रबी फसलों की बुवाई से ठीक पहले किसानों और कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। स्थानीय बिजली निगम ने लंबे समय से निर्माण के दौर से गुजर रहे 7 नए कमर्शियल सोलर प्लांट को सफलतापूर्वक ग्रिड से जोड़कर शुरू कर दिया है। इन नए संयंत्रों के चालू होने से जिले में प्रतिदिन लगभग 57 हजार यूनिट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होने लगा है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई की भारी मांग शुरू होने से पहले स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और निर्बाध बिजली आपूर्ति की उम्मीद जगी है।
पीएम कुसुम और सूर्य घर योजना से 12 लाख यूनिट का उत्पादन
जिले में 7 नए सौर ऊर्जा संयंत्रों के जुड़ने के बाद पीएम कुसुम योजना के कुसुम-ए और कुसुम-सी घटकों के अंतर्गत बिजली तैयार करने वाले कुल सोलर प्लांटों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। इन सभी 73 संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता लगभग 130 मेगावाट दर्ज की गई है। वर्तमान में इन प्लांटों से रोजाना करीब 7.80 लाख यूनिट सौर ऊर्जा ग्रिड को उपलब्ध कराई जा रही है। इससे बिजली निगम को स्थानीय स्तर पर भारी मात्रा में स्वच्छ ऊर्जा मिल रही है।
वाणिज्यिक प्लांटों के अलावा घरेलू छतों पर लगी सोलर प्रणालियां भी ऊर्जा उत्पादन में बड़ा योगदान दे रही हैं। पीएम सूर्य घर योजना के तहत सीकर में अब तक 19,500 से अधिक मकानों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 70 मेगावाट है। इन रूफटॉप प्रणालियों से रोजाना औसतन 4.20 लाख यूनिट बिजली उत्पन्न हो रही है। इस तरह पीएम कुसुम योजना के 7.80 लाख यूनिट और पीएम सूर्य घर योजना के 4.20 लाख यूनिट मिलाकर सीकर जिले को हर दिन कुल 12 लाख यूनिट सौर ऊर्जा प्राप्त हो रही है।
रबी सीजन की भारी मांग और लोकल ग्रिड को मजबूती
रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई के दौरान कृषि फीडरों पर बिजली की मांग में भारी उछाल आता है। आंकड़ों के मुताबिक, सीकर जिले में रबी सीजन के दौरान किसानों को खेतों में पानी लगाने और ट्यूबवेल चलाने के लिए रोजाना करीब 125 लाख यूनिट बिजली की दरकार रहती है। जब पूरे क्षेत्र में एक साथ लोड बढ़ता है, तो दूरस्थ पावर स्टेशनों से आने वाली बिजली की वजह से ग्रामीण फीडरों पर वोल्टेज डाउन होने और बार-बार ट्रिपिंग या अघोषित कटौती की नौबत आ जाती है।
स्थानीय स्तर पर सोलर प्लांट से बिजली उत्पादन बढ़ने से वितरण प्रणाली पर लोड काफी कम हो जाता है। सोलर प्लांट नजदीकी जीएसएस (ग्रिड सब-स्टेशन) से जुड़े होते हैं, जिससे दूर-दराज के पावर प्लांट से बिजली खींचने की निर्भरता खत्म हो जाती है। जब ग्रिड सब-स्टेशन पर स्थानीय स्तर पर ही बिजली उपलब्ध होती है, तो ट्रांसफार्मर पर दबाव घटता है। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और किसानों को सिंचाई के समय स्थिर वोल्टेज के साथ बेहतर आपूर्ति मिल सकेगी।
नये सोलर प्रोजेक्ट्स की लोकेशन और भविष्य का विस्तार योजना
हाल ही में चालू किए गए 7 नए सोलर प्लांट की क्षमता और स्थान का विवरण भी सामने आया है। इनमें बेरी क्षेत्र में 2-2 मेगावाट क्षमता के 2 अलग-अलग सोलर प्लांट चालू हुए हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 24 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा किरोड़ोली में 15 मेगावाट का बड़ा प्लांट शुरू हुआ है। वहीं छोटी लोसल, सिहोट, भारनी और भगेगा में 1-1 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं। इन सातों प्लांटों को मिलाकर ग्रिड में हर दिन 57 हजार यूनिट बिजली का इजाफा हो रहा है।
सीकर बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता (SE) सुभाष देवंदा ने बताया कि जिले में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की योजना पर काम जारी है। गुंगारा क्षेत्र में 2 नए सोलर प्लांट लगाने की तैयारी अपने अंतिम चरण में है और इस चालू महीने के अंत तक उनके शुरू होने की पूरी संभावना है। गुंगारा के इन दो प्लांटों से रोजाना लगभग 25 हजार यूनिट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद है। आमतौर पर 1 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट प्रतिदिन औसतन 6 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन करता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सीकर का स्थानीय बिजली उत्पादन नए कीर्तिमान कायम करेगा।


















