18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंच गए। उनका विशेष विमान पालम हवाई अड्डे पर उतरा। पिछले सात वर्षों में चीनी राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है, क्योंकि इससे पहले वे साल 2019 में भारत आए थे। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद दोनों एशियाई ताकतों के रिश्तों में जो कड़वाहट आई थी, उसके बाद इस यात्रा को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
भारत मंडपम में जुटेंगे नेता, शाम को होगी मोदी और शी की मुलाकात
पालम हवाई अड्डे पर उतरने के बाद चीनी राष्ट्रपति का काफिला सम्मेलन स्थल भारत मंडपम के लिए रवाना होगा। इस 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सभी की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली आमने-सामने की द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार दोनों शीर्ष नेताओं की यह हाई-लेवल मुलाकात आज शाम 5 बजकर 45 मिनट पर होगी। राजनयिक स्तर पर इसे इस पूरे सम्मेलन की सबसे अहम और प्रभावशाली तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है।
दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में जटिल वैश्विक मुद्दों पर मंथन
यह महत्वपूर्ण ब्रिक्स सम्मेलन 12 सितंबर और 13 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। ग्यारह सदस्यीय यह अंतरराष्ट्रीय समूह ऐसे समय में बैठक कर रहा है जब पूरी दुनिया कई गंभीर संकटों से जूझ रही है। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट, यूक्रेन में जारी सैन्य संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े तनाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसी अहम चुनौतियां शामिल हैं, जिन पर सभी सदस्य देश गहन विचार-विमर्श करेंगे।
गलवान गतिरोध के बाद रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश
चीनी राष्ट्रपति का यह दौरा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। साल 2020 की गलवान झड़प के बाद से दोनों पक्षों के बीच गहरा तनाव बना रहा है। भारत लगातार अपने इस रुख पर अडिग रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में अमन, शांति और स्थिरता बहाल किए बिना दोनों देशों के आपसी रिश्ते सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ सकते। इससे पहले बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संक्षिप्त संवाद हुआ था। अब नई दिल्ली के इस मंच पर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत और ठोस द्विपक्षीय बातचीत की उम्मीद जताई जा रही है।
छह साल बाद बहाल होंगी सीधी उड़ानें, एयर कनेक्टिविटी पर बड़ा फैसला
शी जिनपिंग के भारत आगमन के साथ ही दोनों देशों के बीच आवागमन और व्यापारिक संपर्कों को सुधारने की दिशा में भी प्रगति देखने को मिली है। चीन की प्रमुख विमानन कंपनी चाइना साउदर्न एयरलाइंस 21 सितंबर से नई दिल्ली और ग्वांगझोउ के बीच सीधी यात्री उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू करने जा रही है। यह सीधी हवाई सेवा लगभग छह साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से चालू हो रही है। इससे पहले एयर इंडिया ने भी इसी साल फरवरी के महीने में नई दिल्ली से चीन के लिए अपनी उड़ान सेवाएं फिर से शुरू की थीं।
चाइना साउदर्न एयरलाइंस के मुताबिक, नई दिल्ली और ग्वांगझोउ के बीच इस रूट के शुरू होने से दक्षिण एशिया क्षेत्र में उसकी सेवाएं आठ राउंड-ट्रिप मार्गों पर हर हफ्ते 100 से अधिक उड़ानों तक पहुंच जाएंगी। उल्लेखनीय है कि ग्वांगझोउ चीन का एक विशाल व्यापारिक और विनिर्माण केंद्र है, जिससे इस सीधी विमान सेवा का सीधा फायदा दोनों देशों के आपसी व्यापार, कारोबारी यात्राओं और दक्षिणी चीन के साथ भारत के वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने में मिलेगा।


















