दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 12 अगस्त को दिल्ली मास्टर प्लान 2047 को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी में लंबी दूरी की आवाजाही को सुगम बनाना और सड़कों पर गाड़ियों के बढ़ते दबाव को कम करना है। मास्टर प्लान में पारंपरिक सड़कों और ओवरक्रौडेड मेट्रो नेटवर्क से इतर नए जमाने के उन्नत परिवहन साधनों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
हवाई टैक्सी और जलमार्ग: मास्टर प्लान 2047 की मुख्य रूपरेखा
डीडीए द्वारा स्वीकृत इस नए प्लान के तहत दिल्ली के आसमान और जलक्षेत्र दोनों का उपयोग यातायात के लिए करने की योजना बनाई गई है। सड़कों पर निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने के लिए एयर टैक्सी और एयर पॉड्स जैसे आधुनिक साधनों का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, योजना में यमुना नदी, साहिबी नाले और स्थानीय नहरों के पानी वाले रास्तों का विकास भी शामिल है। भविष्य में इन जलमार्गों पर नावों और स्टीमरों का संचालन करके लोगों को सड़कों के भारी ट्रैफिक से राहत दिलाने की तैयारी है।
65 से 75 किलोमीटर का पायलट रूट और समय की बचत
फरवरी 2026 में सीआईआई द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इस हवाई योजना को जमीन पर उतारने के लिए एक पायलट रूट का सुझाव दिया गया था। यह प्रस्तावित रूट लगभग 65 से 75 किलोमीटर लंबा है, जो गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर हवाई अड्डे जैसे प्रमुख व्यावसायिक व परिवहन केंद्रों को आपस में जोड़ेगा। इस हवाई कॉरिडोर के चालू होने से जो सफर सड़कों पर तय करने में घंटों लगते हैं, वह घटकर 30 मिनट से भी कम समय में पूरा हो सकेगा। रिपोर्ट में इमारतों की छतों पर लैंडिंग पॉइंट बनाने और शुरुआती चरण में ड्रोन के जरिए सामान व मेडिकल सेवाएं पहुंचाने की बात कही गई है।
किराया, 20 वर्षों की समयसीमा और विशेषज्ञों का आकलन
हालांकि अभी एयर टैक्सी का विस्तृत ब्लू प्रिंट और बजट तैयार नहीं हुआ है, लेकिन इसके आर्थिक ढांचे को लेकर खाका साफ है। यह हवाई सफर सामान्य प्लेन टिकट से काफी सस्ता होगा, जबकि सड़कों पर चलने वाली कैब की तुलना में थोड़ा महंगा रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे बदलाव को बड़े पैमाने पर साकार होने में लगभग 20 सालों का समय लगेगा। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि एयर टैक्सी आम नागरिकों की रोजमर्रा की यात्रा का मुख्य साधन नहीं बनेगी। दिल्ली में अधिकतर सफर लगभग 5 किलोमीटर की दूरी के होते हैं, जबकि हवाई यात्रा केवल लंबी दूरी और हवाई अड्डे जैसे विशिष्ट गंतव्यों के लिए ही व्यावहारिक और किफायती साबित होती है।
एकीकृत परिवहन नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय तुलना
मास्टर प्लान 2047 में नए साधनों को मौजूदा यातायात प्रणाली के साथ एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें बस रूटों में सुधार करना, यात्रियों की सुविधा के लिए एक ही टिकट से विभिन्न साधनों में सफर करने की व्यवस्था लागू करना और मेट्रो स्टेशन व एयरपोर्ट के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना शामिल है। जिस तरह दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में एयर टैक्सी की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, उसी तर्ज पर दिल्ली भी भविष्य में इस आधुनिक तकनीक का गवाह बन सकती है, हालांकि इसे लागू करने में कई बुनियादी चुनौतियां भी मौजूद हैं।


















