बिहार राज्य के मधुबनी और पूरे मिथिलांचल क्षेत्र की खान-पान परंपरा में कई ऐसे विशिष्ट पकवान शामिल हैं जो अपने अनोखे स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय और पारंपरिक नाम है घोरजौर। पहली नजर में देखने पर यह डिश बिल्कुल मीठी चावल की खीर की तरह नजर आती है। इसी वजह से कई लोग भ्रमवश इसे 'घोरजौर खीर' भी कह देते हैं। हालांकि, असलियत में यह कोई मीठा व्यंजन नहीं है। यह दही और मट्ठे के साथ चावल मिलाकर बनाई जाने वाली एक बेहद चटपटी, नमकीन और खट्टी-मीठी डिश है। यदि आप भी देसी और पारंपरिक जायके के शौकीन हैं तो यह व्यंजन आपकी थाली के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
सावन और पंचमी पर पारंपरिक रूप से बनती है यह डिश
मिथिला की रसोई में हाथों से घोरने की प्रक्रिया से बनने वाला यह व्यंजन स्वाद में कमाल का होता है। घोरजौर को विशेष अवसरों पर पकाने की पुरानी परंपरा रही है। खासतौर पर सावन के पवित्र महीने में या फिर पंचमी के समय घर-घर में इसे बड़े चाव से बनाया जाता है। लोग इसे दोपहर के भोजन में गर्म या सामान्य तापमान पर पकी हुई सब्जियों के साथ मिलाकर परोसते हैं। खीर में जहां दूध, चीनी और मेवों का भरपूर प्रयोग होता है, वहीं घोरजौर का मुख्य आधार दही, नमक और खास तड़का होता है जो इसके जायके को पूरी तरह से अलग पहचान देता है।
घोरजौर बनाने की पूरी रेसिपी
इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसे तैयार करने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर उबलते पानी में पकने के लिए चढ़ा दिया जाता है। जब चावल आधा पक जाता है, तब उसमें खूब सारी अच्छी तरह फेंटी हुई दही डाली जाती है। इसके साथ ही स्वाद के अनुसार नमक और संतुलन बनाने के लिए थोड़ी सी चीनी मिलाई जाती है। इस मिश्रण को धीमी आंच पर पकने दिया जाता है ताकि चावल और दही आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाएं।
तड़के से बढ़ता है दो गुना स्वाद और खट्टी दही का महत्व
घोरजौर का असली स्वाद इसके तड़के में छिपा होता है जिसके बिना यह अधूरी मानी जाती है। जब चावल और दही का मिश्रण पककर तैयार हो जाए, तब एक अलग बर्तन में तेल गरम करके उसमें जीरा, सूखी लाल मिर्च और तेज पत्ते का छौंक लगाया जाता है। इस गरमा-गरम तड़के को घोरजौर में मिलाते ही इसकी खुशबू और स्वाद दोनों दो गुना हो जाते हैं।
इस डिश को बनाने के लिए एक खास बात का ध्यान रखना जरूरी है। मिथिलांचल में इसे तैयार करने के लिए एकदम ताजी दही का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसकी जगह दो दिन पहले जमाई गई खट्टी दही ज्यादा बेहतर स्वाद देती है। यदि दही उपलब्ध न हो तो मट्ठे से भी इसे समान रूप से स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। 15 से 20 मिनट में बनने वाली यह आसान रेसिपी पारंपरिक देसी स्वाद चाहने वालों के लिए एक मस्ट-ट्राई पकवान है।



















