दिल्ली की एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) द्वारा दायर उस याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) उदित प्रकाश राय और तीन अन्य आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया गया है. यह पूरा मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवर शोधन संयंत्र (STP) प्रोजेक्ट्स की निविदा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ा हुआ है. विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कस्टडी से जुड़ी याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है.
कस्टडी की अर्जी और आरोपियों पर कार्रवाई
विशेष अदालत के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत करते हुए जांच एजेंसी ACB ने गिरफ्तार किए गए कुल छह आरोपियों में से पांच को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की. हालांकि, एजेंसी ने मामले में शामिल केवल एक आरोपी, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव की पुलिस कस्टडी मांगी है ताकि उनसे आगे की पूछताछ की जा सके. ACB ने इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन और पूर्व बोर्ड सीईओ उदित प्रकाश राय के अलावा चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए अन्य व्यक्तियों में पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव के साथ-साथ नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं.
सत्येंद्र जैन के वकील की अदालत में दलीलें
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से उपस्थित वकील ने ACB की कार्रवाई और गिरफ्तारी के औचित्य पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में प्राथमिक प्राथमिकी 10 मई 2024 को दर्ज की गई थी, लेकिन जांच एजेंसी ने उनके मुवक्किल को काफी लंबे समय बाद पहली बार 5 अगस्त 2026 को पूछताछ के लिए समन भेजा. इसके बाद मंगलवार को फोन करके उन्हें दूसरी बार बुलाया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया. बचाव पक्ष के वकील ने जोर देकर कहा कि गिरफ्तारी को न्यायसंगत ठहराने के लिए एजेंसी के पास कोई ठोस सामग्री या पर्याप्त आधार मौजूद नहीं है.
अन्य सह-आरोपियों का अदालत में पक्ष
पूर्व CEO उदित प्रकाश राय के कानूनी प्रतिनिधि ने भी अपने मुवक्किल की गिरफ्तारी को अदालत में चुनौती दी. उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि उदित प्रकाश राय वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर तैनात एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं और उनकी इस प्रकार गिरफ्तारी अनुचित है. इसके साथ ही मामले के अन्य आरोपियों नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा के वकीलों ने भी ACB द्वारा बताए गए गिरफ्तारी के आधारों पर सवाल उठाते हुए अपने मुवक्किलों का बचाव किया और हिरासत का विरोध किया.
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट में धांधली का मामला
यह मामला सतर्कता निदेशालय की एक शिकायत के आधार पर 11 मई 2024 को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया था. जांच का मुख्य केंद्र दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के विस्तार और अपग्रेडेशन से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में हुई बड़े पैमाने की कथित अनियमितताएं, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश है. ACB की जांच के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में ऐसी तकनीकी शर्तें और विशिष्टताएं शामिल की गई थीं जो सीधे तौर पर एक निजी कंपनी यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए तैयार की गई थीं. जांच एजेंसी का कहना है कि इस कदम से स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और एक खास निजी संस्था को गैर-कानूनी फायदा पहुंचाया गया.



















