दिल्ली से सटे हाई-टेक शहर नोएडा में गाड़ियों की बढ़ती गिनती अब आम लोगों की रोजमर्रा जिंदगी के साथ वातावरण पर भी भारी पड़ने लगी है। आधिकारिक परिवहन आंकड़ों के अनुसार शहर में पंजीकृत कुल वाहनों की संख्या 12,88,594 तक जा पहुंची है। सड़कों पर गाड़ियों की इस भारी मौजूदगी से प्रमुख रास्तों पर हर सुबह-शाम भयंकर ट्रैफिक जाम लग रहा है। इसके साथ ही पार्किंग की जगह कम पड़ने और हवा में घुलते धुएं के कारण प्रदूषण की समस्या भी विकराल रूप ले रही है।
निजी गाड़ियों का दबदबा और सड़कों पर दोपहिया वाहनों की भरमार
शहर के कुल वाहन बेड़े की पड़ताल करें तो पता चलता है कि सड़कों पर चलने वाली अधिकांश गाड़ियां लोगों की व्यक्तिगत आवाजाही के लिए हैं। नोएडा में सबसे बड़ी हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की है, जिनकी संख्या 7,36,501 दर्ज की गई है। इसके अलावा 4,05,307 व्यक्तिगत चार पहिया वाहन यानी कारें पंजीकृत हैं। यदि केवल इन दोनों श्रेणियों को मिला दिया जाए तो कुल आंकड़ा 11,41,808 गाड़ियों तक पहुंच जाता है। निजी सवारियों के इस भारी बोझ से आवासीय कॉलोनियों से लेकर मुख्य सड़कों तक पार्किंग और आवागमन की व्यवस्था चरमराने लगी है। व्यावसायिक इस्तेमाल की बात करें तो शहर में 31,817 माल ढोने वाले वाहन, 21,248 यात्री टैक्सियां और 18,343 ऑटो रिक्शा भी पंजीकृत होकर रोजाना सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
पेट्रोल वाहनों का वर्चस्व और वैकल्पिक ईंधन की स्थिति
ईंधन की खपत के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट दर्शाती है कि नोएडा में आज भी पारंपरिक पेट्रोल गाड़ियों का पूरी तरह बोलबाला है। कुल दर्ज 12,88,594 वाहनों में से अकेले पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की संख्या 9,55,149 है, जो कुल बेड़े का लगभग 74.1 प्रतिशत हिस्सा बनाती है। ईंधन की अन्य श्रेणियों में सीएनजी वाहनों की संख्या 1,37,400 है, जो कुल आंकड़े का करीब 10.7 प्रतिशत बनती है। वहीं 1,33,676 डीजल चालित वाहन पंजीकृत हैं, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 10.4 प्रतिशत है। हालांकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन भी शुरू हुआ है। नोएडा में अब तक 62,369 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए जा चुके हैं, जो कुल बेड़े का लगभग 4.8 प्रतिशत हिस्सा हैं। इनमें 28,023 ई-रिक्शा और 14,908 इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा शामिल हैं, जो हरित ईंधन की ओर बढ़ते रुझान की गवाही देते हैं।
सार्वजनिक परिवहन और अन्य उपयोगिता वाहनों की संख्या
शहर की विशाल आबादी को सेवाएं देने और बुनियादी गतिविधियों को संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक और विशेष वाहन भी सड़कों पर सक्रिय हैं। सरकारी और निजी बेड़े को मिलाकर कुल 4,571 बसें पंजीकृत हैं। स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए 2,102 स्कूल बसें दर्ज की गई हैं। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नोएडा में 636 एम्बुलेंस पंजीकृत हैं। कृषि और निर्माण कार्यों से जुड़ी गतिविधियों के लिए 11,537 कृषि ट्रैक्टर और माल ढुलाई के लिए 5,297 थ्री-व्हीलर गुड्स वाहन पंजीकृत हैं। इसके अतिरिक्त 3,290 व्यावसायिक दोपहिया वाहन और 5,014 अन्य श्रेणी के पंजीकृत वाहन भी शहर की सड़कों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सभी वाहनों के निरंतर परिचालन से नोएडा की ट्रैफिक व्यवस्था पर चौतरफा दबाव बन रहा है।
सालाना 10 प्रतिशत वृद्धि और भावी समाधान
परिवहन विभाग के विश्लेषकों का अनुमान है कि नोएडा में हर साल वाहनों की संख्या में 10 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यदि इसी रफ्तार से सड़कों पर गाड़ियां बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है। सड़कों पर 9.55 लाख से अधिक पेट्रोल चालित गाड़ियों की मौजूदगी जहरीले धुएं और कार्बन उत्सर्जन के रूप में पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पेश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को व्यापक स्तर पर मजबूत करना होगा। साथ ही सड़कों पर पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए अलग तथा सुरक्षित कॉरिडोर विकसित किए जाने की जरूरत है। 1.37 लाख से अधिक सीएनजी और 62,369 इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि शहर वैकल्पिक ईंधन अपनाने को तैयार है, लेकिन इसके लिए ई-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और तेजी से विस्तार देना होगा।



















