दिल्ली की एक अदालत ने साल 2020 में अपनी पत्नी की हत्या से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए एक व्यक्ति को दोषी करार दिया है। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह और परिवार के अन्य सदस्य अपने शुरुआती बयानों से पूरी तरह मुकर गए थे, लेकिन इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध चिकित्सा निष्कर्षों और ठोस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आधार बनाते हुए यह बड़ा फैसला दिया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि आरोपी घटना के वक्त कमरे में मौजूद था और इस बात का कोई भी संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में पूरी तरह नाकाम रहा कि आखिर उसकी पत्नी की मौत कैसे हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सीय साक्ष्य बने आधार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल ने नेब सराय थाने में दर्ज इस आपराधिक मुकदमे में फजरुद्दीन उर्फ ननवा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया है। अदालत ने अपने 13 अक्टूबर के आदेश में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि मामले में जिन परिस्थितियों को पूरी तरह साबित किया जा चुका है, वे आरोपी के बेकसूर होने की किसी भी गुंजाइश को सिरे से खारिज करती हैं और बिना किसी शक के उसके अपराध को स्थापित करती हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह अकाट्य तथ्य सामने आया था कि मृतका शमीना की मौत का असल कारण गला घोंटे जाने के चलते दम घुटना था।
घटना की पृष्ठभूमि और चिकित्सीय इलाज
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में रखे गए तथ्यों के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना 4 फरवरी 2020 को घटी थी। आरोपी फजरुद्दीन ने अपनी पत्नी शमीना की गला दबाकर हत्या कर दी थी। जिस समय यह वारदात हुई, वह जोड़ा शमीना की बहन के संगम विहार स्थित आवास पर रह रहा था। वे दोनों वहां पिछले लगभग एक हफ्ते से ठहरे हुए थे क्योंकि शमीना उस दौरान अपने गुर्दे की पथरी का चिकित्सकीय इलाज करवा रही थी और उसी सिलसिले में वहां मौजूद थी।
गवाहों के मुकरने के बाद भी कोर्ट का कड़ा रुख
शुरुआती दौर में इस पूरे मामले की नींव एक चश्मदीद गवाह का वह बयान था जिस पर पुलिस जांच टिकी हुई थी। मृतका के करीबी रिश्तेदार और इस मामले के शिकायतकर्ता मोहम्मद ताहिर ने पुलिस के सामने शुरुआती गवाही में दावा किया था कि उसने खुद आरोपी को शमीना के ऊपर सवार होकर उसका गला घोंटते हुए देखा था। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह ताहिर अदालत में इस बयान से पूरी तरह पलट गया। केवल वही नहीं, बल्कि शमीना की बहन, उसका भाई, भतीजा और भतीजी भी पुलिस के समक्ष दर्ज कराए गए अपने पुराने बयानों से मुकर गए।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़ी कड़ी
बचाव पक्ष की दलीलों और गवाहों के पलटने के बावजूद अदालत ने पाया कि घटना के समय घर के भीतर परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे और ऐसा नहीं था कि आरोपी की पीड़िता तक अकेले कोई पहुंच न हो। न्यायाधीश ने समीक्षा करते हुए माना कि जब तमाम परिस्थितियों को समग्र रूप से परखा जाता है, तो साबित हो चुके तथ्य आरोपी के निर्दोष होने की संभावनाओं को नेस्तनाबूद कर देते हैं। संतोषजनक जवाब न दे पाने और चिकित्सीय साक्ष्यों के मेल ने आरोपी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया।
























