पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और हिमालयी क्षेत्रों की रक्षा के प्रति जनमानस को जागरूक करने के उद्देश्य से एक बड़े अभियान की शुरुआत की गई है। इस मुहिम का नाम यूथ4 राइजिंग भारत-केदार ड्राइव 2026 रखा गया है, जिसके तहत राजधानी नई दिल्ली से लेकर केदारनाथ तक पर्यावरण बचाने का संदेश प्रसारित किया जाएगा। इस पहल से देश भर के युवाओं और स्वयंसेवकों को जोड़ने की बड़ी तैयारी है ताकि प्रकृति के प्रति लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सके।
शिवराज सिंह चौहान ने दिखाई हरी झंडी
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नई दिल्ली में इस अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संदेश दिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा को केवल सरकारी योजनाओं और कागजी बैठकों तक सीमित न रखकर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना है। अभियान के दौरान युवाओं को अधिक से अधिक पेड़ लगाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल न्यूनतम करने, कचरे का सही प्रबंधन करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
आरुषि निशंक के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा अभियान
इस पूरी मुहिम की कमान अभिनेत्री, निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता आरुषि निशंक के हाथों में है। उनके नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान का लक्ष्य 10 हजार से अधिक युवाओं और स्वयंसेवकों को पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम से जोड़ना है। आरुषि निशंक इससे पहले भी कई सामाजिक और पर्यावरणीय पहलों से जुड़ी रही हैं। वह स्पर्श गंगा अभियान की सह-संस्थापक होने के साथ-साथ प्लास्टिक से पुण्य पहल की भी संस्थापक हैं। उनके इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य नदियों को स्वच्छ रखना, प्लास्टिक के कचरे को कम करना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जवाबदेह बनाना रहा है।
सामूहिक जिम्मेदारी और हिमालय का महत्व
अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए आरुषि निशंक ने बताया कि यह केवल केदारनाथ की एक सामान्य यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय नागरिक और विशेषकर देश के युवाओं से पर्यावरण संरक्षण की कमान संभालने का एक गंभीर आह्वान है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र केवल हमारे देश का गौरव ही नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पारिस्थितिक जीवनरेखा भी है। इसकी नैसर्गिक सुंदरता, पवित्र नदियों, घने जंगलों और अनमोल जैव विविधता को बचाकर रखना हम सबका साझा कर्तव्य है। उनके अनुसार, इस अभियान के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक यह बात पहुंचाई जाएगी कि प्रकृति और हिमालय की रक्षा का दायित्व किसी एक व्यक्ति या विशेष संस्था का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का है।
देशभर के शिक्षण संस्थानों के युवा होंगे शामिल
इस महत्वाकांक्षी अभियान में देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों के शामिल होने की बात कही गई है। इनमें आईआईटी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, स्पर्श गंगा अभियान के कार्यकर्ता, विभिन्न सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और आम नागरिक भी इस यात्रा का हिस्सा बनेंगे। इस प्रकार कुल 10 हजार से ज्यादा युवाओं को जोड़कर पर्यावरण का संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की योजना है।
केदारनाथ धाम और पर्यावरणीय चुनौतियां
इस अभियान के लिए केदारनाथ को केंद्र में रखने के पीछे ठोस कारण हैं। केदारनाथ धाम में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के कारण हिमालयी क्षेत्रों में कचरे का प्रबंधन, प्लास्टिक की रोकथाम, प्राकृतिक स्रोतों की सुरक्षा और जिम्मेदार पर्यटन जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो जाते हैं। इस यात्रा के जरिए यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि हिमालय को सहेजने में हर तीर्थयात्री, पर्यटक और स्थानीय निवासी की अहम भूमिका है। यह पूरी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान और एक पेड़ मां के नाम जैसे प्रेरणादायक कार्यक्रमों से भी जुड़ी हुई है, जो सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देते हैं।
कला, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम
आरुषि निशंक का सफर केवल सामाजिक कार्यों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वह कला और सिनेमा की दुनिया में भी सक्रिय रही हैं। वह चर्चित वेब सीरीज लाइफ हिल गई के निर्माण से जुड़ी रही हैं और इसके साथ ही संगीत परियोजनाओं तथा टिकाऊ फैशन को बढ़ावा देने वाले अभियानों में भी अपनी हिस्सेदारी निभा चुकी हैं। अब यूथ4 राइजिंग भारत-केदार ड्राइव 2026 के माध्यम से वह कला और समाजसेवा के अनुभवों को जोड़कर युवाओं को प्रकृति की रक्षा के लिए एक मंच पर लाई हैं। इस पूरी मुहिम का संदेश बेहद स्पष्ट है कि हिमालय की सुरक्षा, नदियों की निर्मलता और प्रकृति का संरक्षण ही हमारे उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।


















