दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से ठीक पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने एक कानूनी नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस आवास पर पहुंचाया गया जहां अभिजीत दिपके वर्तमान में रुके हुए हैं। यह घर एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता अनीश गवांडे का है। पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पुलिस के नोटिस पर अनीश गवांडे की प्रतिक्रिया
जब पुलिस अचानक नोटिस लेकर अनीश गवांडे के घर पहुंची, उस समय वह लंच के लिए बाहर गए हुए थे। इस पूरे घटनाक्रम पर शांत और सहज अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस उनके घर मेहमान बनकर आई है, इसलिए वे लौटकर उन्हें सबसे पहले चाय पिलाएंगे और प्यार से यह पूछेंगे कि उनके अचानक यहां आने की असल वजह क्या है। उन्होंने दो टूक शब्दों में यह भी साफ कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर तिरंगा यात्रा में जरूर शामिल होंगे।
राष्ट्रीय राजधानी में धारा 163 और एनडीएमसी की परमिशन का पेंच
दिल्ली पुलिस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस समय धारा 163 लागू की गई है। इसके अलावा नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी की तरफ से इस मार्च के आयोजन के लिए किसी भी तरह की आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। इन्ही प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने मार्च को रोकने और अपनी चेतावनी देने के लिए यह कदम उठाया है, ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला
अनीश गवांडे ने प्रशासन और सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे घबराहट और डर करार दिया है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जो लोग देश भर में 'हर घर तिरंगा' जैसे नारों का प्रचार करते हैं, आज वही लोग तिरंगे के सम्मान में निकलने वाली यात्रा से डर रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालने से रोकना सरकार की घबराहट और कायरता को पूरी तरह से उजागर करता है।
संविधान के दायरे में रहने की बात
नोटिस मिलने के बाद खुद अभिजीत दिपके ने भी इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी और उन्होंने अपने पूरे सफर में कभी भी किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। उनके द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी सभाएं और कार्यक्रम हमेशा से पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे हैं, जो देश के संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों के बिल्कुल दायरे में होते हैं। दिपके ने यह भी भरोसा दिलाया कि वे आगे भी संविधान का पूरा सम्मान करते हुए शांति और अहिंसा बनाए रखेंगे।
किस कानूनी प्रावधान के तहत हुई कार्रवाई
दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29 के अंतर्गत सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके को यह नोटिस सर्व किया गया है। इस विशिष्ट धारा के तहत पुलिस को जनता को आवश्यक निर्देश देने की कानूनी शक्ति मिलती है। इसके प्रावधानों के अनुसार, पुलिस कमिश्नर के आदेशों का पालन कराते हुए इंस्पेक्टर या उससे ऊंचे पद का कोई भी अधिकारी शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौखिक या लिखित निर्देश दे सकता है। हालांकि, ये निर्देश धारा 28 के नियमों या किसी अन्य प्रचलित कानून के विरुद्ध नहीं होने चाहिए, और इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत कनॉट प्लेस के मार्च से पहले यह कार्रवाई की गई है।



















