दिल्ली सरकार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में इलाज कराने वाले हजारों मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। इस प्रमुख अस्पताल में करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक और नई मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों के आ जाने से उन मरीजों का वर्षों का इंतजार आखिरकार समाप्त होने जा रहा है, जिन्हें पहले अपनी मेडिकल जांच के लिए एक से दो साल तक की लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब मरीजों को तारीखों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और उन्हें समय पर सटीक निदान मिल सकेगा।
महीनों और सालों का लंबा इंतजार हुआ खत्म
अस्पताल में लंबे समय से उपकरणों की भारी कमी चल रही थी जिसके कारण मरीजों को एमआरआई स्कैन करवाने के लिए दो से तीन साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था। लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 5,000 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। कुछ समय पहले आई रिपोर्ट्स के अनुसार अस्पताल में केवल एक ही एमआरआई और एक ही सीटी स्कैनर काम कर रहा था। हालांकि यहां सभी जांचें पूरी तरह मुफ्त होती हैं, लेकिन भारी बैकलॉग और मशीनों की कमी के कारण मरीजों के समय पर इलाज में खासी बाधा आ रही थी और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
40 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हुईं आधुनिक मशीनें
गुरुवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने अस्पताल परिसर में पहुंचकर इन नई मशीनों का औपचारिक उद्घाटन किया। इन नई स्थापित मशीनों में एक अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन और एक हाई-एंड ड्यूल-सोर्स 256-स्लाइस सीटी स्कैनर शामिल किया गया है। ये दोनों ही उन्नत मशीनें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सीएसआर कार्यक्रम के तहत अस्पताल को मिली हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 40 करोड़ रुपये है। अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इन नई मशीनों के सुचारू रूप से शुरू होने से अस्पताल में एमआरआई और सीटी स्कैन की कुल दैनिक संख्या में सीधे तौर पर दोगुना इजाफा हो जाएगा।
गंभीर बीमारियों की जांच अब होगी और भी आसान
उद्घाटन समारोह के दौरान स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि ये आधुनिक मशीनें अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होने वाली हैं। सीटी स्कैनर की मदद से किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का बहुत जल्दी और बिल्कुल सटीक निदान किया जा सकेगा। इसके साथ ही, 3-टेस्ला एमआरआई मशीन के माध्यम से शरीर के भीतर की गंभीर बीमारियों का बहुत पहले ही पता लगाया जा सकेगा। दिल्ली के निवासियों के लिए अस्पताल में ये सभी महत्वपूर्ण और महंगी मेडिकल जांचें पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब मरीजों को किसी भी जरूरी स्कैन के लिए दूसरे निजी या बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी और हृदय, मस्तिष्क तथा कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का निदान अब इसी परिसर में संभव हो सकेगा।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं ये नई मशीनें
नई स्थापित ड्यूल-सोर्स सीटी स्कैनर में एक के स्थान पर दो अलग-अलग एक्स-रे ट्यूब्स दी गई हैं, जिससे स्कैनिंग की प्रक्रिया बहुत तेज होती है और तस्वीरों का निर्माण शीघ्र होता है। इस तकनीक से दिल जैसे लगातार चलते रहने वाले अंगों की जांच करना डॉक्टरों के लिए काफी आसान हो जाता है। इसके अलावा, 3-टेस्ला एमआरआई मशीन की चुंबकीय शक्ति सामान्य 1.5-टेस्ला मशीनों की तुलना में ठीक दोगुनी होती है, जिससे मस्तिष्क और पूरे तंत्रिका तंत्र की अत्यधिक स्पष्ट तथा उच्च रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें प्राप्त होती हैं।
मरीजों की सहूलियत और मानसिक शांति का रखा गया है पूरा ध्यान
ये नई मशीनें तकनीकी रूप से उन्नत होने के साथ-साथ मरीजों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से भी काफी आरामदायक बनाई गई हैं। एमआरआई मशीन का खुलने वाला आंतरिक हिस्सा 70 सेंटीमीटर चौड़ा रखा गया है, जिससे मरीजों को बंद और संकीर्ण जगहों में होने वाले डर यानी क्लॉस्ट्रोफोबिया की समस्या से काफी हद तक राहत मिलती है। मशीन के अंदर लगी स्क्रीन पर वीडियो या मनपसंद गाने चलाने की सुविधा भी दी गई है, जिससे स्कैन के दौरान मरीज शांत और तनावमुक्त बने रहते हैं। इन आधुनिक सुधारों के चलते स्कैन पूरा होने में लगने वाला समय भी काफी कम हो गया है और मरीजों को उनकी रिपोर्ट बहुत जल्द मिल जाती है।
दैनिक जांच क्षमता में भारी बढ़ोतरी
अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जहां पहले रोजाना केवल 30 से 40 एमआरआई स्कैन ही हो पाते थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 80 से 100 प्रतिदिन हो सकेगी। इसी प्रकार, सीटी स्कैन की क्षमता को भी 150 से बढ़ाकर लगभग 300 प्रतिदिन कर दिया गया है। इस अभूतपूर्व विस्तार से मरीजों को मिलने वाली तारीखों का इंतजार आधे से भी काफी कम रह जाएगा, जिससे अस्पताल की जांच प्रणालियों पर से दबाव घटेगा और गंभीर रोगियों को कम समय में ही रिपोर्ट हाथ लग जाएगी।
चिकित्सा विभाग और नवजात शिशु देखभाल की अनूठी पहल
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि पिछले साल मई के महीने में अस्पताल के भीतर एक विशेष मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की शुरुआत की गई थी। यह दिल्ली सरकार के अधीन चलने वाले किसी भी अस्पताल में अपनी तरह का पहला ऐसा विभाग है, जहां सिर्फ एक बूंद खून की जांच से ही कई प्रकार की जटिल जेनेटिक बीमारियों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा, नवजात शिशुओं की मुफ्त स्क्रीनिंग के लिए चलाए जा रहे मिशन एएनएमओएल का दायरा बढ़ाकर अब इसे 63 दुर्लभ बीमारियों तक पहुंचाया जा रहा है।
स्तनपान प्रबंधन और दूध बैंक की विशेष सुविधा
कुछ महीने पहले सामने आई रिपोर्टों के अनुसार लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल की जेनेटिक्स लैब में हर महीने 14,000 से अधिक नवजात बच्चों के नमूनों की जांच की जाती है। इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि अस्पताल की लेक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट राजधानी दिल्ली की इकलौती ऐसी अनूठी सुविधा है। यह विशेष यूनिट उन नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है जो समय से पहले पैदा हुए हैं, जिनका वजन बहुत कम है या जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस इकाई के माध्यम से माताओं को स्तनपान से जुड़ी पेशेवर सलाह, सुरक्षित तरीके से दूध का संग्रह करने और जरूरतमंदों के लिए डोनर ह्यूमन मिल्क की अत्यंत महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।





















