बिहार के छपरा में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद कई परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया था। जिस अवैध शराब के कारोबार से कई घरों का चूल्हा जलता था, उसके अचानक बंद हो जाने से उन परिवारों में भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। ऐसी परिस्थितियों में पुरुषों और महिलाओं को बाहर जाकर मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, राज्य में बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों और कारखानों का अभाव होने के कारण दैनिक मजदूरी का काम भी आसानी से नहीं मिल पा रहा था। इस वजह से कई बार परिवारों को राशन जुटाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और कई दिनों तक भूखे सोना पड़ता था।
शराबबंदी के बाद रीना देवी के जीवन में आया बड़ा मोड़
गरखा प्रखंड के गरखा इलाके की रहने वाली रीना देवी का परिवार भी पहले शराब बेचने के अवैध काम से जुड़ा हुआ था। जब यह कारोबार पूरी तरह बंद हुआ, तो उनके घर में भी भुखमरी के हालात बन गए। परिवार चलाने के लिए रीना देवी को खेतों और लोगों के घरों में जाकर मजदूरी करनी पड़ी, लेकिन नियमित काम न मिलने के कारण हालात में सुधार नहीं हो रहा था। उस कठिन समय में वह जीविका से जुड़ी हुई थीं, जिसने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।
दस हजार रुपये के लोन से शुरू किया ठेले पर होटल
रीना देवी ने स्थानीय स्तर पर अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा साझा करते हुए बताया कि उनका पुराना कारोबार दारू और ताड़ी का था, जो शराबबंदी के बाद ठप पड़ गया। इसके बाद मजदूरी करने पर भी हर दिन काम नहीं मिलता था और मजदूरी की कमाई से ही घर का राशन आता था। काम न मिलने की स्थिति में बच्चों के साथ कई रातें बिना खाए-पिए गुजारनी पड़ती थीं। परिवार की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जीविका दीदी के अधिकारियों ने उनकी मदद के लिए कदम बढ़ाया और उन्हें सबसे पहले 10 हजार रुपये का लोन मुहैया कराया।
उस शुरुआती लोन की राशि से रीना देवी ने एक ठेले पर होटल शुरू किया, जहां उन्होंने छोला, समोसा और पकौड़ी जैसे खाद्य पदार्थ बनाकर बेचना शुरू किया। इस तरह उनके पास घर का राशन जुटाने का एक निश्चित जरिया बन गया। इस व्यवसाय से उन्होंने धीरे-धीरे कुछ पैसे बचाए और बाद में जीविका के माध्यम से उन्हें एक बार फिर से लोन मिला।
होटल के बाद जनरल स्टोर तक फैलाया कारोबार
जीविका के माध्यम से मिले दूसरे ऋण और होटल के व्यवसाय से बचाई गई राशि के सहारे रीना देवी ने एक जनरल स्टोर की नई दुकान भी खोल ली। अब उनका पूरा परिवार आर्थिक रूप से संभल चुका है और उनका जीवन अच्छे से चल रहा है। हालांकि, उनका मानना है कि अगर सरकार की तरफ से उन्हें कुछ और वित्तीय सहायता मिल जाए, तो वह अपने इस कारोबार को और ज्यादा आगे बढ़ा सकती हैं। इससे वह अधिक कमाई करके अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य दे सकेंगी।
पुराने अवैध धंधे से कहीं बेहतर है वर्तमान इज्जत का कारोबार
पुराने दिनों को याद करते हुए रीना देवी बताती हैं कि शराब के अवैध कारोबार में आए दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पुलिस अक्सर कभी महिलाओं तो कभी पुरुषों को पकड़कर ले जाती थी और थाना तथा कोर्ट-कचहरी के चक्कर हमेशा लगे रहते थे। स्थिति यह थी कि समाज के लोग ऐसे परिवारों के बच्चों के साथ रिश्ते जोड़ने से भी कतराते थे। उनके अनुसार, शराब के उस असुरक्षित धंधे की तुलना में उनका वर्तमान होटल और जनरल स्टोर का कारोबार कई गुना बेहतर है। आज वह पुलिस के झंझटों से दूर अपने मान-सम्मान के साथ अपने परिवार की गाड़ी सुचारू रूप से चला रही हैं।



















