राजधानी दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी रामदेव ने पतंजलि आयुर्वेद के उत्पादों और उसकी दवाओं को लेकर चल रहे विवादों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संस्थान की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। स्वामी रामदेव ने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पतंजलि की किसी भी औषधि पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा निर्मित दवाएं कड़े वैश्विक पैमानों पर खरी साबित हुई हैं और भारत अथवा विदेश की किसी भी अधिकृत एजेंसी ने गुणवत्ता के मोर्चे पर इनमें कोई खामी नहीं पाई है। इसी तरह पतंजलि घी में मिलावट के दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके उत्पाद किसी भी आधुनिक प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए पूरी तरह खुले हैं।
भ्रांतियों का खंडन और मानहानि का मुकदमा वापस
विगत कुछ महीनों के घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि जनमानस में पतंजलि को लेकर लगातार गलतफहमियां फैलाई गईं। कभी घी के भीतर पशु चर्बी होने का झूठा दावा किया गया, तो कभी हड्डियों का बुरादा मिले होने जैसी बातें फैलाई गईं। उन्होंने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पूर्व में आए बयानों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने बिना पुष्टि की गई सुनी-सुनाई बातों के आधार पर बयानबाजी की थी। स्वामी रामदेव ने जानकारी दी कि हाल ही में उनकी बृजभूषण शरण सिंह से सीधी मुलाकात हुई, जिसमें सभी गलतफहमियां दूर कर ली गई हैं। इसके बाद पतंजलि प्रबंधन की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दायर किया गया मानहानि का मुकदमा भी वापस ले लिया गया है। इसी प्रसंग में उन्होंने मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज कानून एक तरह का अंधा कानून बन चुका है, जिसमें समय के अनुरूप बदलाव बेहद जरूरी हैं। इस विषय पर प्रधानमंत्री के समक्ष मांग रखी जा चुकी है और इस कानून में सुधार के लिए आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।
रोजगार सृजन और आयुर्वेद का वैश्विक विस्तार
अपनी यात्रा का ब्योरा देते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि एक संन्यासी के रूप में उन्होंने अपने जीवन के कई दशक योग और पारंपरिक आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में लगाए हैं। आज योग और स्वदेशी उपचार पद्धति दुनिया के लगभग 200 मुल्कों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि पतंजलि केवल एक व्यावसायिक उपक्रम नहीं है, बल्कि इसने देश के लगभग पांच लाख नागरिकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर आजीविका दी है। संस्थान ने आगामी दिनों में पांच लाख अतिरिक्त युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। स्वामी रामदेव के अनुसार प्राचीन ऋषि परंपरा और आधुनिक विज्ञान का समन्वय करके ही भारत की इस अमूल्य धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाई जा सकी है।
विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा और स्वास्थ्य क्षेत्र को चुनौती
स्वामी रामदेव ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ विरोधी तत्व निरंतर पतंजलि के पतन की राह देख रहे हैं, लेकिन संस्थान निष्काम कर्म और दैवीय शक्ति के भरोसे निरंतर आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि योग, आयुर्वेद और सनातन संस्कृति की प्रासंगिकता पर उंगली उठाने वालों को इस विरासत के व्यावहारिक लाभ को समझना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पतंजलि खुले बाजार में बहुराष्ट्रीय विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को कड़ी टक्कर दे रही है। इसलिए अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा में दूसरों को नीचा दिखाने के स्थान पर निष्पक्ष माहौल तैयार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चुनौती देते हुए कहा कि पतंजलि टाइप-3 डायबिटीज जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभावी उपचार का दावा करती है। उन्होंने आम नागरिकों और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया कि वे स्वयं आकर इन वैज्ञानिक परिणामों का सत्यापन कर सकते हैं।



















