जमुई छेड़छाड़ मामले में आक्रोश के बीच खेसारी लाल यादव पर फूटा लोगों का गुस्सा, खुशबू पाटनी ने भी की सख्त कार्रवाई की मांगरोमांटिक हीरो बने अलेक्जेंडर स्कार्सगार्ड, ओलिविया कोलमैन की फिल्म विकर में निभाएंगे वुवेन मैन का किरदारकड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को दी 7 दिन की अंतरिम जमानत, पारिवारिक विवाह में होंगे शामिलउदयपुर नगर निगम में उप महापौर चुनाव: भाजपा के दिनेश भट्ट 56 वोटों के साथ विजयी, कांग्रेस प्रत्याशी को 24 मतमेरठ में योगी आदित्यनाथ के तीखे प्रहार के बाद लखनऊ में अखिलेश यादव का नया पोस्टर वारअमेरिकी निजी क्षेत्र में रोजगार बहाली में तेजी, चार हफ्तों का औसत बढ़कर 20K हुआगुजरात के मोरबी में कैंसर पीड़ित पति के इलाज के दौरान खुला बड़ा राज, पूर्व पार्षद के पति पर दुष्कर्म का केस दर्जअफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों की भारत ने की सख्त भर्त्सना, नई दिल्ली ने क्षेत्रीय शांति पर जताई चिंताशुक्र का स्वाति नक्षत्र और तुला में गोचर, कल से 31 दिनों तक 4 राशियों के लिए खुलेंगे आर्थिक समृद्धि के द्वारबैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों पर डॉयचे बैंक का नया अनुमान, दो बार 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना
कैंसर दवाओं की कीमतों में दस गुना अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मुनाफाखोरी और टैक्सपेयर्स के पैसों के दुरुपयोग पर जताई नाराजगीभारत
22 सित॰ 2026, 6:48 pm (2 घंटे पहले)· 0

कैंसर दवाओं की कीमतों में दस गुना अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मुनाफाखोरी और टैक्सपेयर्स के पैसों के दुरुपयोग पर जताई नाराजगी

निर्माता से 2,700 रुपये में मिलने वाली दवा 27,000 रुपये एमआरपी पर बेचे जाने को सुप्रीम कोर्ट ने मरीजों से खुली लूट करार दिया है। अदालत ने इस गोरखधंधे पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और सरकारी रीइम्बर्समेंट के दुरुपयोग पर तीखे सवाल उठाए।

कैंसर जैसी घातक और गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं के अत्यधिक दामों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख दिखाया है। अदालत के समक्ष जब यह तथ्य सामने आया कि निर्माता कंपनियों द्वारा खुदरा विक्रेताओं को काफी कम दाम पर दी जाने वाली दवाओं को मरीजों तक पहुंचाने के लिए उन पर कई गुना अधिक अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित किया जा रहा है, तो पीठ ने इस पर भारी रोष व्यक्त किया। शीर्ष अदालत ने दवाओं की कीमतों में मौजूद इस अप्रत्याशित और अस्वाभाविक अंतर को सीधे तौर पर दिनदहाड़े की गई डकैती और मरीजों के साथ खुली लूट करार दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस समूचे मामले में नियामक तंत्र और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता तथा चुप्पी पर भी गंभीर ऐतराज जताया है।

दस गुना तक मुनाफे का गणित और कीमतों का खेल

अदालत की सुनवाई के दौरान कैंसर की जरूरी दवाओं की खरीद और बिक्री की कीमतों के बीच भारी असमानता का मामला प्रमुखता से उठा। कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि दवा निर्माण करने वाली कंपनियां खुदरा दवा विक्रेताओं को कुछ महत्वपूर्ण दवाइयां लगभग 2,700 रुपये की कीमत पर उपलब्ध कराती हैं। इसके विपरीत, जब वही दवाइयां बाजार में आम मरीजों को बेची जाती हैं, तो उनके पैकेट पर प्रिंटेड अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी 27,000 रुपये तक तय कर दिया जाता है। निर्माता की बिक्री दर और मरीज के लिए निर्धारित एमआरपी के बीच दस गुना तक का यह भारी फासला देखकर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का भारी मूल्य अंतर किसी भी सूरत में उचित व्यावसायिक लाभ नहीं माना जा सकता, बल्कि यह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे असहाय मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर की जाने वाली खुली तबाही और अनुचित मुनाफाखोरी है।

ये भी पढ़ें

सरकारी रीइम्बर्समेंट और करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग

मामले की विस्तृत समीक्षा करते हुए शीर्ष अदालत ने अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं द्वारा अपनाए जा रहे इस वित्तीय तौर-तरीके पर भी गहरा प्रहार किया। पीठ ने इस बात को रेखांकित किया कि कई चिकित्सा संस्थान और अस्पताल दवा निर्माताओं या थोक विक्रेताओं से इन जीवनरक्षक दवाओं को बेहद कम दामों पर खरीदते हैं। इसके बाद जब सरकारी योजनाओं जैसे आयुष योजना के अंतर्गत इलाज कराने वाले मरीजों का बिल तैयार किया जाता है, तो वहां दवाओं की वास्तविक खरीद लागत के बजाय भारी-भरकम प्रिंटेड एमआरपी के आधार पर सरकार से भुगतान का दावा किया जाता है। अदालत ने कहा कि सस्ती दरों पर दवाएं हासिल कर शासन से महंगी एमआरपी पर रीइम्बर्समेंट लेना सीधे तौर पर देश की आम जनता और करदाताओं की गाढ़ी कमाई का खुला दुरुपयोग और वित्तीय धोखाधड़ी है।

जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और विनियामक विफलता

दवा बाजार में चल रही इस मनमानी के साथ-साथ शीर्ष अदालत ने विनियामक संस्थाओं और सक्षम अधिकारियों की भूमिका को भी कठघरे में खड़ा किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरा आश्चर्य और असंतोष व्यक्त किया कि जिन नीति-निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का यह दायित्व है कि वे ऐसी अनियंत्रित मुनाफाखोरी पर रोक लगाएं तथा दवाओं के उचित मूल्य निर्धारण को लेकर कड़े फैसले लें, वे पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। अदालत ने तंजिया लहजे में कहा कि अधिकारियों की इस अकर्मण्यता और चुप्पी के पीछे के कारणों को अलग से स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियां खुद अपनी कहानी बयां कर रही हैं। अदालत ने जोर देकर कहा कि हेल्थकेयर क्षेत्र में चंद तत्वों द्वारा व्यावसायिक मुनाफे की खाड़ी में मरीजों के जीवन और उनकी वित्तीय सुरक्षा को दांव पर लगाना बेहद चिंताजनक है, इसलिए पूरे तंत्र पर सख्त कानूनी नियंत्रण स्थापित करना अनिवार्य हो चुका है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं के दामों को लेकर क्या टिप्पणी की है?
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की जरूरी दवाओं की कीमतों में भारी अंतर और बेतहाशा मुनाफे को दिनदहाड़े डाका और मरीजों से खुली लूट बताया है।
अदालत की सुनवाई में दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में कितना अंतर पाया गया?
कोर्ट के सामने आया कि निर्माता कंपनियां जो दवा खुदरा विक्रेताओं को सिर्फ 2,700 रुपये में देती हैं, उस पर 27,000 रुपये तक एमआरपी अंकित की जा रही है।
टैक्सपेयर्स के पैसों के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि अस्पताल कम दाम पर दवा खरीदकर आयुष योजना जैसी सरकारी योजनाओं से महंगी एमआरपी पर रीइम्बर्समेंट लेते हैं, जो करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग है।
संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर कोर्ट ने क्या ऐतराज जताया?
सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि दवाओं की इस अनियंत्रित लूट पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह खामोश बैठे हुए हैं।
यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र की किस समस्या को उजागर करता है?
यह मामला हेल्थकेयर सेक्टर में दवाओं के भारी ट्रेड मार्जिन, अनैतिक मुनाफाखोरी और मरीजों की लाचारी का फायदा उठाने की गंभीर समस्या को उजागर करता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·55 मिनट पहले

कैंसर जैसी बीमारी में 2700 की दवा 27000 में बेचना और ऊपर से सरकारी योजनाओं में भी इसी महंगे दाम पर क्लेम करना सरासर लूट है। ऐसी फार्मा कंपनियों और अस्पतालों पर भारी जुर्माना लगना चाहिए ताकि आम जनता की गाढ़ी कमाई यूं न लूटी जा सके।

Sophie Laurent@sophie-laurent·54 मिनट पहले

रविकेश, सही कहा आपने। पर क्या सरकार के पास इस लूट को रोकने का कोई तय नियम नहीं था जो कोर्ट को बीच में आना पड़ा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

कैंसर जैसी बीमारी में 2700 की दवा 27000 में बेचना इंसानियत के नाम पर सीधा धोखा है। कोर्ट का यह सख्त रुख सरकारी पैसों की इस लूट को रोकने में मदद करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर सोचने की बात यह है कि जब अधिकारियों को सब पता था, तो वे इतने साल चुप क्यों बैठे रहे?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp