राष्ट्रीय राजधानी में चुनावी नामावलियों को अद्यतन करने के व्यापक प्रयास के अंतर्गत प्रशासनिक तंत्र पूरी सक्रियता से जुटा हुआ है। घर-घर जाकर एकत्र की गई जानकारियों के संकलन के बाद तैयार किए गए प्रारंभिक मसौदे की समीक्षा चल रही है। निर्वाचन अधिकारियों ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि यदि किसी व्यक्ति को सत्यापन संबंधी कोई सूचना या पत्र मिला है, तो उसका यह कतई अर्थ नहीं निकलता कि उनका मताधिकार स्वतः ही समाप्त कर दिया गया है। संबंधित मतदाताओं को अपनी पहचान तथा पते से जुड़े आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा विधिक अवसर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसी भी पात्र नागरिक का नाम अनुचित तरीके से नामावली से बाहर न होने पाए।
प्रारंभिक मसौदा और सत्यापन से जुड़े अहम नियम
मतदाता नामावलियों के पुनरीक्षण अभियान की रूपरेखा के मुताबिक, बूथ स्तरीय अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए गणना प्रपत्रों के विवरण के आधार पर 31.08.2026 को प्रारंभिक सूची सार्वजनिक की जा चुकी है। इस समय यह विवरण मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट, सभी विधानसभा हलकों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों एवं सहायक अधिकारियों के दफ्तरों सहित मतदान केंद्रों पर अवलोकन के लिए उपलब्ध कराया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने रेखांकित किया है कि जिन मामलों में पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण सूची के साथ मतदाता या उनकी संतानों का प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं स्थापित हो सका था, अथवा विवरणों में कोई तार्किक विसंगति नजर आई थी, केवल उन्हीं प्रकरणों में स्थिति स्पष्ट करने हेतु औपचारिक सूचना भेजी जा रही है। ऐसे सभी नागरिक अपने अधिकार क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष अपने साक्ष्य पेश कर सकते हैं। केंद्रीय निर्वाचन प्राधिकार द्वारा सुझाए गए प्रपत्र महज सांकेतिक हैं, और सक्षम अधिकारी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अंतिम फैसला करेंगे। इन सभी आपत्तियों तथा नोटिसों के निस्तारण की अंतिम समयसीमा 29 अक्टूबर, 2026 निर्धारित है, जिसके उपरांत 4 नवंबर, 2026 को परिमार्जित अंतिम सूची औपचारिक रूप से जारी कर दी जाएगी।
नागरिकों की सहूलियत के लिए डिजिटल मंचों पर भी रिकॉर्ड प्रदर्शित किए गए हैं। जिन मतदाताओं के नाम प्रारंभिक मसौदे में शामिल हैं अथवा जिन्हें स्पष्टीकरण के लिए चुना गया है, उनकी जानकारी सीईओ के पोर्टल पर देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, जो लोग अपना नाम जांचना चाहते हैं वे वोटर पोर्टल ई-रोल डाउनलोड लिंक पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा अपनी प्रविष्टि की पुष्टि हेतु निर्वाचक खोज पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
विस्थापित, अनुपस्थित और दोहरे नामों का पृथक्करण
क्षेत्रीय स्तर पर किए गए व्यापक सर्वेक्षण के दौरान ऐसे व्यक्तियों की भी एक अलग सूची बनाई गई है जो अपने पते पर अनुपस्थित पाए गए, अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं, दिवंगत हो चुके हैं अथवा जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे। इस अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत एवं दोहरे (एएसडीडी) नामों वाली नामावली को सार्वजनिक समीक्षा के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के विशिष्ट वेबपेज सीईओ दिल्ली एएसडीडी पोर्टल पर जारी किया गया है।
इसके समानांतर, जिन नागरिकों को स्थिति स्पष्ट करने हेतु सूचनाएं जारी की गई हैं, उनके विवरण और कारणों की सार्वजनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई है। इच्छुक व्यक्ति जारी नोटिसों की आधिकारिक सूची के माध्यम से अपना रिकॉर्ड परख सकते हैं। नियमों के अनुपालन के बिना किसी भी व्यक्ति का नाम सूची से नहीं काटा जाएगा और प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर अपील करने का पूर्ण वैधानिक संरक्षण प्राप्त है।
नए पंजीकरण हेतु विशेष शिविर और समयसीमा
यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मौजूदा प्रारंभिक मसौदे में सम्मिलित होने से छूट गया है, तो वे अंतिम प्रकाशन से पूर्व अपना दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए फॉर्म-6 भरकर सभी अनिवार्य प्रपत्रों के साथ 30.09.2026 तक आवेदन दाखिल करना होगा। यह सुविधा संबंधित रजिस्ट्रीकरण कार्यालयों व बूथ स्तर के प्रभारियों के पास प्रत्यक्ष रूप से और आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल अथवा ईसीआईएनईटी मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डिजिटल माध्यम से भी सुलभ है।
अभियान की पहुंच को अंतिम छोर तक ले जाने के उद्देश्य से 20.09.2026 के सफल आयोजन के बाद, आगामी 27.09.2026 रविवार को सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविरों का दूसरा चरण आयोजित किया जाएगा। समाज के उपेक्षित वर्गों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मुख्यधारा में लाने के लिए विशिष्ट प्रबंध किए गए हैं। इसके तहत बेघर नागरिकों, ट्रांसजेंडर समुदाय तथा यौन कर्मियों के पंजीकरण हेतु 23 और 24 सितंबर, 2026 को शाम 5:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के रैनबसेरों और अन्य आश्रय स्थलों पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।
दोहरे पंजीकरण पर कानूनी चेतावनी और पहचान पत्र की वास्तविकता
चुनावी प्रबंधन को त्वरित और बाधा रहित बनाने के लिए सभी निर्वाचन क्षेत्रों में सामान्य अधिकारियों के अतिरिक्त सहायक रजिस्ट्रीकरण अफसरों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। प्रशासनिक तंत्र ने नागरिकों से अपील की है कि वे 30.09.2026 तक अपने दावे जमा करके प्रक्रिया का लाभ उठाएं।
इसके साथ ही मतदाताओं को कड़ी कानूनी चेतावनी भी दी गई है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों (विशेषकर धारा 17 व 18) के तहत एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में अथवा एक ही क्षेत्र में एक से ज्यादा बार नाम दर्ज कराना दंडनीय अपराध माना जाता है। जिन लोगों की प्रविष्टियां दोहराव वाली हैं, उन्हें अपनी अतिरिक्त प्रविष्टि विलोपित कराने के लिए तत्काल फॉर्म-7 के तहत आवेदन करने को कहा गया है।
अधिकारियों ने यह बुनियादी सिद्धांत भी दोहराया है कि महज मतदाता फोटो पहचान पत्र हाथ में होने से मतदान का अधिकार सुरक्षित नहीं हो जाता। किसी भी नागरिक के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनिवार्य पूर्व-शर्त यही है कि उसका नाम उस समय प्रभावी आधिकारिक मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से दर्ज होना चाहिए।





















