पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय घटनाक्रम के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह और पंजाब पुलिस के पूर्व डीएसपी बलविंदर सेखों ने बुधवार को अकाली दल वारिस पंजाब दे का दामन थाम लिया। दोनों पूर्व अधिकारियों ने चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर खडूर साहिब से सांसद और पार्टी प्रमुख अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह तथा विधायक मनप्रीत अयाली मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस नए राजनीतिक गठजोड़ को राज्य में कानून व्यवस्था और नशा विरोधी अभियानों से जुड़े मुद्दों पर एक अहम कदम माना जा रहा है।
भोला ड्रग रैकेट और मजीठिया से पूछताछ का पुराना विवाद
निरंजन सिंह अपने सेवाकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल वित्तीय अपराधों और गंभीर मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं। विशेष रूप से पंजाब के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क, जिसे भोला ड्रग केस के नाम से जाना जाता है, में उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गहन पड़ताल की थी। इसी जांच प्रक्रिया के अंतर्गत उन्होंने पंजाब के पूर्व राजस्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को भी तलब कर उनसे तीखे सवाल-जवाब किए थे। उस दौर में पूछताछ के बीच ही निरंजन सिंह के तबादले का आदेश जारी होने पर भारी राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया था, जिसे विपक्ष ने जांच को बाधित करने का प्रयास करार दिया था।
राजनीतिक पारी की शुरुआत पर राज्य के हालातों का हवाला
सक्रिय राजनीति में प्रवेश को लेकर निरंजन सिंह ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि उनका पहले चुनाव या सियासत में आने का कोई विचार नहीं था। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई है। उनका आरोप था कि शासन व्यवस्था पर पहले भी माफिया का असर था और आज भी वही लोग पर्दे के पीछे से प्रभाव डाल रहे हैं। राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सिंचाई घोटाले जैसे बड़े मामलों में भी मौजूदा सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और जवाबदेही तय करने में नाकामी दिखाई है।
जांच में रुकावट और केंद्रीय एजेंसी पर गंभीर आरोप
पूर्व उप निदेशक ने अपने कार्यकाल के दौरान झेली गई प्रशासनिक बाधाओं को भी खुलकर साझा किया। निरंजन सिंह का आरोप था कि प्रवर्तन निदेशालय के 3 निदेशकों ने उन्हें बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आगे नहीं बढ़ाने दी। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार की मंशा ही मामले की तह तक जाने की नहीं थी, तो एक जांच अधिकारी के रूप में उनके पास सीमित रास्ते ही बचते थे। इस संबंध में उन्होंने औपचारिक तौर पर सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं भी दर्ज कराई थीं। उनका यह भी कहना था कि कोई भी सत्तारूढ़ सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग से अछूती नहीं रही है।
नशे और माफिया के खिलाफ साझा मुहिम का ऐलान
वारिस पंजाब दे से जुड़ने के कारण पर बोलते हुए निरंजन सिंह ने रेखांकित किया कि यह संगठन लंबे समय से जमीनी स्तर पर नशा उन्मूलन की दिशा में सक्रिय रहा है। उन्होंने कहा कि इसे किसी एक पंथ या मजहब के दायरे में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे पंजाब के अवाम का साझा मंच है। उन्होंने कहा कि उनका अपना कोई व्यक्तिगत सियासी स्वार्थ नहीं है, बल्कि वह राज्य से नशाखोरी और भ्रष्टाचार के खात्मे के मकसद से इस मुहिम को ताकत देने पहुंचे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि भविष्य में उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो विभिन्न अवैध धंधों और संगठित माफिया को राज्य छोड़ना पड़ेगा।























