अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में पाकिस्तानी वायुसेना की ओर से किए गए हवाई हमलों को लेकर भारत ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने इस सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए इसे किसी पड़ोसी मुल्क की जमीन के खिलाफ सीधी आक्रामकता करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में रेखांकित किया है कि इस तरह के एकतरफा सैन्य अभियान पूरे इलाके की अमन-चैन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए किसी भी सूरत में उचित नहीं हैं।
विदेश मंत्रालय ने नागरिकों की मौत पर जताया गहरा दुख
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार के दिन आयोजित नियमित प्रेस ब्रीफिंग में नई दिल्ली का पक्ष विस्तार से सामने रखा। रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत, अफगान सरजमीं पर पाकिस्तान द्वारा अंजाम दी गई इस एयरस्ट्राइक की साफ लफ्जों में निंदा करता है। उन्होंने जानकारी दी कि इन हवाई हमलों के दौरान आम नागरिकों के हताहत होने और उनकी जान जाने की खबरें सामने आई हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन हमलों में अपनी जान गंवाने वाले मासूम लोगों के पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी मानवीय संवेदना भी प्रकट की।
सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान को दोटूक नसीहत
प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर भी इस्लामाबाद की दोहरी नीति को कटघरे में खड़ा किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान को इस गंभीर विषय पर सिर्फ खोखले बयान जारी करने के बजाय जमीन पर ठोस और असरदार कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पाकिस्तान के दावों और बातों पर केवल उसी स्थिति में यकीन करेगी, जब वह अपनी सीमा से संचालित होने वाले आतंकवाद के खात्मे के लिए पूरी तरह विश्वसनीय, निष्पक्ष और निर्णायक कदम उठाकर दिखाएगा।
दोनों देशों के बीच तीन माह बाद फिर भड़का भारी तनाव
भारत की यह सख्त कूटनीतिक प्रतिक्रिया ऐसे संवेदनशील समय में सामने आई है जब सीमा पार हिंसा को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते एक बार फिर गंभीर तनाव के दौर में पहुंच गए हैं। दोनों पड़ोसियों के बीच लगभग तीन महीनों तक सीमा पर तुलनात्मक शांति बनी हुई थी, लेकिन इस ताजा सैन्य हमले ने उस ठहराव को पूरी तरह तोड़कर सीधा सैन्य टकराव पैदा कर दिया है। सीमा क्षेत्र में पहले भी हवाई बमबारी, ड्रोन स्ट्राइक और तोपखाने से गोलाबारी की घटनाएं देखी जाती रही हैं, मगर इस तरह के बड़े हमलों से तनाव अनियंत्रित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
पाकिस्तानी हुकूमत का दावा: 28 आतंकी मार गिराए
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सोमवार के दिन अफगानिस्तान के पूर्वी भूभाग में स्थित ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से जारी बयान में दावा किया गया कि इस सैन्य कार्रवाई में संदिग्ध आतंकवादी ठिकानों को सटीक निशाना बनाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में कुल 28 आतंकवादी ढेर कर दिए गए हैं।
पाकिस्तान का तर्क है कि यह आक्रामक कदम उन घातक वारदातों के जवाब में उठाया गया, जिनमें हाल ही में उसके अपने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया था। पाकिस्तानी हुकूमत लगातार आरोप लगाती रही है कि अफगानिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क पाकिस्तान के शहरों और सुरक्षा चौकियों पर हमलों की गहरी साजिशें रच रहे हैं। पाकिस्तान विशेष तौर पर यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन पर पनाह लिए हुए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और उससे जुड़े चरमपंथी संगठन पाकिस्तान के भीतर लगातार हमलों को अंजाम दे रहे हैं। इसी वजह से इस्लामाबाद काबुल स्थित हुकूमत से इन गिरोहों पर कार्रवाई का दबाव बनाता रहा है। हालिया दिनों में खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट इलाके में स्थित पुलिस परिसर पर भी बेहद घातक हमला हुआ था, जिसके बाद यह जवाबी सैन्य कार्रवाई की गई।
अफगानिस्तान का कड़ा पलटवार: संप्रभुता के हनन का आरोप
दूसरी तरफ काबुल में अफगान तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तानी हवाई कार्रवाई को अपने मुल्क की भौगोलिक अखंडता और संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार देते हुए भारी रोष जताया है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, कुनार प्रांत में एक आम रिहायशी मकान पर पाकिस्तानी बमबारी हुई, जिसमें एक ही परिवार के तीन बेकसूर नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार के चार अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दुखद घटना में तीन नागरिकों के मारे जाने के तथ्य की आधिकारिक पुष्टि संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने भी स्वतंत्र रूप से की है।
हमले के फौरन बाद अफगानिस्तान के विदेश विभाग ने पाकिस्तान के राजनयिक प्रभारी को तलब कर लिया और सीमा पार से किए गए इस हवाई हमले के विरोध में औपचारिक शिकायत पत्र थमा दिया। अफगान अधिकारियों ने इस्लामाबाद के उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान में होने वाली हालिया आतंकी वारदातों के तार अफगान जमीन से जुड़े हैं। तालिबान प्रशासन लंबे समय से इन दावों का खंडन करता रहा है और उसका कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा और खुफिया विफलताओं का ठीकरा अफगानिस्तान के सिर न फोड़े।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता नया संकट
काबुल और इस्लामाबाद के बीच लगातार जारी यह तीखा आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से डूरंड रेखा के आसपास अशांति की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। जहां पाकिस्तान इसे आतंक विरोधी ऑपरेशन बता रहा है, वहीं अफगानिस्तान इसे अपनी जमीन पर खुला हमला मानकर विरोध जता रहा है। दोनों देशों के बीच उपजे इस कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध पर पूरे क्षेत्र के पड़ोसी देशों की पैनी नजर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में यह तनाव बातचीत से थमता है या फिर टकराव का दायरा और ज्यादा फैल जाता है।


















