भारतीय सेना के अभियानों को विषम मौसम में गति देने के उद्देश्य से सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को नई दिल्ली में विशेष रूप से तैयार स्वदेशी XWG डीजल का शुभारंभ किया। इस उन्नत ईंधन का निर्माण भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम और देश की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साझे प्रयासों से संपन्न हुआ है। यह विशेष तकनीकी ईंधन अति-शीत इलाकों में सैन्य लड़ाकू वाहनों और रसद परिवहन के साधनों की निर्बाध गतिशीलता, परिचालन तत्परता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। रक्षा जरूरतों के साथ-साथ यह प्रौद्योगिकी उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली नागरिक आबादी के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर है।
हाड़ कंपाने वाली ठंड और ऊंचाई वाले इलाकों की चुनौतियां होंगी खत्म
बर्फबारी और जमा देने वाले मौसम में पारंपरिक डीजल गाढ़ा होकर फ्यूल फिल्टर में रुकावट उत्पन्न कर देता है, जिससे गाड़ियों के इंजन बंद पड़ जाते हैं और सामरिक परिवहन बाधित होता है। इस समस्या के स्थाई समाधान के रूप में लाया गया यह XWG डीजल माइनस 42 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान में भी द्रव अवस्था में रहकर कुशलतापूर्वक काम करता है। मानकों के लिहाज से यह ईंधन BS-VI मानदंडों और IS 1460:2025 के कड़े गुणवत्ता पैमानों पर पूरी तरह खरा उतरता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि सेना को अपने मौजूदा वाहनों के बेड़े में बिना किसी तकनीकी फेरबदल या दोबारा होमोलोगेशन की प्रक्रिया से गुजरे इसे सीधे उपयोग करने की सुविधा मिलती है।
सेना प्रमुख ने एक साल की रिकॉर्ड समय सीमा में विकास की सराहना की
उत्पाद के अनावरण के दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने XWG डीजल को "महत्वपूर्ण स्वदेशी नवाचार" करार दिया, जो प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के दौरान सीमाओं पर सामरिक पहुंच और अभियानों की सफलता को बल प्रदान करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस विशेष ग्रेड ईंधन के आगमन से बर्फीले क्षेत्रों में गाड़ियों को चालू स्थिति में रखने के लिए पहले इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक उपायों या अतिरिक्त मशक्कत की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे भीषण ठंड में तैनात सैनिकों की सुरक्षा का स्तर बढ़ेगा और उनके मनोबल में वृद्धि होगी। मात्र एक वर्ष की संक्षिप्त समयावधि के भीतर इस जटिल तकनीकी समाधान को तैयार करने के लिए जनरल सेठ ने सैन्य दल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की सराहना की तथा विश्वास जताया कि यह संस्थागत सहयोग भविष्य में भी विभिन्न भौगोलिक जरूरतों के अनुकूल विशेष ईंधनों का निर्माण करेगा।
बर्फीले क्षेत्रों के आम नागरिकों को भी मिलेगा सीधा फायदा
सैन्य उपयोगिताओं के इतर, यह नवाचार लद्दाख या पूर्वोत्तर के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में जीवनयापन करने वाले आम लोगों के दैनिक परिवहन और उपकरणों के संचालन को भी आसान बनाएगा। अत्यंत कम तापमान में भी नागरिक वाहनों के सुचारू संचालन से दुर्गम क्षेत्रों में जनजीवन की सुरक्षा और गतिशीलता सुदृढ़ होगी।



















