राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सक्रिय मादक पदार्थों के एक अंतरराज्यीय गिरोह पर नकेल कसते हुए कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने चार प्रमुख सदस्यों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। रोहिणी जिले के स्पेशल स्टाफ की योजनाबद्ध कार्रवाई में तस्करों के ठिकाने से 7.076 किलोग्राम परिष्कृत हेरोइन जब्त की गई है, जिसका मूल्य वैश्विक अवैध बाजार में लगभग 50 करोड़ रुपये आंका गया है। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे अहम सफलता उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चल रही एक गुप्त रासायनिक निर्माण इकाई का भंडाफोड़ होना रही, जहां बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से हेरोइन तैयार की जा रही थी। उसी गुप्त परिसर से 6.275 किलोग्राम तैयार खेप भी बरामद की गई।
छापेमारी के दौरान जांच दल को मादक पदार्थ तैयार करने में प्रयुक्त होने वाले कई प्रतिबंधित रसायन और उपकरण भी मिले। इनमें 2.504 किलोग्राम सोडियम तथा 787 ग्राम एसिटिक एनहाइड्राइड शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल अफीम के अर्क को शुद्ध हेरोइन में बदलने के लिए रासायनिक उत्प्रेरक के तौर पर किया जाता है। इसके अलावा निर्माण प्रक्रिया में प्रयुक्त गैस सिलेंडर, बिजली से चलने वाला मिक्सर ग्राइंडर, प्लास्टिक के टब, रासायनिक बर्तन, पैकेजिंग पॉलीथिन, वजन मापने वाला इलेक्ट्रॉनिक कांटा और लकड़ी की टोकरियां भी जब्त की गईं।
सितंबर मध्य में सेक्टर बत्तीस से खुली पहली कड़ी
इस पूरे गिरोह की धरपकड़ की शुरुआत 16 सितंबर को मिली एक पुख्ता खुफिया जानकारी से हुई। स्पेशल स्टाफ को गुप्त सूचना मिली थी कि बेगमपुर के इलाके में मादक पदार्थ की एक खेप पहुंचाई जाने वाली है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस दल ने सेक्टर-32 के समीप घेराबंदी कर एक संदिग्ध ग्रैंड विटारा कार को रोका। वाहन की तलाशी लेने पर रोहतक निवासी 58 वर्षीय लक्ष्मण हुड्डा को हिरासत में लिया गया। उसके पास से 300 ग्राम हेरोइन और तीन लाख रुपये की नकदी बरामद हुई, जिसके बाद वाहन और प्रतिबंधित सामग्री को फौरन जब्त कर लिया गया।
लक्ष्मण हुड्डा से हिरासत में की गई सघन पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के दूसरे महत्वपूर्ण सप्लायर का सुराग हाथ लगा। 17 सितंबर को पुलिस टीम ने हरियाणा के सोनीपत में दबिश देकर 51 वर्षीय अनिल उर्फ भोला को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से 501 ग्राम हेरोइन जब्त की गई और तस्करी के काम में इस्तेमाल की जा रही उसकी महिंद्रा XUV-700 गाड़ी को भी अपने कब्जे में ले लिया गया। आधिकारिक रिकॉर्ड की छानबीन में यह बात सामने आई कि अनिल एनडीपीएस कानून के एक पुराने मामले में पैरोल तोड़कर फरार चल रहा था और अदालत द्वारा घोषित अपराधी था।
जानकीपुरम के रिहायशी इलाके में चल रही थी गुप्त लैब
गिरफ्तार किए गए दोनों तस्करों से मिली जानकारियों और आधुनिक तकनीकी निगरानी के समन्वय से जांच अधिकारी उस मुख्य केंद्र तक पहुंचे जहां से यह माल बनकर निकल रहा था। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने 4 अक्टूबर को लखनऊ के जानकीपुरम स्थित सीता कॉलोनी के एक मकान में छापा मारा। वहां से 35 वर्षीय बाबलू को रंगे हाथों पकड़ा गया। आवासीय परिसर की गहन तलाशी के दौरान 6.275 किलोग्राम पूरी तरह तैयार हेरोइन बरामद हुई।
पुलिस के अनुसार, यह पूरी खेप उसी गुप्त प्रयोगशाला में स्थानीय स्तर पर तैयार की जा रही थी। मौके से रासायनिक प्रसंस्करण में काम आने वाला 2.504 किलो सोडियम, 787 ग्राम एसिटिक एनहाइड्राइड और मिक्सर ग्राइंडर, गैस सिलेंडर, वजन कांटे जैसी सभी सामग्रियां कब्जे में ली गईं, जिससे स्पष्ट हुआ कि तस्करों ने रिहायशी इलाके में ही अपना मिनी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर रखा था।
बरेली तक एक सौ बीस किलोमीटर पीछा कर दबोचा सरगना
बाबलू से पूछताछ में सिंडिकेट के सरगना और निर्माण इकाई के संचालक रुकसार अली उर्फ राजू की भूमिका उजागर हुई। पुलिस टीम ने फौरन उसकी तलाश शुरू की और लगातार भाग रहे रुकसार का करीब 120 किलोमीटर तक पीछा करते हुए उसे उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से धर दबोचा। जांच रिकॉर्ड के अनुसार, रुकसार अली आदतन अपराधी है और पहले भी एनडीपीएस मामलों से जुड़े तीन अलग-अलग मुकदमों में शामिल रह चुका है।
जांच से स्पष्ट हुआ है कि यह संगठित तंत्र उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था। एक तरफ लखनऊ की गोपनीय इकाई में कच्चा माल मंगाकर हेरोइन तैयार की जाती थी, तो दूसरी तरफ प्रशिक्षित कूरियर नेटवर्क के जरिए इसे दिल्ली और पड़ोसी शहरों में पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन, कच्चे माल के मूल स्रोतों और इसमें शामिल अन्य मददगारों की पहचान करने में जुटी हुई है।





















