जापान के नीति निर्माताओं ने सरकारी बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया को बेहद संतुलित और नपे-तुले तरीके से प्रबंधित करने का फैसला किया है। साने ताकाइची ने स्पष्ट किया है कि देश की समग्र अर्थव्यवस्था, मूल्य स्तर, कर राजस्व, ब्याज दरों, ऋण चुकाने की लागत और वित्तीय बाजारों के मौजूदा रुझानों की गहन समीक्षा करने के बाद ही वार्षिक ऋण निर्गम की राशि को उचित ढंग से नियंत्रित किया जाएगा। सरकारी नीतियों पर घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा कायम रखने के उद्देश्य से नीति निर्माता जनता और बाजार के सभी बड़े प्रतिभागियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेंगे। इसके साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया है कि यदि आर्थिक मोर्चे या बाजारों में किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित हलचल देखी जाती है, तो उसके प्रभाव का तुरंत विश्लेषण किया जाएगा और आवश्यकतानुसार तेजी से फैसले लिए जाएंगे। इसके अलावा सरकार वर्ष के अंत तक एक नई 5-वर्षीय निवेश योजना भी तैयार करने जा रही है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों का प्रभाव
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी येन (JPY) दुनिया की सर्वाधिक कारोबार वाली मुद्राओं में गिनी जाती है। मुद्रा के मूल्य का निर्धारण मोटे तौर पर जापानी अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन, बैंक ऑफ जापान की नीतिगत घोषणाओं, अमेरिकी और जापानी बॉन्ड यील्ड के अंतर तथा वैश्विक निवेशकों के जोखिम दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। बैंक ऑफ जापान के मुख्य दायित्वों में विदेशी मुद्रा का नियंत्रण शामिल है, जिसके चलते उसके नीतिगत कदम येन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं। अतीत में केंद्रीय बैंक ने मुद्रा बाजारों में सीधे हस्तक्षेप भी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामान्य तौर पर येन के मूल्य को नीचे लाना रहा है। हालांकि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की राजनीतिक चिंताओं के कारण केंद्रीय बैंक ऐसा कदम बार-बार उठाने से बचता है।
वर्ष 2013 से 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनाई गई बेहद ढीली मौद्रिक नीति के कारण जापानी येन में अपने अन्य प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कमजोरी देखी गई थी। इस अवधि में अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों और जापानी केंद्रीय बैंक की नीतियों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। पिछले एक दशक में विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के बीच नीतिगत अंतर काफी बढ़ गया था, जिससे 10-वर्षीय अमेरिकी और जापानी बॉन्ड के प्रतिफल का अंतर भी विस्तृत हुआ। इस स्थिति ने जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को मजबूत बढ़त दिलाई। हालांकि वर्ष 2024 में बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अत्यधिक ढीली नीति को धीरे-धीरे समाप्त करने के निर्णय और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती शुरू करने से यह प्रतिफल अंतर कम होने लगा है, जिससे येन को कुछ सहारा मिला है। इसके साथ ही जापानी येन को वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित निवेश विकल्प भी माना जाता है, जिससे वित्तीय उथल-पुथल के समय स्थिरता की तलाश में निवेशक इस मुद्रा की ओर रुख करते हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजार और डॉलर के उतार-चढ़ाव की स्थिति
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में विभिन्न प्रमुख मुद्रा जोड़ों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। कारोबार के दौरान USD/JPY जोड़ी में 0.02% की गिरावट के साथ 157.80 का स्तर देखा गया। बाद में एशियाई कारोबारी सत्र में सोमवार को USD/JPY ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करते हुए फिर से 158.00 का स्तर पार कर लिया और यह जोड़ी एक सप्ताह पुराने दायरे में कारोबार करती रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की घटती संभावनाओं के बावजूद वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता अमेरिकी डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि बैंक ऑफ जापान की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के चलते इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।
दूसरी ओर, एशियाई कारोबार के अंतिम घंटों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में नई बिकवाली देखी गई, जिससे यह जोड़ी फिसलकर 0.6900 के स्तर की ओर आ गई। मध्य पूर्व तथा रूस और यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच डॉलर की मजबूती ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बनाया है। बाजार प्रतिभागी अब तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी उम्मीदों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही EUR/USD की जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक गिर गई थी, जो जनवरी के अपने 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरोप के ऊर्जा संकट और उच्च लागतों के जोखिम के साथ-साथ डॉलर की ताकत ने यूरोपीय मुद्रा को कमजोर किया है।
कीमती धातुओं के बाजार पर आर्थिक आंकड़ों का असर
सोने के बाजार में एशियाई सत्र के दौरान मामूली तेजी के बाद भी यह धातु बढ़त बरकरार रखने के लिए संघर्ष करती नजर आई। मिश्रित वैश्विक संकेतों के कारण सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के ठीक नीचे लगभग स्थिर दायरे में कारोबार करता दिखा। शुक्रवार को जारी हुए कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी डॉलर ने तेजी हासिल की और अप्रैल 2025 के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। डॉलर की इस तेजी ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है, हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की घटती संभावनाओं ने सोने में तेज गिरावट को सीमित रखने में मदद की है।


















